गन्ने की मिठास compleet

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rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:46

गन्ने की मिठास--35

गतान्क से आगे......................

संगीता मेरे सीने से बुरी तरह चिपक कर मेरे लंड को दबा रही थी और मैने मोका देख कर अपना हाथ उसकी पॅंटी के अंदर डाल कर उसकी चूत की फांको के भीतर अपनी उंगली से जैसे ही सहलाया संगीता एक दम से मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत मे दबाते हुए कहने लगी,

संगीता- भैया आह मत करो आह बहुत अच्छा लग रहा है प्लीज़ भैया आह सीईईई आहह

राज- संगीता एक बार देख तो सही अपने भैया का लंड, देख कितना मोटा और मस्त है और फिर मैने संगीता के होंठो को चूमते हुए उसके मूह को अपने लंड की और कर दिया और संगीता ने धीरे से अपनी आँखे खोल कर मेरे लंड को देखा और फिर से अपनी आँखे बंद कर के मेरे लंड को खूब कस कर भींच दिया जैसे वह मेरे लंड को निचोड़ देना चाहती हो,

मुझसे अब सहा नही जा रहा था और मैने संगीता को उसका जीन्स बिछा कर उसे लेटा दिया और खड़ा होकर अपना पेंट उतारने लगा संगीता अपने दोनो हाथो से अपनी आँखे च्छुपाए हुए लेटी हुई थी और मैं जब पूरा नंगा हो गया तब मैने संगीता को आवाज़ दी और संगीता ने जैसे ही मुझे पूरा नंगा खड़ा देखा उसने मुस्कुरकर अपनी आँखे फिर से अपने हाथ से च्छूपा ली,

मैं संगीता के पेरो के बीच बैठ गया और उसकी चूत को जैसे ही अपने हाथ से सहलाया संगीता ने अपनी दोनो जाँघो को बुरी तरह कस लिया और अपना हाथ आँखो से थोड़ा सा हटा कर मुझे देखने लगी, मैने मुस्कुराते हुए उसकी गुदाज जाँघो को सहलाते हुए धीरे से अलग करने की कोशिश की और संगीता ने खुद ही अपनी जाँघो को पूरा खोल दिया मैने उसकी पॅंटी पकड़ कर एक दम से खींच कर उसकी टाँगो से अलग कर दिया और संगीता के पूरे नंगे बदन को ललचाई नज़रो से देखने लगा,

कुच्छ देर बाद मैने संगीता की जाँघो को उपर उठा कर उसके दूध की ओर मोड़ दिया और फिर उसकी फूली चूत की फांको को अपनी जीभ से सहलाते हुए अलग करने की कोशिश करने लगा तब संगीता ने एक दम से अपनी चूत उठा कर मेरे मूह से लगा दिया और मैं उसकी गुलाबी रसीली बुर को खूब ज़ोर से अपनी जीभ निकाल कर चाटने लगा,

ओह भैया सीई सीयी आह आह ओह भैया मैं मर जाउन्गि प्लीज़ मत करो आह आह ओह सीईईईई आह

मैं संगीता की चूत की खुश्बू और उसकी चूत का रस दोनो का मज़ा लेता हुआ उसकी बुर को खूब दबोच दबोच कर चूसने लगा और संगीता बुरी तरह तड़पने लगी, मैने अपनी टाँगो को संगीता के मूह की ओर करके उसकी चूत को चाटने लगा तभी संगीता ने भी मेरे लंड को कस कर पकड़ लिया और मेरे लंड को सहलाते हुए मेरे आंड्को को अपने मूह से चूमते हुए सहलाने लगी, मैं उसकी चूत और गंद के छेद तक अपनी जीभ फेर फेर कर उसकी चूत चाट रहा था और संगीता ने मेरे लंड के टोपे को खोल कर चाटना शुरू कर दिया कभी कभी वह मेरे लंड को मूह मे भर कर अपनी जीभ लंड के चारो ओर घुमाने लगती तब मैं भी उसकी चूत के छेद को अपनी जीभ से दबा दबा कर उसका रस चूसने लगता,

संगीता कभी लंड मूह से बाहर निकालती कभी उसे फिर मूह मे लेकर चूसने लगती, मैं भी उसकी चूत को कभी दन्तो से काटने लगता कभी उसकी चूत मे जीभ डालने लगता और कभी उसकी चूत के तने हुए दाने को अपने होंठो से पकड़ कर चूसने लगता,

