मर्दों की दुनिया compleet

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raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:42

मर्दों की दुनिया पार्ट--7

अमित ने अपना दबाव बढ़ाया और मुझे ऐसा महसूस हुआ की उसका लंड

मेरी गंद की दीवारों को चीर रहा है.

"ऑश माआआ" में सिसक पड़ी.

"येयी गया," चिल्लाते हुए अमित ने एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा

लंड एक ही झटके मे मेरी गंद मे घुसा दिया.

"ओह मर गयी......." में दर्द के मारे ज़ोर से चिल्ला

उठी, "भगवान के लिए अमित क्या मुझे जान से मार डालने का इरादा

है."

"सॉरी सूमी मेरी जान," अमित ने माफी माँगते हुए कहा, "जोश जोश मे

मुझे ख़याल नही रहा, में भूल गया था कि सुमित का लंड भी

तुम्हारी चूत के अंदर घुसा हुआ है."

फिर दोनो अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे. थोड़ी देर मे मुझे

चूत और गंद दोनो छेदों मे मज़ा आने लगा.

"ऑश अमित जिसने भी वो कहानी लिखी थी सही मे जवाब नही.....

ऑश हाआअँ चोदो दोनो मुझे चूओड़ो हाा ज़ोर से ऑश."

मेरी जान वो कहानी राज शर्मा की है

मेरी सिसकियों को सुन दोनो मे जोश आ गया. सुमित नीचे से ज़ोर ज़ोर

से अपनी गंद उपर कर धक्के मारने लगा और अमित पीछे से ज़ोर के

धक्के मार रहा था.

"हाँ चोदो ऐसे ही चोदो, आअज तो तुम दोनो ने मुझे जन्नत का

मजा दे दिया... हां और ज़ोर से चोदो ऑश हाआँ और तेज श

मेरा तो छूटने वाला है और ज़ोर से.." जोरों से सिसकते हुए मेरी

चूत ने पानी छोड़ दिया.

दो तीन धक्के मार अमित ने अपना वीर्या मेर गंद मे छोड़ दिया और

सुमित ने अपना मेरी चूत मे

'सूमी क्या सही मे बहोत मज़ा आया," जब हमारी साँसे थोड़ी संभली

तो अनु ने पूछा.

"मुझे पता नही," मेने हंसते हुए कहा, "एक बारऔर इस तरह चुदवा

लूँ फिर ही बता सकती हूँ कि कैसा लगा."

"दीदी, लगता है सूमी दीदी को बहोत मज़ा आया है." मोना बोली.

"हाँ मुझे भी ऐसा ही लग रहा है," अनु ने कहा, "नही सूमी अब

मेरी बारी है और में दो लंड से चुदवाउन्गि."

"सॉरी अनु आज नही हम दोनो ये फ़ैसला किया है कि दोहरी चुदाई दिन

में एक बार ही करेंगे." सुमित ने कहा.

"अब ये तो कोई बात नही हुई.... हम क्या करेंगे?" अनु ने शिकायत

करते हुए कहा.

"हमने तो तुम्हे मौका दिया था लेकिन तुमने फ़ायदा नही उठाया इसमे

हमारी क्या ग़लती है? अब तो तुम्हे कल तक के लिए रूकना पड़ेगा."

अमित ने कहा.

अब हम इसी तरह मस्ती करते हुए दिन गुज़र रहे थे. हफ्ते के आख़िर

हम सब घर पर रह कर आराम करते और साथ ही मज़ा करते. अक्सर

घर मे रहते हुए हम कपड़े नही पहनते थे. ऐसे ही एक रविवार की

शाम हम सब हाथ मे बियर का ग्लास लिए बैठे थे. दोनो

नौकरानिया भी हमारी तरह नंगी ही थी और उन्होने कोक की बॉटल

हाथ मे ले रखी थी.

मेने देखा कि अमित रीमा को देखते हुए अपने लंड को मसल रहा था.

अचानक रीमा नीचे झुक कर ग्लाब की पंखुड़ियों को उठाने लगी जो

नीचे गिर गयी थी.

रीमा की फूली गंद देख कर अमित उछल पड़ा और उसे पीछे से

पकड़ लिया, "अभी तो में इसकी गंद मारूँगा."

अचानक ना जाने रीमा को क्या हुआ उसने अमित को धक्का देते हुए अपने

से दूर कर दिया लौर चिल्लाई, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे

छूने की?"

अमित और हम चारों रीमा का ये व्यवहार देख कर हैरान रह गये

थे, की आज इसे क्या हो गया. हमने उसकी तरफ देखा तो वो थोड़ा दूर

खड़ी मुस्कुरा रही थी.

"भाई ये नाटक कर रही है," सुमित ने कहा, "मुझे लगता है कि तुम

इसे मनाओ."

अमित ने अपनी गर्दन हिलाई और रीमा को अपनी बाहों मे भर

लिया, "डार्लिंग क्यों नखरे दीखा रही हो? चलो मज़ा करते है."

"तुम्हे शरम नही आती इस तरह पराई औरतों को छेड़ते हुए?" रीमा

ने अपने आप को अमित से छुड़ाया और अपने कूल्हे मतकती हुई उससे दूर

चली गयी.

"अमित मुझे लगता है कि ये चाहती है की तुम इसके साथ ज़बरदस्ती

करो." सुमित ने हंसते हुए कहा.

"फिर तो आज इसकी इच्छा पूरी होकर रहेगी." अमित रीमा की ओर बढ़ते

हुए बोला.

रीमा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और वो जोरों से चिल्लती हुई

कमरे मे भागने लगी, "अरे कोई इस बदमाश से मुझे बचाओ.. कोई तो

मेरी मदद करो.... ये बदमाश मुझे चोदना चाहता है... प्लीज़ कोई

तो मदद कर दो..."

फिर पकड़ा पकड़ी का खेल शुरू हो गया. आख़िर दस मिनिट तक इधर

से उधर भागने के बाद रीमा अमित के हाथ लग ही गयी.

अमित ने जोरों से उसे बाहों मे भींचा और उसकी चुचियों को रगड़ते

हुए बोला, "देख हरमज़ड़ी अब में तुझे कैसे चोदता हूँ, अगर आज

चोद चोद के तेरी चूत और गंद ना फाड़ दी तो कहना, साली कई

दिन तो ठीक से चल भी नही पाएगी."

रीमा किसी जल मे फाँसी मछली की तरह फड़फदाई और जोरों से

चिल्लाने लगी, 'छोड़ दे मुझे बदमाश , अगर चोदना ही तो जा कर

अपन मा बेहन को चोद जाकर."

थोड़ी देर मे हमे लगा कि जिसे हम मज़ाक समझ रहे थे वो मज़ाक

नही था, रीमा सही मे अपने आपको अमित से छुड़ाने की कोशिश कर

रही थी.

