मेरी चार ममिया complet

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The Romantic
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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:26

मेरी चार मामियां --5

गतान्क से आगे...................................

"अगर सच कहूँ तो नही..... मेरी बहोत सारी कल्पनाए थी जो पूरी ना

हो सकी. बचपन से ही में बहोत सेक्सी थी. दिल करता था कि पिताजी

से

भाई से सभी से चुदवाऊ. एक दिन मम्मी पापा को चुदाई करते देखा तो

मुझे भी लगा कि मैं उनसे भी चुदवाऊ. मेरा कोई भाई है तो नही

और यहाँ ससुराल में भी एक तुम ही रिश्तेदार हो. दिल करता है कि

में भी तुमसे खूब चुदवा कर तुम्हारे बच्चे की मा बन जाउ." मोना

ने

मुस्कुराते हुए कहा.

"क्या सच मच तुम मेरे बच्चे की मा बनना चाहती हो?" मेने पूछा.

"हां राज सही मे और अगर कुछ हुआ भी तो में कह दूँगी कि बच्चा

मेरे पति का है." मोना ने मेरी छाती पर हाथ फिराते हुए कहा.

इसी तरह बातें करते करते कब नींद आ गयी हमे पता भी नही

चला. सुबह जब सूरज की गर्मी से बदन जलने लगा तभी मेरी आँख

खुली. सुबह पहली बार मेने मोना के नंगे बदन को दिन के उजाले मे

देखा. उसका गोरा बदन सूरज की रोशनी मे चमक रहा था. उसके खुले

बॉल उसकी चुचियों को ढके हुए थे. गुलाबी होठों पर एक प्यारी

मुस्कान नाच रही थी जैसे की नींद मे कोई प्यारा सपना देख रही

हो.

में बेखायाली मे जब मोना के नंगे बदन को निहार रहा था तभी

अनिता मामी और कंगन मामी आ गयी. हम दोनो को नंगा देख दोनो फिर

हमे चिढ़ाने और हँसने लगी. दोनो ने स्नान कर लिया था और उनके

गीले बालों से अभी भी पानी की बूंदे टपक रही थी. दोनो मुझे

देख

मुस्कुरई फिर मोना मामी को उठाने लगी.

"सोने दो ना क्यों तंग करते हो." कहकर मोना ने अपने दोनो हाथ उठा

कर एक अंगड़ाई ली तो उसकी चूत थोड़ा उपर को उठ गयी. मेने देखा

की

उसकी झांतें मेरे और उसके रस से चिपचिपा रही थी.

जब उसने आँख खोली और एहसास हुआ कि वो नंगी है तो उसने झट से

पास ही पड़ी अपनी सारी उठा अपने बदन पर डाल ली.

"अरे क्यों छुपा रही है अपने इस नशीले बदन को, हां उठो और

नीचे आ कर नहा धोकर नाश्ता कर लो." इतना कहकर अनिता मामी ने

उसकी सारी खींच ली और हमारे सारे कपड़े लेकर नीचे चली गयी.

"सारी रात तो नंगे रहे हो अब क्या ज़रूरत पड़ गयी कपड़े पहनने की,

ऐसे नंगे ही घूमना है घर मे." कहकर कंगन मामी भी चली

गयी.

में और मोना नंगे ही नीचे आ गये. जैसे ही अंदर आए मोना ने

कहा, "राज क्यों ना हम दोनो साथ साथ स्नान करें."

इसके पहले की में कुछ कहता मोना मुझे खींच कर अपने साथ

बाथरूममे ले आई.

हम दोनो पहले से ही नंगे थे इसलिए उतारने के लिए कुछ था नही.

मोना सिर्फ़ अपने गले मे पहने मंगल सुत्र को उतार कर साइड मे रख

दिया. फिर वो मेरे शरीर पर पानी डालने लगी और साबून मलने लगी.

उसकी चूड़ियों की खनकार से मेरा लंड एक बार फिर तन्न्कर खड़ा हो

गया.

"मोना कभी किसी का लंड चूसा है?" मेने पूछा.

"एक बार तुम्हारे मामा जी ने कोशिश की थी पर मुझे अच्छा नही लगा."

मोना ने कहा.

मैने मोना को अपने सामने नीचे बिठा दिया, "अरे बहोत मज़ा आएगा आओ

में तुम्हे सिखाता हूँ." कहकर में अपने खड़े लंड को उसके होठों

पर घिसने लगा.

"अपनी जीब को पहले मेरे सूपदे पर फिराओ और इसे चॅटो." मेने कहा.