संगीता की गंद अब ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी थी और वह पूरी ताक़त लगा लगा कर अपनी चूत को मेरे मूह से रगड़ने लगी थी, मैं उसकी चूत के दाने को चूस्ता तो संगीता अपनी चूत उठा कर मुझे अपनी चूत का छेद चटाने लगती और जब मैं उसकी चूत का छेद चाटने लगता तब वह अपनी चूत उठा कर मुझे उसका दाना चटाने की कोशिश करती,


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:47

मैं पागलो की तरह अपनी बहन की चूत को खूब चूस चूस कर लाल कर रहा था और संगीता की चूत खूब नमकीन पानी छ्चोड़ रही थी तभी अचानक संगीता की बुर को जब मैने एक दम ज़ोर से चूस लिया तो उसका बदन अकड़ गया और उसकी चूत से खूब चिकनाहट बाहर आने लगी और संगीता अपनी चूत मेरे मूह से खूब ज़ोर ज़ोर से रगड़ते हुए एक दम से सुस्त पड़ गई,

मैं संगीता के मूह के पास जाकर उसके होंठ चूमते हुए कहा, गुड़िया रानी कैसा लगा, मज़ा आया कि नही

संगीता ने मेरी बात सुन कर मेरा मूह पकड़ कर चूमते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया और मैं वैसे ही संगीता के नंगे बदन से चिपक कर उसके उपर लेट गया, मैं जैसे ही लेटा संगीता ने खुद मेरे लंड को चूत के छेद से भिड़ा दिया और वह कोई हरकत करती इसके पहले ही मेरी कमर ने एक जबरदस्त धक्का संगीता की चूत मे मार दिया और संगीता के हस्मुख चेहरे पर एक दम से दुनिया भर का दर्द सिमट आया और उसके मूह से एक दर्दनाक चींख निकल गई,

ओह भैया मर गई अहह सीईईईईईईईईईईईई निकाल लो भैया आह आह संगीता अपने हाथ पाँव फेकने लगी और मारे दर्द के उसका बुरा हाल हो गया तभी मैने उसके दूध को अपने हाथो मे पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया, मेरा आधा लंड वैसा का वैसा संगीता की चूत को फाडे हुए फसा था और मैं ना उसे आगे धकेल रहा था और ना ही ज़रा भी ढिलाई करके उसे पिछे ले रहा था, बस एक फिक्स ताक़त लगाए उसकी चूत से लंड भिड़ाए हुए उसके मोटे मोटे आमो को खूब दबा दबा कर मसल रहा था,

जब मैने देखा की संगीता वापस अपने पेरो को इधर उधर करने लगी है और उसे दूध दब्वाने मे मज़ा आने लगा है तभी मैने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख कर चूस्ते हुए एक दूसरा धक्का कॅच्च से उसकी चूत मे ऐसा मारा कि मेरा लंड पूरा तो नही लेकिन आधे से ज़्यादा अंदर समा गया और संगीता के मूह से फिर से एक चीख निकल गई और इस बार उसकी आँखो से आँसू आ गये, वह दर्द से चिल्लाते हुए कहने लगी भैया आप तो बाहर निकाल लो मुझे नही चुदवाना है,

राज- अरे गुड़िया अब तो सब हो गया अब तू कुँवारी नही रही बल्कि एक चुदी हुई औरत बन चुकी है अब देख तुझे कितना मज़ा आएगा अपने भैया के लंड से, जितना दर्द इस लंड ने तुझे दिया है अब तुझे उतना ही मज़ा भी देगा अब देखना मैं कुच्छ नही करूँगा और तू खुद कहेगी कि भैया मेरी चूत मे अपना पूरा लंड डाल कर मुझे खूब कस कस कर चोदो,

संगीता- हस्ते हुए मुझे अपनी जीभ दिखा कर कहने लगी मैं ऐसा कुच्छ भी नही कहने वाली हू भैया,

राज- ठीक है देखते है और फिर मैने अपने लंड को उसकी चूत मे फसाए हुए बिना हीले संगीता के मोटे मोटे दूध को दबाते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया,

कुकछ देर तक तो संगीता ऐसे ही दूध दब्वाति पड़ी रही लेकिन कुच्छ देर बाद उसकी टाँगो मे हरकत शुरू हो गई और फिर जब उसकी चूत मे ज़्यादा चिकनाहट होने लगी तब वह खुद अपनी कमर उठा कर मेरे लंड को आगे पिछे करने की कोशिश करने लगी,

राज- क्या हुआ संगीता चूत मे दर्द हो रहा है ना, ऐसे ही पड़ी रहो नही तो और दर्द होगा

संगीता- मुस्कुराते हुए मेरे सीने पर हाथ मारने लगी, मैने कहा क्या हुआ और उसके दूध कस के दबा दिया