और अमित का तो हाल बुरा था, उत्तेजना और जोश मे उसका चेहरा और

लंड दोनो लाल हो चुके थे. लंड था कि और तनता ही जा रहा था.

काफ़ी छीना झपटी के बाद अमित रीमा को ज़मीन पर लीटाने मे सफल

हो गया. लेकिन वो जितना रीमा के उपर आकर उसकी टाँगो को फैलाने की

कोशिश करता रीमा किसी ना क्सि तरह उसे अपने उपर से हटा देती.

लेकिन विरोध करते करते रीमा थक गयी और उसके हाथ पाँव ढीले

पड़ने लगे. आख़िर अमित उसकी टाँगो को फैलाने मे कामयाब हो गया.

उसने उसकी चुचियों को पकड़ा और एक ही धक्के मे अपना लंड उसकी

चूत मे गुसा दिया.

"ऑश मार गयी..... मुझे जाने दे बादमाअश" रीमा जोरों से दर्द के

मारे कराह उठी.

लेकिन अमित ने उसकी करहों पर कोई ध्यान नही दिया और ज़ोर ज़ोर से

उसकी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करता रहा. रीमा गिड़गिदने लगी

की वो उसे छोड़ दे.

अमित था की वो उसकी टाँगो को और फैला ज़ोर ज़ोर के धक्के मार रहा

था, "ले रांड़ ले मेरे लंड को, क्या कहा था तूने की में अपनी मा

बेहन को चोदु देख अब में तेरी चूत की क्या हालत करता हूँ ले

रंडी मेरे लंड को."

थोड़ी ही देर मे रीमा की हाथ पाँव ढीले पड़ गये और उसकी कमर

अमित का साथ देने लगी. में समाझगाई की उसकी चूत पानी छोड़ने

वाली है. दो तीन धक्कों मे ही वो ज़ोर की सिसकारी भरते ही झाड़

गयी. अमित भी ज़ोर के धक्के मार झाड़ गया.

अमित के झाड़ते ही रीमा ने उसके चेहरे को हाथो मे ले लिया, थॅंक

यू सर, मज़ा आ गया," कहकर वो उसे बेतहाशा चूमने लगी.

"रीमा ये सब क्या था," अनु ने उससे पूहा.

"वो दीदी क्या है ना में हमेशा सोचा करती थी कि कोई मेरे साथ

ज़बरदस्ती करे और बलात्कार के वक़्त कैसा महसूस होता है में ये

जानना चाहती थी, और आज मुझे पता चल गया कि कभी कभी

ज़बरदस्ती मे भी मज़ा आता है." रीमा ने जवाब दिया.

"ऐसा था तो तूने हमे पहले क्यों नही बताया?" मेने पूछा.

"दीदी अगर बता देती तो शायद हक़ीकत वाला मज़ा ना आता." रीमा ने

कहा.

"ये शायद सही कह रही है." मोना ने कहा, "लेकिन रीमा जब अमित

सर ने अपना लंड तेरी चूत मे घुसाया तो तू चीख क्यों पड़ी."

"वो क्या है ना, जब भी कुँवारी चूत मे लॉडा घुसता है तो लड़की

चीख ही पड़ती है ना." रीमा ह्नस्ते हुए बोली.

रीमा ने इस भोले पन से मुँह बनाते हुए कहा था कि हम सभी

हँसने लगे.

"मोना क्या तुम भी चाहोगी रीमा की तरह अपना बलात्कार करवाना? सुमित

ने पूछा.

"नही सर, ये रीमा को ही मुबारक हो." मोना ने जवाब दिया, "हां

अगर आप मुझे चोदना चाहते है तो चोद सकते है."

"वो तो हमेशा में तुम्हे चोदना चाहता हूँ," सुमित उसे बाहों मे

भरते हुए बोला.

"सुमित एक मिनिट रूको," अनु ने कहा, "मोना तुम्हारा कोई सपना या फिर

ऐसा कोई ख्याल जो तुम पूरा करना चाहती हो?"

"हाँ एक सपना है, में बचपन से ही एक सपना देखती आई हू मोना ने

कहा, " कि मुझे दुल्हन की तरह सजाया जाए, मेरी शादी हो रही

है और में अपनी कुँवारी चूत अपने पति से चुदवा रही हूँ, लेकिन

शायद ये सब अब एक सपना ही रह जाएगा."

"नही ये सपना नही रहेगा," मेने कहा, "अमित और सुमित तुम्हारा

कुँवारा पन तो नही लौटा सकते लेकिन हां आज तुम्हारा बाकी का

सपना ज़रूर पूरा होगा."

शाम को हम मोना को एक ब्यूटी पार्लर मे ले गये जो कि दुल्हन के

मेक उप के लिए फाओमौस था. रीमा को हमने ठीक किसी दुल्हन की तरह

सज़ा कर तय्यार कर दिया. नया दुल्हन का जोड़ा, गहने सभी कुछ

हमने उसे पहना दिया. हम बाकी भी ऐसे तय्यार हो गयी जैसे की किसी

शादी मे जा रही हों.

रात के ठीक डूस बजे हम मोना को हमारे पति की पास ले गयी. सुमित

शेरवानी पहन कर ठीक किसी दूल्हे की तरह लग रहा था और अमित ने

शानदार सूट पहना हुआ था.

"कहिए हमारी दुल्हन कैसी लग रही है?" अनु ने मोना का घूँघट

थोड़ा उपर करते हुए पूछा.

"हे भगवान ऐसा लग रहा है जैसे की आसमान से कोई अप्सरा उत्तर

कर आ गयी हो," अपनी साँसे संभाले अमित मोना के पास आया. "मोना

तुम तो बहोत ही सुंदर लग रही हो."

"भाई अपने आप को संभलो." सुमित हंसते हुए बोला, ये मेरी दुल्हन

है, इसे हाथ भी मत लगाना."

फिर मेने और अनु ने मिलकर मोना की शादी सुमित के साथ नकली रूप

मे करा दी. फिर विदाई भी हुई और मोना इस कदर फूट फूट कर

रोई जैसे की सही मे उसकी बिदाई हो रही हो.

फिर हम मोना को उसके सुहागरात के कमरे मे ले गये जिसे हमने फूलों

और गुब्बारों से अछी तरह सजाया था और उसे पलंग पर बिठा दिए

जिसपर गुलाब की पंदखुड़िया बिछी हुई थी.

"सुमित अब तुम जा सकते हो? अनु ने कहा, "तुम्हारी दुल्हन तुम्हारा

इंतेज़ार कर रही है."