मोना ने आनी जीभ बाहर निकाली और सूपदे पर घूमाने लगी.

"हां अब इसे अपनी मुट्ठी मे पाकड़ो और अपनी ज़ुबान को उपर से नीचे

तकले जाकर चॅटो फिर नीचे से उपर तक."

मैं जैसा कह रहा था मोना वैसे ही करती जा रही थी.

"अब अपना मुँह खोलो और पहले सिर्फ़ सूपदे को मुँह मे लेकर चुलबुलाओ,

साथ ही इसपर अपनी जीभ फिराती रहना."

मोना ने मेरे लंड के सूपदे को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगी.

मेने अपना हाथ नीचे कर उसकी चुचियों को भींचे लगा.

"अब अपने गले को थोड़ा खोलो और जितना लंड अंदर ले सकती हो लो और

फिर बाहर निकालो सिर्फ़ सूपदे तक फिर उसे अंदर लो जैसे कि तुम्हारा

मुँह ना होकर तुम्हारी चूत हो और मेरा लंड उसमे अंदर बाहर हो रहा

है." मेने उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा.

मोना अब मेरे बताए तरीके से मेरा लंड चूसने लगी. मुझे भी मज़ा

रहा था मेने उसके सिर को पकड़ा और उसके मुँह मे धक्के लगाने लगा.

मोना ने मेरे लंड को अपने मुँह से निकाल दिया और बोली, "राज मुझसे अब

नही रहा जाता मुझे चोदो ना प्लीज़."

मेने उसे दीवार के सहारे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत मे

अपना लंड पेल दिया. में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.

"ओह राज चोदो हाआँ ज़ोर ज़ोर से चोदो ऑश ःआआआआण चोदो और

ज़ोर से." मोना सिसकने लगी.

मेरे लंड काफ़ी उबाल पर था, "ऑश मोना डार्लिंग मेरा तो छूटने

वाला है,"

"में भी कगार पर हूँ राज छोड़ दो अपना पानी मेरी चूत मे ऑश

हाां."

मेने दो चार धक्के लगाए और हम दोनो साथ साथ खलास हो गये.

फिर एक दूसरे को खूब अच्छी तरह साबून लगाया और स्नान करके हम

बाहर आ गये.

जब हम दोनो बाहर आए तो टेबल पर नाश्ता तय्यार था.

जब हम थोड़ा संभाल चुके तो दिन के 10.00 बज चुके थे. थोड़ी

भूक भी लग रही थी. तीनो मामियों ने मिलकर खाना बनाया और जब

हम सब खाना खा चुके तो सभी हॉल मे बैठ कर टीवी देखने लगे.

हां में ये तो बताना ही भूल ही गया कि हम चारों अभी पूरी

तरह नंगे ही थे.

"दीदी क्यों ना अब सिमरन को भी शामिल कर लिया जाए." कंगन मामी

ने कहा.

"कंगन तुम तो जानती हो उसका स्वाभाव कितना टेडा है, वो इतनी जल्दी

हम सब मे शामिल नही होगी." अनिता मामी ने कहा.

"अरे दीदी आप उसे फोन करके बुलाओ तो सीधे नही मानेगी तो साली को

ज़बरदस्ती चुदवा देंगे हमारे राज से..... क्यों राज क्या कहते हो?"

कंगन मामी ने कहा.

"वो तो ठीक है मामी..... पर अगर बाद मे उसने मामा जी से कह दिया

तो.. क्या होगा." मेने अपना डर बताते हुए कहा.

"अरे इतना डरते क्यों हो.... अगर कुछ हुआ तो हम तीनो बात को

संभाल लेंगे." कंगन ने कहा.

अनिता मामी ने सिमरन मामी को फोन लगाया.

"सिमरन, अनिता बोल रही हूँ... ऐसा करो तुम यहाँ कंगन के मकान

पर आ जाओ." अनिता मामी ने कहा.

"पर दीदी मेने अभी तक स्नान भी नही किया है." वहाँ से सिमरन ने

कहा.

"अरे तो यहाँ आकर कर लेना." अनिता मामी ने कहा.

"ठीक है दीदी आती हूँ." कहकर सिमरन मामी ने फोन रख दिया.

अब हम चारों मिलकर सिमरन मामी को फँसाने का प्रोग्राम बनाने

लगे.