संगीता- मूह बनाते हुए भैया अब ज़्यादा नाटक मत करो, और धक्का मारो,

राज- हस्ते हुए मतलब

संगीता- मतलब कि मुझे अब चोदिये

राज- मैं नही चोदुन्गा तुझे दर्द होता है और फिर मैं उसके दूध पीने लगा

संगीता- उसने मेरा मूह पकड़ कर अपने दूध से हटाते हुए मेरे मूह को अपने हाथ से एक तरफ हटा कर कहा, प्लीज़ भैया अब मुझसे नही सहा जाता है अब मुझे चोद भी दो,

मैने संगीता की बाते सुन कर उसे अपनी बाँहो मे कसते हुए उसकी चूत मे अपने लंड को पहले धीरे धीरे आगे पिछे करना शुरू कर दिया और फिर जब उसकी चूत खूब चिकनी लगने लगी तब मैने संगीता के दूध मसल्ते हुए उसकी चूत मे कस कस कर धक्के मारना शुरू कर दिए और संगीता ओह ओह आह आह सी आह सी अहहह अहह जैसे शब्द निकाल कर अपनी चूत अपने भैया के तगड़े लंड से मरवाने लगी, मेरा लंड खूब कसा हुआ संगीता की मस्तानी चूत मे जा रहा था और मैं उसके दूध को इतना ज़ोर से मसल रहा था कि वह लाल हो चुके थे,

rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 21 Oct 2014 23:47

संगीता को खूब मज़ा आ रहा था और वह मुझसे चिपकी हुई अपनी गंद अब मेरे लंड पर मारने लगी और मैं डचा डच उसकी बुर को ठोकने लगा,

राज- गुड़िया रानी कैसा लग रहा है

संगीता- ओह भैया आह आह बहुत मज़ा आरहा है ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से चोद्ते रहो आ आ सीईईईईईईई आह ओह भैया

संगीता की चूत अब इतनी चिकनी हो चुकी थी कि मेरा लंड सतसट उसकी बुर की चुदाई कर रहा था, आज मैने जितना दूध अपनी बहन के दबाए थे उतने दूध अपनी जिंदगी मे कभी नही मसले थे, संगीता के दूध लाजवाब थे और उन्हे जितना दबाओ उतना ही और कठोर होकर हाथो से बाहर आ जाते और मैं उन्हे फिर से अपने हाथो मे भर कर कस कर दबाने लगता,

हमे यह भी होश नही रहा था कि शाम हो चुकी है और कुच्छ देर मे अंधेरा हो जाएगा, मैं खूब हुमच हुमच कर संगीता को चोद रहा था और संगीता अपनी चूत मेरे लंड पर खूब ज़ोर ज़ोर से मार रही थी तभी संगीता ने मेरे लंड को अपनी चूत मे कस कर जाकड़ लिया और मुझे पागलो की तरह चूमते हुए कहने लगी चोदो और चोदो खूब कस कर चोदो भैया मैं पूरी ताक़त से उसकी चूत मारने लगा और फिर एक दम से संगीता और मैं पूरी ताक़त से च्चिपक गये मेरा लंड उसकी चूत की गहराई मे दबा हुआ था और संगीता की चूत मेरे लंड को निचोड़ निचोड़ कर उसका रस निकालते हुए खुद भी पानी छ्चोड़ने लगी,

हम दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे के चूत और लंड को एक दूसरे के चूत और लंड से दबाए अपना अपना पानी छ्चोड़ने लगे और एक दूसरे को पागलो की तरह जकड़े हुए चूमने लगे,

करीब 5 मिनिट बाद संगीता ने मुझे अपने उपर से धकेलते हुए कहा

संगीता- भैया अब उठो भी मैं तो बुरी तरह थक गई हू,

राज- अच्छा मेरी गुड़िया रानी मेहनत मैं कर रहा हू और थक तुम गई हो

संगीता- अपनी जीभ निकाल कर मुझे चिढ़ाने लगी तभी मैने लपक कर उसकी जीभ को अपने मूह मे भर कर चूस लिया और उसे फिर से बाँहो मे लेकर उसके दूध दबाने लगा,

राज- संगीता अभी तो 6 बजे है, चल एक बार और तुझे मज़ा देता हू फिर हम घर चलते है, उसके बाद मैने संगीता को उठा कर वही जीन्स के उपर घोड़ी बना दिया और इस बार मैने उसकी गुदा और चूत को फैला कर जब चाटना शुरू किया तो संगीता मस्ती मे अपनी गंद हिलाने लगी,