जैसे ही सुमित ने कमरे मे घुस कर दरवाज़ा बंद करने की कोशिश की

मेने चिल्ला पड़ी, "रुक जाओ, हम भी आ रहे है."

सुमित चौंक कर बोला, "तो क्या तुम हमारी सुहागरात देखना चाहती

हो?"

"और नही तो क्या? अनु ने जवाब दिया, "तुम्हे कोई ऐतराज़ है क्या?

"मुझे तो कोई ऐतराज़ नही है, लेकिन बेहतर होगा कि आप लोग आज रात

की दुल्हन से पूछ लें." सुमित ने कहा

"मोना प्लीज़ क्या हम देख सकते है?" मेने उससे आग्रह करते हुए

कहा, हम तो सिर्फ़ ये देखना चाहते है कि सुहागरात की रात ये तुमसे

ठीक से बर्ताव करता है कि नही और कहीं ये तुम्हारी गंद ना मार

दे."

"लड़किया तुम सब पागल हो गयी हो." अमित ने हमे बीच मे टोकते हुए

कहा, "सुहागरात को लोगों की आपस की और पर्सनल रात होती है,

में तो कहूँगा कि तुम सब इन्हे अकेला छोड़ दो.."

"थॅंक यू सर," मोना ने धीरे से कहा.

हमे अक्चा तो नही लगा लेकिन अमित का तर्क भी सही था, इसलिए हम

सब वहाँ से बाहर आ गये.

दूसरी सुबह हमने अमित से पूछा, "तो रात कैसी गुज़री?"

"ऑश में बता नही सकता, मोना वाकई मे लाजवाब है, नई नवेली

दुल्हन की तरह शरमाती रही. जब मेने उसके कपड़े उतारने चाहे तो

शर्मा कर सिमट गयी. जब उसकी चूत मे लंड घुसना चाहा तो ऐसे

शरमाई जैसे की पहली बार लंड ले रही है. जब लंड घुसा तो दर्द

से चिल्लई नही सिर्फ़ धीरे से फुसफुसा, "धीरे कीजिए ना दर्द हो

रहा है," सच में एक यादगार रात थी." अमित ने हमे बताया.

"और तुम क्या कहना चाहती हो मोना?" अनु ने पूछा.

"दीदी अब में अपनी नकली सुहागरात के बारे मे क्या कहूँ, आप तो सब

पहले से ही जानती है, आप तो सुहागरात मना भी चुकी हो." उसने

धीरे से कहा.

"शुक्रा है भगवान का इसे हक़ीकत का पता नही," मेने मन ही मन

कहा.

"फिर भी बताओ तुम्हे कैसा लगा?" अनु ने पूछा.

"श दीदी सही मे जन्नत का मज़ा आ गया, सुमित सर एक दम दूल्हे की

तरह मुझसे पेश आए. इतने प्यार से और अप्नत्व से इन्होने सब

किया," मोना ने बताया, "काश जिस दिन इन्होने पहली बार हमारी

कुँवारी चूत फाडी थी ऐसा ही प्यार और अप्नत्व दीखया होता."

"सॉरी मोना डार्लिंग," सुमित ने माफी माँगते हुए कहा, "तुम्हे तो पता

था कि उस दिन हालत और महॉल कैसा था."

"मुझे पता है, इसलिए कोई शिकायत नही है," मोना ने जवाब

दिया, "हां और इस बात की खुशी मुझे जिंदगी भर रहेगी कि नकली

ही सही मेने भी सुहागरात मनाई है."

मैं कुछ ज़्यादा ही एमोशनल हो रही थी इसलिए बात को बदलने के

लिए मेने मोना से फिर पूछा, "कहीं इन्होने तेरी गांद तो नही

मारी?

"ये तो मारना चाहते थे लेकिन मेने मना कर दिया." मोना ने हंसते

हुए कहा.

"कल नही मारी तो क्या हुआ, अब तो मार सकता हूँ," सुमित ने उसे बाहों

मे भरते हुए कहा.

"मना किसने किया है, स्वागत है आपका." मोना वहीं कुर्सी के सहारे

घोड़ी बनती हुई बोली.

"भैया इसकी गांद शाम तक का इंतेज़ार कर सकती है लेकिन ऑफीस

मे आने वाले हमारे ग्राहक हमारा इंतेज़ार नही करेंगे." अमित ने

कहा. "हमे तुरंत ऑफीस के लिए रवाना हो जाना चाहिए नही तो

लेट हो जाएँगे."

इसी तरह मस्ती और मज़े करते हुए समय गुज़रता गया. करीब तीन

महीने बाद मुझे सीमा दीदी का फोन आया ये बताने के लिए कि वो

दोनो शर्तें पूरी करने को तय्यार है.

"दीदी क्या कुँवारी चूत का इंतेज़ाम हो गया?" मेने पूछा.

"हां हो गया है." माला दीदी ने जवाब दिया.

"कौन हैं वो?" अनु ने पूछा.

"वो सब हम फोन पर नही बता सकते," सीमा दीदी ने हंसते हुए

अखा, "पर तुम्हारी जल्दी ही उनसे मुलाकात होगी."

उस दिन शाम को हमने ये खुश खबरी हमारे पतियों को सुनाई.

"वाउ क्या बात है, अब जल्दी से बताओ कि कब और कहाँ हमे मिलना

होगा उनसे?" अमित ने पूछा.

'आइ कान'ट टेल यू ऑन दा फोन,' मधु दीदी ने कहा, 'बट यू विल

मीट देम सून एनफ.' दट ईव्निंग, वी गेव दा गुड न्यूज़ टू अवर

हज़्बेंड्स.

'ग्रेट, वेन आंड वेर?' अमित इंक्वाइयर्ड.

"जीजू ने शिमला मे एक बुंगलोव किराए पर लिया है. वो चाहते है कि

हम इस महीने की 30 तारीख को वहाँ पहुँच जाएँ." मैने उन्हे बताया.

"शिमला ही क्यो, वो यहाँ भी आ सकते थे या फिर हमे अपने यहाँ

बुला लेते." सुमित ने कहा.

"मेने पूछा नही." मेने जवाब दिया, "होगा कोई कारण या फिर उनकी

मजबूरी, तुम कहो तो में उनसे पूछ सकती हूँ."

"नही इसकी कोई ज़रूरत नही है, बस उन्हे हमारा धन्यवाद देना और

कहना कि हम ठीक दिन पहुँच जाएँगे." अमित ने कहा

दो हफ्ते बाद जब हम हमारा शिमला जाने के प्रोग्राम की तय्यरी कर

रहे थे, अमित ने कहा, "देखो हमे ऑफीस का कोई ज़रूरी काम आ

गया और हम तुम दोनो के साथ नही जा पाएँगे, लेकिन हां हम ठीक

30 को वहाँ पहुँच जाएँगे सो तुम दोनो पहले चले जाओ और अपने

साथ मोना और रीमा को भी ले जाओ."