प्लान इस तरह बना कि में बेडरॉंम मे जाकर पलंग पर सोने का बहाना

करूँगा. कंगन मामी और मोना मामी घर के काम काज मे जुटी

रहेंगी. और जब सिमरन मामी दरवाजे की घंटी बजाएगी तो रूल के

हिसाब से अनिता मामी सिर्फ़ पेटिकोट पहने दरवाज़ा खोलेंगी.

अगर सिमरन मामी ने पूछा कि वो ऐसे क्यों है तो पहले ही तय के

तहत अनिता मामी कहेंगी कि वो अभी अभी स्नान कर के निकली है. जब

सिमरन मामी घर मे आ जाएँगी तो तीनो मामिया उसे पहले स्नान

करने की सलाह देंगी. कंगन मामी उसे अपने कपड़े और टवल देंगी.

और फिर हमारा सही प्लान शुरू होता है, जैसे ही सिमरन मामी

नहाने के लिए बाथरूम मे घुसेगी तीनो मामी उसके सारे कपड़े और

टवल बाथरूम के दरवाज़े पर से उठा कर ले जाएँगी. इस तरह जब

सिमरन नहा कर निकेलेगी तो पहनने के लिए वहाँ कुछ भी नही होगा.

उसे नंगी ही भीगे हुए बेडरूम तक आना होगा. तब हम उसे अपने खेल

मे शामिल कर सकते है.

जब एक बार प्लान फाइनल हो गया तो अनिता मामी ने पहले जाकर अपना

चेहरा धोया फिर अपने बालों को थोड़ा गीला कर लिया जिससे लगे कि

अभी अभी नहा कर निकली है. फिर उन्होने हल्के नीले रंग का

पेटिकोट अपनी चुचि के उपर बाँध लिया. पेटिकोट इतना छोटा था कि

बड़ी मुश्किल से उनके चूतदों को धक पा रहा था. उनकी गोरी जंघे

और जाँघो का अन्द्रूनि हिस्सा सॉफ दीखाई दे रहा था.


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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:27

में बेडरूम मे आ गया. बेडरूम ठीक बाथरूम के सामने था इसलिए

जब सिमरन मामी नंगी बाथरूम से बाहर आएँगी तो में पहला शक्श

होऊँगा जो उन्हे उस हालत मे देख पाएगा.

तभी दरवाज़े पर ठप थापाहट हुई और अनिता मामी दरवाज़ा खोलने

चली गयी. तभी सिमरन मामी की आवाज़ सुनाई पड़ी,

"दीदी.... आअप इस हालत मे..... कहीं आप पागल तो नही हो गयी है

कि सिर्फ़ पेटिकोट पहन कर दरवाज़ा खोल रही हो."

"अरे में अभी अभी नहा कर निकुली हूँ और तुम ने दरवाज़ा खाट

खता दिया." अनिता मामी ने कहा.

"ओह्ह.... अच्छा ये बताए कि हमारा राज कहाँ है और क्या कर रहा

है." सिमरन मामी ने पूछा.

"वो सो रहा है.... हाँ तुमने बताया था कि तुमने स्नान नही किया

है... तो जाओ पहले स्नान कर लो फिर बातें करेंगे... मैं तुम्हे

टवल लाकर देती हूँ." कंगन मामी ने कहा.

"ठीक है में पहले नहा ही लेती हूँ," कहकर सिमरन मामी बेडरूम

से होती हुई बाथरूम मे गयी और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया.

सब कुछ हमारे प्लान के मुताबिक हो रहा था. तभी कंगन मामी ने

मुझे आँख मारते हुए एक सारी, ब्लाउस पेटिकोट और टवल बाथरूम के

दरवाज़े पर रख दिए, "सिमरन मेने कपड़े दरवाज़े पर रख दिए

है."

"ठीक है दीदी." सिमरन ने कहा. थोड़ी देर मे दरवाज़े पर एक के बाद

एक उनके कपड़े नज़र आने लगे. सिमरन मामी ने अपने सारे कपड़े उतार

दरवाज़े पर रख दिए थे. यहाँ तक कि सिमरन ने अपनी ब्रा और पॅंटी

भी उतार कर रख दी. फिर पानी गिरने की आवाज़े आने लगी.

तभी कंगन मामी ने एक एक करके सारे कपड़े दरवाज़े पर से खींच

लिए यहाँ तक कि टवल भी. अब सिमरन मामी के पास पहनने के लिए

कुछ भी नही था. इन सभी बातों से अंजान सिमरन मामी नहाने मे

लगी हुई थी. कंगन मामी बेडरूम मे आई और मुस्कराते हुए सारे

कपड़े मेरे बगल मे रख दिए.

कंगन मामी कपड़े रख कर जैसे ही जाने लगी मेने आवाज़ लगाई,

"मामी ज़रा सुनना."

"क्या बात है राज." मामी ने पूछा.

"क्या सब कुछ हमारी सोच के अनुसार ही होगा." मैने कंगन मामी से

पूछा.

कंगन मामी मेरे पास आई और मेरे हाथों को अपने हाथों मे लेकर

बोली, "राज क्यों डर रहे हो, तुम्हारी ही इच्छा थी ना कि तुम सिमरन को

चोदो. अगर उसके साथ ज़बरदस्ती भी करनी पड़े तो करना हम तीनो

तुम्हारा साथ देंगे." उसने मुझे बताया.

इतने मे अनिता मामी और मोना मामी भी कमरे मे आ गयी थी.

"अरे राज तुम चिंता मत करो, हम हैं ना साली ज़्यादा नखरे

दीखाएगी तो हम मिलकर उसके हाथ पैर बाँध देंगे और आँखों पर

पट्टी भी बाँध देंगे." मोना मामी ने कहा.

मुझे विश्वास नही हो रहा था कि मेरी ये तीन मामिया अपनी ही

देवरानी और जेठानी के साथ ऐसा करने के लिए कह रही है. वाह रे

चूत की आग जो इंसान से कुछ भी करवा सकती है.

करीब 10 मिनिट के बाद सिमरन मामी की आवाज़ सुनाई पड़ी, वहाँ कपड़े

ना पाकर वो हैरान थी और टवल के लिए आवाज़ दे रही थी पर किसी

ने भी उनकी बात का जवाब नही दिया वो थोड़ी देर वहीं बाथरूम मे

रुकी फिर वही हुआ जो हमने सोचा था.

पहले तो उन्होने धीरे से बाथरूम का दरवाज़ा खोला और इधर उधर

झाँक की कहीं कोई है तो नही. किसी को भी वहाँ ना पाकर, दिन के

उजाले मे वो बाथरूम से निकली और बेडरूम के ओर बढ़ी. भीगा

बदन, पानी की बूंदे उनके शरीर से टपक रही थी. एक हाथ से अपनी

चुचियो को ढके थी और दूसरा हाथ अपनी चूत पर रखे वो आ

रही थी.

बाथरूम से निकलकर लगभग दौड़ती हुई वो आँगन से होती हुई बेडरूम

मे आई और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया. सिमरन मामी को ये पता

नही था कि में कमरे मे हूँ.

"पता नही क्या हो रहा है इस घर मे? अचानक पता नही कैसे मेरे

कपड़े गायब हो गये दरवाज़े पर से?" वो बड़बड़ा रही थी.

उनके नंगे बदन को देखते हुए मेने अंजान बनते हुए पूछा. "कैसे

कपड़े मामी?"

मामी बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी. पानी उनके गीले बालों से

होता हुआ चुचियो पर से चूत के रास्ते नीचे ज़मीन पर बूँद दर

बूँद गिर रहा था. खिड़की से आती गरम हवा मे उनका बदन कांप रहा

था.

सिमरन मामी का गोरा और नंगा बदन देख मेरी आँखे तो फटी की फटी

रह गयी. मामी भी मुझे देख चौंक पड़ी थी. मेरा लंड तन कर

शॉर्ट्स में खड़ा हो चुका था और शायद मामी की नज़र भी मेरे

खड़े लंड पर पड़ चुकी थी.

मामी तो जैसे पत्थर हो गयी थी. उन्होने एक शब्द भी नही कहा.

मुझे ही कुछ करना था. मैं अपने लंड को शॉर्ट्स के उपर से मसल्ने

लगा.

मैं पलंग से खड़ा हुआ तो मेरा लंड और तन कर खड़ा हो गया.

मामी के मुँह से अभी भी एक भी शब्द नही निकला था बल्कि उसकी

नज़रें मेरे लंड पर ही टिकी थी, शायद उन्हे विश्वास नही हो रहा

था कि कल का बच्चा आज जवान हो गया था.

में अपने लंड को मसल्ते हुए उनके पास आया और उनके कंधो से पकड़

उन्हे हिलाया. अगले पल मामी ने मुझे जोरों से अपनी बाहों मे जाकड़

लिया. मेरा खड़ा लंड शॉर्ट्स के उपर से ही उनकी चूत पर ठोकर

मारने लगा.