"तुम्हे लगता है कि इन्हे हमारे साथ ले जाना ठीक रहेगा." अनु ने

कहा, "वहाँ तुम हमारी बहनो की चुदाई भी करने वाले हो."

"इसमे क्या हर्ज़ है, कभी ना कभी तो इन दोनो को सब कुछ मालूम

पड़ने ही वाला है, तो क्यँ ना आज ही पड़ जाए." सुमित ने कहा, "और

याद है ना कि तुम्हारे प्यारे जीजू और जीजाजी हमे तोहफे मे कुँवारी

चूत देने वाले है तो हम भी इन दोनो को रिटर्न गिफ्ट मे उन्हे दे

देंगे."

"क्या मोना और रीमा को बुरा नही लगेगा कि तुमने अपने ही अंजान

रिश्तेदारों के हाथ मे उन्हे सोंपने दिया चुदवाने के लिए." मेने

अपनी चिंता जताई.

"अरे कुछ बुरा नही लगेगा, बल्कि वो दोनो तो खुश हो जाएँगी की

उन्हे दो नये लंड मिल गये चुद्वने के लिए, लेकिन तुमने फिर भी

अपनी चिंता जताई है इसलिए बेहतर होगा कि हम उसने पहले ही पूछ

लें" अमित ने कहा और उन्हे आवाज़ लगाई.

जब वो दोनो कमरे मे आई तो सुमित ने उन्हे सब कुछ विस्तार से समझा

दिया कि वो क्या और क्यों करना चाहते है.

"हम ये जानना चाहते है कि क्या तुम दोनो तय्यार हो?" अमित ने उन दोनो

से पूछा.

पहले तो दोनो ने शरम के मारे नज़रें झुका ली. "हम वही करेंगी

जो हमे दीदी कहेंगी," वो दोनो धीरे से बदबूदाई. लेकिन उनकी

आँखों की चमक ने बता दिया कि वो दोनो बहोत खुश थी.

"तुम दोनो बहोत शैतान हो?" मेने कहा, "तुम दोनो सब कुछ मुझे

पर ही क्यों डाल देती हो. मैं जानती हूँ कि दोनो नये लंड से

चुदवाने के ख़याल ने ही तुम्हारी चूत को गील कर दिया है, लाओ

में देखती हूँ कि तुम्हारी चूत गीली हुई है कि नही."

"नही दीदी नही....." कहकर वो दोनो वापस किचन मे भाग गयी.

"हम सब सफ़र कैसे करेंगे? क्या ट्रेन से." अनु ने पूछा.

"ट्रेन से सफ़र करने की कोई ज़रूरत नही है." सुमित ने

कहा, "ड्राइवर तुम सभी को क्वायलिस मे ले जाएगा और वहाँ छोड़ कर

वापस आ जाएगा. फिर हम उसके साथ तुम्हारे पास पहुँच जाएँगे."

"जिस सुबह हमे रवाना होना था सुमित ने हमसे कहा, "देवियों जब

तक हम ना कहे तुम दोनो अपने जीजू और जीजाजी से नही चुद्वओगि.'

"बिल्कुल नही में वादा करती हूँ." मैने कहा.

"में भी वादा करती हूँ." अनु ने पाने सिर पर हाथ रख कर कहा.

"और हां इन लंड की भूकियों पर भी नज़र रखना." अमित ने अखा.

"इसकी तुम चिंता मत करो, हम ध्यान रखेंगे." अनु ने कहा..

हम शाम को 6.00 बजे उस बुंगलोव पर पहुँच गये जो जीजाजी ने

किराए पर लिया था. बुंगलोव सहर से करीब एक घंटे के रास्ते पर

था.

एक दूसरे से मिलने के बाद हमारी बहने हमे बुंगलोव दीखाने लगी.

"ये हमारा बेडरूम है." मेने देखा कि उसमे चार पलंग थे.

"तो अब आप खुले आम सब कोई साथ साथ सोते हो?" मैने हंसते हुए

कहा.

"नही ऐसी कोई बात नही है," माला दीदी ने जवाब दिया, "असल मे इन

बंग्लॉ मे तीन ही बेडरूम है. और हर बेडरूम मे चार चार पलंग

है, तुम चारों को भी एक ही कमरे मे रहना होगा क्यों कि तीसरा

कमरा नौकरानियों का होगा."

"ओह दीदी हमे कोई प्राब्लम नही है" अनु ने मुस्कुराते हुए कहा.

"ओह... तो तुम लोग भी....." सीमा दीदी ने कहा, "कब से चल रहा

है ये सब?"

"दीदी यही कोई कुछ महीनो से." मेने जवाब दिया.

"चलो पहले कुछ चाइ नाश्ता कर लेते है फिर बात करते है."

माला दीदी ने कहा.

"तुम दोनो खुश तो हो ना?" सीमा दीदी ने कहा.

"हां दीदी," मेने कहा और फिर उन्हे सब कुछ विस्तार से बता दिया.

"तो ये मोना और रीमा है." दीदी ने पूछा.

"हां दीदी." अनु ने जवाब दिया

"तुम्हे इन्हे अपने साथ नही लाना चाहिए था, मुझे तो लगता है कि

तुम दोनो की तकलीफ़ की जड़ ये दोनो ही है." सीमा दीदी ने कहा.

"नही दीदी इसमे इनकी कोई ग़लती नही है, शायद ये तो होना ही था."

मेने जवाब दिया.

"बहुत सुंदर और प्यारी है दोनो." जीजू ने कहा.

"और चोदने मे भी मज़े दार होंगी में दावे से कह सकता हूँ."

जीजाजी ने कहा. "तुम क्या कहते हो अजय?"

"हां इनकी चूत मे लॉडा घुसाने मे मज़ा कुछ ख़ास ही आएगा."

"बहुत मज़ा आएगा." अनु हंसते हुए बोली, "हमारे पति देव ने इन्हे

ख़ास आप लोगों के लिए ही भेजा है. उन्होने कहा कि जब हमारे

आदर्निय जीजाजी लोग हमारे लिए कुँवारी चूत का इंतेआज़म कर

सकते है तो हम कम से कम उन्हे नई चूत तो तोहफे मे दे ही सकते

है."

"वो तो ठीक है, पर क्या ये दोनो तय्यार है?" जीजू ने पूछा.

"हां ये पूरा सहयोग देंगी, लंबा और मोटा लंड इन्हे पसंद है,"

मेने हंसते हुए कहा, "लेकिन आप दोनो को हमारे पति देव के आने का

इंतेज़ार करना होगा."