मुझे उमीद नही थी कि मामी ऐसा भी कर सकती थी. वो किसी

प्रेमिका की तरह मुझे बाहों मे बाँधे खड़ी थी. उनका भीगा बदन

मुझे अपनी बाहों मे काफ़ी अछा लग रहा था. उनकी साँसे तेज हो चली

थी और साँसे की भाप को में अपने कंधों पर महसूस कर रहा था.

जैसे ही मेने अपने हाथ उनकी गीली पीठ पर रखे वो सिहर गयी और

मुझसे अलग हो गयी.

"क्या हुआ मामी?" मेने पूछा.

"हे भगवान ये में क्या करने जा रही थी,,,,,, नही में ऐसा नही

कर सकती....ओह भगवान मुझे माफ़ कर देना...." इतना कहकर वो

दरवाज़े की ओर बढ़ गयी.

मेने उन्हे पीछे से पकड़ा और अपने पास खींच लिया, "मामी ये आप

ही थी जिसने शुरुआत की थी..... अब इस तरह मुझे छोड़ कर नही जा

सकती."

"नही......... प्लीज़ मुझे जाने दो ये सब पाप है......में ये सब

नही कर सकती." कहकर मामी अपना हाथ मेरे हाथों से छुड़ाने की

कोशिश करने लगी.

पर मेरे हाथों की पकड़ काफ़ी मजबूत थी. मैने ज़ोर लगा कर उन्हे

अपनी और खींचा. मैं सिमरन मामी को अब ऐसे ही जाने देने वाला

नही था, चाहे जो जाए. उनके नंगे बदन ने मुझे पागल कर दिया

था, उनकी चुचियाँ को पीने को मेरे ज़ुबान सुख रही थी.

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Re: मेरी चार ममिया

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 07:28

5

"Agar sach kahun to nahi..... meri bahot sari kalpanai thi jo puri na

ho saki. Bachpan se hi mein bahot sexy thi. Dil karta tha ki pitaji

se

bhai se sabhi se chudwaun. Ek din mummy papa ko chudai karte dekha to

mujhe bhi laga ki mien unse bhi chudwaun. Mera koi bhai hai to nahi

aur yahan sasural mein bhi ek tum hi rishtedar ho. Dil karta hai ki

mein bhi tumse khub chudwakar tumhare bacche ki maa ban jaun." Mona

ne

muskurate hue kaha.

"Kya sach mach tum mere bacche ki maa banna chahti ho?" meine pucha.

"Haan Raj sahi me aur agar kuch hua bhi to mein keh doongi ki baccha

mere pati ka hai." Mona ne meri chaati par hath phirate hue kaha.

Isi tarah baatein karte karte kab neend aa gayi hame pata bhi nahi

chala. Subah jab suraj ki garmi se badan jalne laga tabhi meri aankh

khuli. Subah pehli baar meine Mona ke nange badan ko din ke ujaale me

dekha. Uska gora badan suraj ki roshni me chamak raha tha. Uske khule

baal uski chuchiyon ko dhake hue the. Gulabi hothon par ek pyaari

muskan naach rahi thi jaise ki neend me koi pyaara sapna dekh rahi

ho.

Mein bekhayali me jab Mona ke nange badan ko nihar raha tha tabhi

Anita maami aur Kangan maami aa gayi. Hum dono ko nanga dekh dono fir

hame chidhane aur hansne lagi. Dono ne snan kar liya tha aur unke

geele balon se abhi bhi pani ki boonde tapak rahi thi. Dono mujhe

dekh

muskurai phir Mona maami ko uthane lagi.

"Sone do na kyon tang karte ho." kehkar Mona ne apne dono hath utha

kar ek angdai lee to usku choot thoda upar ko uth gayi. Meine dekha

ki

uski jhantein mere aur uske ras se chipchipa rahi thi.

Jab usne aankh kholi aur ehsas hua ki wo nangi hai to usne jhat se

paas hi padi apni saree utha apne badan par daal li.

"Are kyon chupa rahi hai apne is nasheele badan ko, haan utho aur

neeche aa kar naha dhokar naashta kar lo." Itna kehkar Anita maami ne

uski saree khinch lee aur hamare sare kapde lekar neeche chali gayi.

"Sari raat to nange rahe ho ab kya jaroorat pad gayi kapde pehnne ki,

aise nange hi ghoomna hai ghar me." kehkar Kangan maami bhi chali

gayi.

Mein aur Mona nange hi neeche aa gaye. Jaise hi andar aaye Mona ne

kaha, "Raj kyon na hum dono sath sath snan karen."

Iske pehle ki mein kuch kehta Mona mujhe khinch kar apne sath

bathroom

me le aayi.

Hum dono pehle se hi nange the isliye uttarne ke liye kuch tha nahi.

Mona sirf apne gale me pehne mangal sutra ko uttar kar side me rakh

diya. Phir wo mere sharir par paani dalne lagi aur saboon malne lagi.

Uski chudiyon ki khankar se mera lund ek bar phir tannkar khada ho

gaya.

"Mona kabhi kisi ka lund choosa hai?" meine pucha.

"Ek bar tumhare maamji ne koshish ki thi par mujhe accha nahi laga."

Mona ne kaha.

Mien Mona ko apne samne neeche bitha diya, "are bahot maza aayega aao

mein tumhe sikhata hun." kehkar mein apne khade lund ko uske hothon

par ghisne laga.

"Apni jeeb ko pehle mere supade par firao aur ise chato." meine kaha.

Mona ne ani jeebh bahar nikali aur supade par ghoomane lagi.

"haan ab ise apni muhthi me pakdo aur apni juban ko uapr se neeche

tak

lekjar chato phir neeche se upar tak."

Mien jaisa keh raha tha Mona waise hi karti jaa rahi thi.

"Ab apna munh kholo aur pehle sirf supade ko munh me lkear chulbulao,

sath hi ispar apni jeebh phirati rehna."

Mona ne mere lund ke supade ko apne munh me liya aur choosne lagi.

Meine apna hath neeche kar uski chuchiyon ko bheenche laga.

"Ab apne gale ko thoda khola aur jitan lund andar le sakti ho lo aur

phir bahar nikalo sir supade tak phir use andar lo jaise ki tumhara

munh na hokar tumhari choot ho aur mera lund usme andar bahar ho raha

hai." meine uski chuchiyon ko masalte hue kaha.

Mona ab mere batai tareeke se mera lund choosne lagi. Mujhe bhi mazaa

raha tha meine uske sir ko pakda aur uske munh me dhakke lagane laga.

Mona ne mere lund ko apne munh se nikal diya aur boli, "Raj mujhse ab

nahi raha jata mujhe chodo na please."

Meine use deewar ke sahare ghodi banaya aur peeche se uski choot me

apna lund pel diya. Mein jor jor se dhakke marne laga.

"OHHHH RAJ CHOOODO HAAAN JOR JOR SE CHOOODO OHHHH HAAAAN CHOOODO AUR

JOR SE." Mona sisakne lagi.

Mere lund kafi ubaal par tha, "OHHHH MONA DARLING MERA TO CHOOTNE

WALA HAI,"

"MEIN BHI KAGAR PAR HUN RAJ CHOOOD DO APNA PANI MERI CHOOT ME OHHHH

HAAAAN."

Meine do char dhakke lagaye aur hum dono sath sath khalas ho gaye.

Phir ek doosre ko khub acchi tarah saboon lagaya aur snan karke hum

bahar aa gaye.

Jab hum dono bahar aaye to table par naashta tayyar tha.

Jab hum thoda sambhal chuke to din ke 10.00 baj chuke the. Thodi

bhook bhi lag rahi thi. Teeno maamiyon milkar khana bnaha aur jab

hum sab khana kha chuke to sabhi hall me baith kar TV dekhne lage.

Haan mein ye to batana hi bhool hi gaya ki hum charon abhi puri

tarah nange hi the.

"Didi kyon na ab Simran ko bhi shaamil kar liya jaye." Kangan maami

ne kaha.

"Kangan tum to jaanti ho uska swabhav kitna teda hai, wo itni jaldi

hum sab me shaamil nahi hogi." Anita maami ne kaha.

"Are did aap use phone karke bulao to seedhe nahi manegi to saali ko

jabardasti chudwa denge hamare Raj se..... kyon Raj kya kehte ho?"

Kangan maami ne kaha.

"Wo to thik hai maami..... par agar baad me usne maaamji se keh diya

to.. kya hoga." meine apna dar batate hue kaha.

"Are itna darte kyon ho.... agar kuch hua to hum teeno baat ko

sambhal lenge." Kangan ne kaha.

Anita maami ne Simran maami ko phone lagaya.

"Simran, Anita bol rahi hun... aisa karo tum yahan Kangan ke makan

par aa jao." Anita maami ne kaha.

"Par didi meine abhi tak snan bhi nahi kiya hai." wahan se Simran ne

kaha.

"Are to yahan aakar kar lena." Anita maami ne kaha.

"Thik hai didi aati hun." kehkar Simran maami ne phone rakh diya.