"बस हमारे बारे मे बहोट हो गया," मैने कहा, "दीदी वो दोनो

कुँवारियाँ कहाँ है?"


raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:44

mardon ki duniya paart--7

Amit ne apna dabav badhaya aur mujhe aisa mehsus hua ki uska lund

meri gand ki deewaron ko cheer raha hai.

"OHHH MAAAAAA" Mein sisak padi.

"Yeeee gaya," chillate hue Amit ne ek jor ka dhakka mara aur pura

lund ek hi jhatke me meri gand me ghusa diya.

"OHHHHHHH MAR GAYI......." Mein dard ke mare jor se chilla

uthi, "BHAGWAN KE LIYE AMIT KYA MUJHE JAN SE MAR DALNE KA IRAADA

HAI."

"Sorry Sumi meri jaan," Amit ne maafi mangte hue kaha, "Josh josh me

mujhe khayal nahi raha, meine bhool gaya tha ki Sumit ka lund bhi

tumhari choot ke andar ghusa hua hai."

Phir dono apne lund ko andar bahar karne lage. Thodi der me mujhe

choot aur gand dono chedon me mazaa ane laga.

"OHHH AMIT JISNE BHI WO KAHANI LIKHI THI SAHI ME JAWAB NAHI.....

OHHHH HAAAAAN CHODO DONO MUJHE CHOOODO HAAAA JOR SE OHHHH."

Meri siskiyon ko sun dono me josh aa gaya. Sumit neeche se jor jor

se apni gand upar kar dhakke marne laga aur Amit peeche se jor ke

dhakke mar raha tha.

"HAAAAN CHOOODO AISE HI CHOODO, AAAJ TO TUM DONO NE MUJHE JAANAT KA

MAAZAA DE DIYA... HAAN AUR JOR SE CHOOODO OHHH HAAAN AUR TEJ OHH

MERA TO CHOOTNE WALA HAIII AUR JOR SE.." Joron se sisakte hue meri

choot ne pani chod diya.

Do teen dhakke mar Amit ne apna virya mer gand me chod diya aur

Sumit ne apna meri choot me

'Sumi kya sahi me bahot mazaa aya," Jab hamari sanse thodi sambhli

to Anu ne pucha.

"Mujhe pata nahi," meine hanste hue kaha, "Ek bar is tarah chudwa

lun fir hi bata sakti hun ki kaisa laga."

"Didi, lagta hai Sumi didi ko bahot mazaa aya hai." Mona boli.

"Haan mujhe bhi aisa hi lag raha hai," Anu ne kaha, "Nahi sumi ab

meri bari hai aur mein do lund se chudwaungi."

"Sorry Anu aaj nahi hum dono ye faisla kiya hai ki dohri chudai din

mein ek bar hi karenge." Sumit ne kaha.

"Ab ye to koi baat nahi hui.... hum kya karenge?" Anu ne shikayat

karte hue kaha.

"Hamne to tumhe mauka diya tha lekin tumne faida nahi uthaya isme

hamari kya galti hai? ab to tumhe kal tak ke liye rookna padega."

Amit ne kaha.

Ab hum isi tarah masti karte hue din guzar rahe the. Hafte ke aakhir

hum sab ghar par reh kar araam karte aur sath hi mazaa karte. Aksar

ghar me rehte hue hum kapde nahi pehante the. Aise hi ek ravivar ki

shaam hum sab hath me beer ka glaas liye baithe the. Dono

naukaraniya bhi hamari tarah nangi hi thi aur unhone coke ki bottle

hath me le rakhi thi.

Meine dekha ki Amit Reema ko dekthe hue apne lund ko masal raha tha.

Achanak Reema neeche jhuk kar glab ki pankhudiyon ko uthane lagi jo

neeche gir gayi thi.

Reema ki phooli gand dekh kar Amit uchal pada aur use peeche se

pakad liya, "Abhi to mein iski gand maroonga."

Achanak na jane Reema ko kya hua usne Amit ko dhakka dete hue apne

se door kar diya laur chillayi, "tumhari himmat kaise hui mujhe

choone ki?"

Amit aur hum charon Reema ka ye vyavhar dekh kar hairan reh gaye

the, ki aaj ise kya ho gaya. Hamne uski taraf dekha to wo thoda door

khadi muskura rahi thi.

"Bhai ye natak kar rahi hai," Sumit ne kaha, "mujhe lagta hai ki tum

ise manavo."

Amit ne apni gardan hilaya aur Reema ko apni bahon me bhar

liya, "Darling kyon nakhre deekha rahi ho? chalo mazaa karte hai."

"Tumhe sharam nahi aati is tarah parayi aurton ko chedte hue?" Reema

ne apne aap ko Amit se chudaya aur apne kulhe matkati hui usse door

chali gayi.

"Amit mujhe lagta hai ki ye chahti hai ki tum iske sath jabardasti

karo." Sumit ne hanste hue kaha.

"Fir to aaj iski iccha puri hokar rahegi." Amit Reema ki aur badhte

hue bola.

Reema ke chehre par muskurahat aa gayi aur wo joron se chillati hui

kamre me bhaagne lagi, "ARE KOI IS BADMASH SE MUJHE BACHAO.. KOI TO

MERI MADAD KARO.... YE BADMASH MUJHE CHODNA CHAHTA HAI... PLEASE KOI

TO MADAD KAR DO..."

Phir pakda pakdi ka khel shuru ho gaya. Aakhir dus minute tak idhar

se udhar bhaagne ke bad Reema Amit ke hath lag hi gayi.

Amit ne joron se use bahon me bheencha aur uski chuchiyon ko ragadte

hue bola, "DEKH HARAMZADI AB MEIN TUJHE KAISE CHODTA HUN, AGAR AAJ

CHOD CHOD KE TERI CHOOT AUR GAND NA PHAD DEE TO KEHANA, SAALI KAI

DIN TO THIK SE CHAL BHI NAHI PAYEGI."

Reema kisi jal me phansi machli ki tarah phadphadayi aur joron se

chillane lagi, 'CHOD DE MUJHE BADMAASH , AGAR CHODNA HI TO JAA KAR

APN MAA BEHAN KO CHOOD JAAKAR."

Thodi der me hame laga ki jise ham mazaak samajh rahe the wo mazaak

nahi tha, Reema sahi me apne aapko Amit se chudane ki koshish kar

rahi thi.

Aur Amit ka to haal bura tha, uttejna aur josh me uska chehra aur

lund dono laal ho chuke the. Lund tha ki aur tanta hi jaa raha tha.

Kafi china jhapti ke baad Amit Reema ko jameen par leetane me safal

ho gaya. Lekin wo jitna Reema ke upar aakar uski tango ko failane ki

koshish karta Reema kisi na ksi tarah use apne upar se hata deti.

Lekin virodh karte karte Reema thak gayi aur uske hath panv dheele

padne lage. Aakhir Amit uski tango ko faislane me kamyab ho gaya.

Usne uski chuchiyon ko pakda aur ek hi dhakke me apna lund uski

choot me gusa diya.

"OHHH MAR GAYI..... MUJHE JAANE DE BADMAAASH" Reema joron se dard ke

mare karah uthi.

Lekin Amit ne uski karahon par koi dhyaan nahi diya aur jor jor se

uski choot me apna lund andar bahar karta raha. Reema gidgidane lagi

ki wo use chod de.

Amit tha ki wo uski tango ko aur faila jor jor ke dhakke mar raha

tha, "LE RAND LE MERE LUND KO, KYA KAHA THA TUNE KI MEIN APNI MAA

BEHAN KO CHODUN DEKH AB MEIN TERI CHOOT KI KYA HALAT KARTA HUN LE

RANDI MERE LUND KO."

Thodi hi der me Reema ki hath panv dheele pad gaye aur uski kamar

Amit ka sath dene lagi. Mein samajhgayi ki uski choot pani chodne

wali hai. Do teen dhakkon me hi wo jor ki siskari bharte hi jhad

gayi. Amit bhi jor ke dhakke mar jhad gaya.

Amit ke jhadte hi Reema ne uske chehre ko hahton me le liya, Thank

you sir, mazaa aa gaya," kehkar wo use betahasha choomne lagi.

"Reema ye sab kya tha," Anu ne usse puha.

"Wo didi kya hai na mein hamesha socha karti thi ki koi mere sath

jabardasti kare aur balatkar ke waqt kaisa mehsus hota hai mein ye

janna chahti thi, aur aaj mujhe pata chal gaya ki kabhi kabhi

jabardasti me bhi mazaa aata hai." Reema ne jawab diya.

"Aisa tha to tune hame pehle kyon nahi bataya?" meine pucha.

"Didi agar bata deti to shayad haqikat wala mazaa na aata." Reema ne

kaha.

"Ye shayad sahi keh rahi hai." Mona ne kaha, "lekin Reema jab Amit

sir ne apna lund teri chot me ghusaya to tu cheekh kyon padi."

"Wo kya hai na, jab bhi kunwari choot me lauda ghusta hai to ladki

cheekh hi padti hai na." Reema hnaste hue boli.

Reema ne is bhole pan se munh banate hue kaha tha ki ham sabhi

hansne lage.

"Mona kya tum bhi chaogi Reema ki tarah apna balatkar karvana? Sumit

ne pucha.

"Nahi sir, ye Reema ko hi mubarak ho." Mona ne jawab diya, "haan

agar aap mujhe chodna chahte hai to chod sakte hai."

"Wo to hamesha mein tumhe chodna chahta hun," Sumit use bahon me

bharte hue bola.

"Sumit ek minute uko," Anu ne kaha, "Mona tumhara koi sapna ya phir

aisa koi khyaal jo tum pura karna chahti ho?"

"Haan ek sapna hai, mein bachpan se hi ek sapna dekhti aayi Mona ne

kaha, " ki mjjhe bulhan ki tarah sajaya jaye, meri shaadi ho rahi

hai aur mein apni kunwari choot apne pati se chudwa rahi hun, lekin

shayad ye sab ab ek sapna hi reh jayega."

"Nahi ye sapna nahi rahega," meine kaha, "Amit aur Sumit tumhara

kunwara pan to nahi lauta sakte lekin haan aaj tumhara baki ka

sapna jaroor pura hoga."

Shaam ko hum Mona ko ek beauty parlour me le gaye jo ki Dulhan ke

make up ke liye faomous tha. Raaj ko hamne thik kisi udlhan ki tarah

saja kar tayyar kar diya. Naya dulhan ka joda, gehne sabhi kuch

hamne use pehna diya. Hum baki bhi aise tayyar ho gayi jaise ki kisi

shaadi me jaa rahi hon.

Raat ke thik dus baje hum Mona ko hamare pati ki paas le gayi. Sumit

sherwani pehan kar thik kisi dulhe ki tarah lag raha tha aur Amit ne

shaandar suite pehna hua tha.

"Kahiye hamari dulhan kaisi lag rahi hai?" Anu ne Mona ka ghunghat

thoda upar karte hue pucha.

"Hey bhagwan aisa lag raha hai jaise ki aasman se koi apsara uttar

kar aa gayi ho," apni sanse sambhale Amit Mona ke paas aya. "Mona

tum to bahot hi sunder lag rahi ho."

"Bhsi apne aap ko sambhalo." Sumit hanste hue bola, Ye meri dulhan

hai, ise hath bhi mat lagana."

Phir meine aur Anu ne milkar Mona ki shaadi Sumit ke sath nakli roop

me kara dee. Phir vidai bhi hui aur Mona is kadar phoot phoot kar

royi jaise ki sahi me uski bidaai ho rahi ho.

Phir hum Mona ko uske suhagrat ke kamre me le gaye jise hamne phulon

aur gubbaron se achi tarah sajaya tha aur use palang par bitha diye

jispar gulab ki pandkhudiya beechi hui thi.

"Sumit ab tum jaa sakti ho? Anu ne kaha, "tumhari dulhan tumhara

intezar kar rahi hai."

Jaise hi Sumit ne kamre me ghus kar darwaza band karne ki koshish ki

meine chilla padi, "Ruk jao, hum bhi aa rahe hai."

Sumit chuank kar bola, "to kya tum hamari suhagraat dekhna chahti

ho?"

"Aur nahi to kya? Anu ne jawab diya, "tumhe koi aitaraaz hai kya?

"Mujhe to koi aitraaz nahi hai, leki behtar hoga ki aap log aaj raat

ki dulhan se puch len." Sumit ne kaha

"Mona please kya hum dekh sakte hai?" meine usse agrah karte hue

kaha, ham to sirf ye dekhna chahte hai ki suhagraat ki rat ye tumse

thik se bartav karta hai ki nahi aur kahin ye tumhari gand na mar

de."

"Ladkiya tum sab pagal ho gayi ho." Amit ne hame beech me tokte hue

kaha, "Suhagraat ko logon ki aapas ki aur personal raat hoti hai,

mein to kahunga ki tum sab inhe akeyla chod do.."

"Thank you sir," Mona ne dheere se kaha.

Hame accha to nahi laga lekin Amit ka tark bhi sahi tha, isliye ham

sab vahan se bahar aa gaye.

Doosri subah hamne Amit se pucha, "to raat kaisi guzri?"