Ab hum charon milkar Simran maami ko phansane ka programe banane

lage.

Plan is tarah bana ki mein bedromm me jakar palang par sone ka bahana

karunga. Kangan maami aur Mona maami ghar ke kaam kaaj me juti

rahengi. Aur jab Simran maami darwaje ki ghanti bajayegi to Rule ke

hisaab se Anita maami sirf peticoat pehne darwaza kholengi.

Agar Simran maami ne pucha ki wo aise kyon hai to pehle hi tay ke

tahat Anita maami kahengi ki wo abhi abhi snan kar ke nikli hai. Jab

Simran maami ghar me aa jayengi to teeno maamiyoan use pehle snanan

karne ki salah dengi. Kangan maami use apne kapde aur towel dengi.

Aur phir hamara sahi plan shuru hota hai, jaise hi Simran maami

nahane ke liye bathroom me ghusegi teeno maami uske sare kapde aur

towel batroom ke darwaze par se utha kar le jayengi. Is tarah jab

Simrn naha kar nikelegi to phenane ke liye wahan kuch bhi nahi hoga.

Use nangi hi bheege hue bedroom tak aana hoga. Tab hum use apne khel

me shaamil kar sakte hai.

Jab ek bar plan final ho gaya to Anita maami ne pehle jaakar apna

chehra dhoaya phir apne balon ko thoda geela kar liya jisse lage ki

abhi abhi naha kar nikali hai. Phir unhone halke neele rang ka

peticoat apni chuchi ke upar bandh liya. Peticoat itna chota tha ki

badi mushkil se unke chootdon ko dhak paa raha tha. Unki gori janghe

aur jangho ka androoni hissa saaf deekhai de raha tha.

Mein bedroom me aa gaya. Bedroom thik bathroom ke samne tha isliye

jab Simran maami nangi bathroom se bahar aayengi to mein pehla shaksh

hounga jo unhe us halat me dekh payega.

Tabhi darwaze par thap thapahat hui aur Anita mami darwaaza kholne

chali gayi. Tabhi Simran maami ki awaaz sunai padi,

"Didi.... aaap is halat me..... kahin aap pagal to nahi ho gayi hai

ki sirf peticoat pehan kar darwaza khol rahi ho."

"Are mein abhi abhi naha kar nikuli hoon aur tum ne darwaza khat

khata diya." Anita maami ne kaha.

"ohh.... accha ye bataye ki haamra Raj kahan hai aur kya kar raha

hai." Simran maami ne pucha.

"Wo so raha hai.... han tumne bataya tha ki tumne snan nahi kiya

hai... to jao pehle snan kar lo phir baatein karenge... mien tumhe

towel lakar deti hun." Kangan maami ne kaha.

"Thik hai mein pehle naha hi leti hoon," kehkar Simran maami bedroom

se hoti hui bathroom me gayi aur andar se darwaza band kar liya.

Sab kuch hamare plan ke mutabik ho raha tha. Tabhi Kangan maami ne

mujhe ankh marte hue ek saree, blouse peticoat aur towel bathroom ke

darwaze par rakh diye, "Simran meine kapde darwaze par rakh diye

hai."

"Thik hai didi." Simran ne kaha. Thodi der me darwaze par ek ke bad

ek unke kapde nazar aane lage. Simran maami ne apne sare kapde uttar

darwaze par rakh diye the. Yahan tak ki Simran ne apni bra aur panty

bhi uttar kar rakh di. Phir paani girne ki awaaze aane lagi.

Tabhi Kangan maami ne ek ek karke sare kapde darwaze par se khinch

liye yaahn tak ki towel bhi. Ab Simran maami ke paas pehnne ke liye

kuch bhi nahi tha. In sabhi baaton se anjaan Simran maami nahane me

lagi hui thi. Kangan maami bedroom me aayi aur muskrate hue sare

kapde mere bagal me rakh diye.

Kangan mami kapde rakh kar jaise hi jane lagi meine awaaz lagayi,

"Maami jara sunna."

"Kya baat hai Raj." Maami ne pucha.

"Kya sab kuch hamari soch ke anusar hi hoga." meiene Kangan mami se

pucha.

Kangan maami mere paas aayi aur mere hathon ko apne hathon me lekar

boli, "Raj kyon dar rahe ho, tumari hi iccha thi na ki tum Simran ko

chodo. Agar uske sath jabardasti bhi karni pade to karna hum teeno

tumhara sath denge." Usne mujhe bataya.

Itne me Anita maami aur Mona maami bhi kamre me aa gayi thi.