"Ohhh mein bata nahi sakta, Mona wakai me lajawab hai, Nai naveli

dulhan ki tarah sharmati rahi. Jab meine uske kapde uttarne chahe to

sharma kar simat gayi. Jab uski choot me lund ghusana chaha to aise

sharmai jaise ki pehli bar lund le rahi hai. Jab lund ghusa to dard

se chillai nahi sirf dheere se fusfusai, "dheere kijiye na dard ho

raha hai," sach mein ek yaadgaar raat thi." Amit ne hame bataya.

"Aur tum kya kehna chahti ho Mona?" Anu ne pucha.

"Didi ab mein apni naklli suhagraat ke bare me kya kahun, aap to sab

pehle se hi jaanti hai, aap to suhagraat mana bhi cuki ho." Usne

dheere se kaha.

"Shukra hai bhagwan ka ise haqikat ka pata nahi," meine man hi man

kaha.

"Fir bhi batao tumhe kaisa laga?" Anu ne pucha.

"Ohh didi sahi me jannat ka maza aa gaya, Sumit sir ek dam dulhe ki

tarah mujhse pesh aaye. Itne pyaar se aur apnatva se inhone sab

kiya," Mona ne bataya, "kaash jis din inhone pehli bar hamari

kunwari choot phadi thi aisa hi pyaar aur apnatva deekhaya hota."

"Sorry Mona darling," Sumit ne mafi mangte hue kaha, "tumhe to pata

tha ki us din halat aur mahol kaisa tha."

"Mujhe pata hai, isliye koi shikayat nahi hai," Mona ne jawab

diya, "Haan aur is baat ki khushi mujhe jndagi bhar rahegi ki nakli

hi sahi meine bhi suhagraat manayi hai."

Mahon kuch jyada hi emotional ho raha tha isliye baat ko badalne ke

liye meine Mona se phir pucha, "kahin inhone teri gaand to nahi

mari?

"ye to marna chahte the lekin meine mana kar diya." Mona ne hanste

hue kaha.

"Kal nahi mari to kya hua, ab to mar sakta hun," Sumit ne use bahon

me bharte hue kaha.

"Mana kisne kiya hai, swagat hai aapka." Mona wahin kursi ke sahare

ghodi banti hui boli.

"Bhaiya iski gaand shaam tak ka intezar kar sakti hai lekin office

me aane wale hamare grahak hamara intezar nahi karenge." Amit ne

kaha. "hame turant office ke liye rawana ho jana chahiye nahi to

late ho jayenge."

Isi tarah masti aur maze karte hue samay guzarta gaya. Kareeb teen

mahine baad mujhe Seema didi ka phone aaya ye batane ke liye ki wo

dono shartein puri karne ko tayyar hai.

"Didi kya kunwari choot ka intezam ho gaya?" meine pucha.

"Haan ho gaya hai." Mala didi ne jawab diya.

"Kaun hain wo?" Anu ne pucha.

"Wo sab hum phone par nahi bata sakte," Seema didi ne hanste hue

akha, "par tumhari jaldi hi unse mulakat hogi."

Us din shaam ko hamne ye khush khabri hamare patiyon ko sunayi.

"Wow kya baat hai, ab jaldi se batao ki kab aur kahan hame milna

hoga unse?" Amit ne pucha.

'I can't tell you on the phone,' Madhu didi giggled, 'but you will

meet them soon enough.' That evening, we gave the good news to our

husbands.

'Great, when and where?' Amit inquired.

"Jiju ne shimla me ek bunglow kiraye par liya hai. Wo chahte hai ki

hum is mahine ki 30 k wahan pahunch jayen." meien unhe bataya.

"Shimla hi kyaon, wo yahan bhi aa sakte the ya phir hame apne yahan

bula lete." Sumit ne kaha.

"Meine pucha nahi." meine jawab diya, "hoga koi karan ya phir unki

majboori, tum kaho to mein unse puch sakti hun."

"Nahi iski koi jaroorat nahi hai, bas unhe hamara dhanyavad dena aur

kehna ki ham thik din pahunch jayenge." Amit ne kaha

Do hafte baad jab hum hamara shimla jane ke program ki tayyari kar

rahe the, Amit ne kaha, "Dekho hame office ka koi jaroori kaam aa

gaya aur hum tum dono ke sath nahi jaa payenge, lekin haan hum thik

30 ko wahan pahunch jayenge so tum dono pehle chale jao aur apne

sath Mona aur Reema ko bhi le jao."

"Tumhe lagta hai ki inhe hamare sath le jana thik rahega." Anu ne

kaha, "wahan tum hamari behno ki chudai bhi karne wale ho."

"Isme kya harz hai, kabhi na kabhi to in dono ko sab kuch maalum

padne hi wala hai, to kyan na aaj hi pad jaye." Sumit ne kaha, "aur

yaad hai na ki tumhare pyaare jiju aur jijaji hame tohfe me kunwari

choot dene wale hai to hum bhi in dono ko return gift me unhe de

denge."

"Kya Mona aur Reema ko bura nahi lagega ki tumne apne hi anjaan

rishtedaron ke hath me unhe sonpne diya chudwane ke liye." meine

apni chinta jatayi.

"Are kuch bura nahi lagega, balki wo dono to khush ho jayengi ki

unhe do naye lund mil gaye chudwane ke liye, lekin tumne phir bhi

apni chinta jatayi hai isliye behtar hoga ki hum usne pehle hi puch

len" Amit ne kaha aur unhe awaaz lagayi.

Jab wo dono kamre me aayi to Sumit ne unhe sab kuch vistar se samjha

diya ki wo kya aur kyon karna chahte hai.

"Hum ye janna chahte hai ki kya tum dono tayyar ho?" Amit ne un dono

se pucha.

Pehle to dono ne sharam ke mare nazrein jhuka li. "hum wahi karengi

jo hame didi kahengi," wo dono dheere se badbudai. Lekin unki

aankhon ki chamak ne bata diya ki wo dono bahot khush thi.

"Tum dono bahot shaitan ho?" meine kaha, "tum dono sab kuch mujhe

par hi kyon daal deti ho. Mien janti hoon ki don naye lund se

chudwane ke khayal ne hi tumhari choot ko geel kar diya hai, lao

mein dekhti hoon ki tumari choot geeli hui hai ki nahi."

"Nahi didi nahi....." kehkar wo dono wapas kitchen me bhaag gayi.

"Hum sab safar kaise karenge? kya train se." Anu ne pucha.

"Train se safar karne ki koi jaroorat nahi hai." Sumit ne

kaha, "Driver tum sabhi ko quaalis me le jayega aur wahan chod kar

wapas aa jayega. Phir hum uske sath tumhare paas pahunch jayenge."

"Jis subah hame rawana hona tha Sumit ne hamse kaha, "deviyon jab

tak ham na kahe tum dono apne jiju aur jijaaji se nahi chudwaogi.'

"Bilkul nahi mein wada karti hun." miene kaha.