"Are Raj tum chinta mat karo, hum hain na saali jyada nakhre

deekhaigi to hum milkar uske hath pair bandh denge aur aankhon par

patti bhi bandh denge." Mona maami ne kaha.

Mujhe vishwaas nahi ho raha tha ki meri ye teen maamiya apni hi

devrani aur jethani ke sath aisa karne ke liye keh rahi hai. Wah re

choot ki aag jo insaan se kuch bhi karwa sakti hai.

Kareeb 10 minute ke baad Simran Maami ki awaz sunai padi, wahan kapde

na pakar wo hairan thi aur towel ke liye awaaz de rahi thi par kisi

ne bhi unki baat ka jawab nahi diya Wo thodi der wahin bathroom me

ruki phir wahi hua jo hamne socha tha.

Pehle to unhone dheere se bathroom ka darwaza khola aur idhar udhar

jhank ki kahin koi hai to nahi. Kisi ko bhi wahan ja pakar, din ke

ujaale me wo bathroom se nikali aur bedroom ke aur badhi. Bheega

badan, paani ki boonde unke sharir se tapak rahi thi. Ek hath se apni

chuchiyn ko dhake thi aur doosra hath apni choot par rakhe wo aa

raahi thi.

Bathroom se nikalkar lagbhag daudti hui wo angan se hoti hui bedroom

me aayi aur jaldi se darwaza band kar diya. Simran maami ko ye pata

nahi tha ki mein kamre me hun.

"Pata nahi kya ho raha hai is ghar me? Achanak pata nahi kaise mere

kapde gayab ho gaye darwaze par se?" wo badbada rahi thi.

Unke nange badan ko dekhte hue meine anjaan bante hue pucha. "kaise

kapde maami?"

Maami bilkul nangai mere samne khadi thi. Pani unke geele baalon se

hota hua chuchyion par se choot ke raaste neeche jameen par boond dar

boond gir raha tha. Khidki se aati garam hawa me unka badan kanp raha

tha.

Simran maami ka gora aur nanga badan dekh meri aankhe to fati ki fati

reh gayi. Maami bhi mujhe dekh chaunk padi thi. Mera lund tan kar

shorts mein khada ho chuka tha aur shayad maami ki nazar bhi mere

khade lund par pad chuki thi.

Maami to jaise pathar ho gayi thi. Unhone ek shabd bhi nahi kaha.

Mujhe hi kuch karna tha. Mien apne lund ko shorts ke upar se masalne

laga.

Mien palang se khada hua to mera lund aur tan kar khada ho gaya.

Maami ke munh se abhi bhi ek bhi shabd nahi nikala tha balki uski

nazrein mere lund par hi tiki thi, shayad unhe vishwas nahi ho raha

tha ki kal ka baacha aaj jawan ho gaya tha.

Mein apne lund ko masalte hue unke paas aya aur unke kandho se pakad

unhe hilaya. Agle pal maami ne mujhe joron se apni bahon me jakad

liya. Mera khada lund shorts ke upar se hi unki choot par thokar

marne laga.

Mujhe umeed nahi thi ki maami aisa bhi kar sakti thi. Wo kisi

premika ki tarah mujhe bahon me bandhe khadi thi. Unka bheega badan

mujhe apni bahon me kafi acha lag raha tha. Unki sanse tej ho chali

thi aur sanse ki bhaap ko mein apne kandhon par mehsus kar raha tha.

Jise hi meine apne hath unki geeli peeth par rakha wo sihar gayi aur

mujhse alag ho gayi.

"Kya hua maami?" meine pucha.

"Hey bhagwan ye mein kya karne jaa rahi thi,,,,,, nahi mein aisa nahi

kar sakti....oh bhagwan mujhe maaf kar dena...." Itna kehkar wo

darwaze ki aur badh gayi.

Meine unhe peeche se pakda aur apne paas khinch liya, "Maami ye aap

hi thi jisne shuruat ki thi..... ab is tarah mujhe chod kar nahi jaa

sakti."

"Nahi......... please mujhe jaane do ye sab paap hai......mein ye sab

nahi kar sakti." kehkar maami apna hath mere hathon se choodane ki

koshish karne lagi.

Par mere hathon ki pakad kafi majboot thi. Mine jor laga kar unhe

apni aur khincha. Mien Simran maami ko ab aise hi jane dene wala

nahi tha, chahe jo jaye. Unke nange badan ne mujhe pagal kar diya

tha, unki chuchiyan ko peene ko mere juban sukh rahi thi.

kramashah......................