"Mein bhi wada karti hun." Anu ne pane sir par haht rakh kar kaha.

"Aur haan in lund ki bhookiyon par bhi nazar rakhna." Amit ne akha.

"iski tum chinta mat karo, hum dhyaan rakhenge." Anu ne kaha..

Hum shaam ko 6.00 baje us bunglow par pahunch gaye jo jijaji ne

kiraye par liya tha. Bunglow sehar se kareeb ek ghante ke raaste par

tha.

Ek doosre se milne ke baad hamari behne hame bunglow deekhane lagi.

"Ye hamara bedroom hai." meine dekha ki usme char palang the.

"To ab aap khule aam sab koi sath sath sote ho?" miene hanste hue

kaha.

"Nahi aisi koi baat nahi hai," Mala didi ne jawab diya, "asal me in

bunglow me teen hi bedroom hai. Aur har bedroom me char char palang

hai, tum charon ko bhi ek hi kamre me rehna hoga kyon ki teesra

kamra naukraniyon ka hoga."

"Oh didi hame koi problem nahi hai" Anu ne muskurate hue kaha.

"Oh... to tum log bhi....." Seema didi ne kaha, "kab se chal raha

hai ye sab?"

"Didi yahi koi kuch mahino se." meine jawab diya.

"Chalo pehle kuch chai naashta kar lete hai phir baat karte hai."

Mala didi ne kaha.

"Tum dono khush to ho na?" Seema didi ne kaha.

"Haan didi," meine kaha aur phir unhe sab kuch vistaar se bata diya.

"To ye Mona aur Reema hai." Didi ne pucha.

"Haan didi." Anu ne jawab diya

"Tumhe inhe apne sath nahi lana chahiye tha, mijhe to lagta hai ki

tum dono ki takleef ki jad ye dono hi hai." Seema didi ne akah.

"Nahi didi isme inki koi galti nahi hai, shayad ye to hona hi tha."

meine jawab diya.

"Bahot sunder aur pyaari hai dono." jiju ne kaha.

"Aur chodne me bhi maze dar hongi mein dave se keh sakta hun."

jijaji ne kaha. "Tum kya kehte ho Ajay?"

"Haan inki choot me lauda ghusane me mazaa kuch khaas hi aayega."

"Bahot mazaa agyega." Anu hanste hue boli, "hamare pati dev ne inhe

khaas aap logon ke liye hi bheja hai. Unhone kaha ki jab hamare

aadarniya jijaaji log hamare liye kunwari choot ka inteazam kar

sakte hai to hum kam se kam unhe nai choot to tohfe me de hi sakte

hai."

"Wo to thik hai, par kya ye dono tayyar hai?" jiju ne pucha.

"Haan ye pura sahyog dengi, lamba aur mota lund inhe pasand hai,"

meine hanste hue kaha, "lekin aap dono ko hamare pati dev ke aane ka

intezar karna hoga."

"Bas hamare bare me bahot ho gaya," miene kaha, "didi wo dono

kunwariyan kahan hai?"


raj..
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Re: मर्दों की दुनिया

Unread post by raj.. » 12 Dec 2014 14:53

मर्दों की दुनिया पार्ट--8

अमित ने अपना दबाव बढ़ाया और मुझे ऐसा महसूस हुआ की उसका लंड

मेरी गंद की दीवारों को चीर रहा है.

"ऑश माआआ" में सिसक पड़ी.

"येयी गया," चिल्लाते हुए अमित ने एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा

लंड एक ही झटके मे मेरी गंद मे घुसा दिया.

"ओह मर गयी......." में दर्द के मारे ज़ोर से चिल्ला

उठी, "भगवान के लिए अमित क्या मुझे जान से मार डालने का इरादा

है."

"सॉरी सूमी मेरी जान," अमित ने माफी माँगते हुए कहा, "जोश जोश मे

मुझे ख़याल नही रहा, में भूल गया था कि सुमित का लंड भी

तुम्हारी चूत के अंदर घुसा हुआ है."

फिर दोनो अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे. थोड़ी देर मे मुझे

चूत और गंद दोनो छेदों मे मज़ा आने लगा.

"ऑश अमित जिसने भी वो कहानी लिखी थी सही मे जवाब नही.....

ऑश हाआअँ चोदो दोनो मुझे चूओड़ो हाा ज़ोर से ऑश."

मेरी जान वो कहानी राज शर्मा की है

मेरी सिसकियों को सुन दोनो मे जोश आ गया. सुमित नीचे से ज़ोर ज़ोर

से अपनी गंद उपर कर धक्के मारने लगा और अमित पीछे से ज़ोर के

धक्के मार रहा था.

"हाँ चोदो ऐसे ही चोदो, आअज तो तुम दोनो ने मुझे जन्नत का

मजा दे दिया... हां और ज़ोर से चोदो ऑश हाआँ और तेज श

मेरा तो छूटने वाला है और ज़ोर से.." जोरों से सिसकते हुए मेरी

चूत ने पानी छोड़ दिया.

दो तीन धक्के मार अमित ने अपना वीर्या मेर गंद मे छोड़ दिया और

सुमित ने अपना मेरी चूत मे

'सूमी क्या सही मे बहोत मज़ा आया," जब हमारी साँसे थोड़ी संभली

तो अनु ने पूछा.

"मुझे पता नही," मेने हंसते हुए कहा, "एक बारऔर इस तरह चुदवा

लूँ फिर ही बता सकती हूँ कि कैसा लगा."

"दीदी, लगता है सूमी दीदी को बहोत मज़ा आया है." मोना बोली.

"हाँ मुझे भी ऐसा ही लग रहा है," अनु ने कहा, "नही सूमी अब

मेरी बारी है और में दो लंड से चुदवाउन्गि."

"सॉरी अनु आज नही हम दोनो ये फ़ैसला किया है कि दोहरी चुदाई दिन

में एक बार ही करेंगे." सुमित ने कहा.

"अब ये तो कोई बात नही हुई.... हम क्या करेंगे?" अनु ने शिकायत

करते हुए कहा.

"हमने तो तुम्हे मौका दिया था लेकिन तुमने फ़ायदा नही उठाया इसमे

हमारी क्या ग़लती है? अब तो तुम्हे कल तक के लिए रूकना पड़ेगा."

अमित ने कहा.

अब हम इसी तरह मस्ती करते हुए दिन गुज़र रहे थे. हफ्ते के आख़िर

हम सब घर पर रह कर आराम करते और साथ ही मज़ा करते. अक्सर

घर मे रहते हुए हम कपड़े नही पहनते थे. ऐसे ही एक रविवार की

शाम हम सब हाथ मे बियर का ग्लास लिए बैठे थे. दोनो

नौकरानिया भी हमारी तरह नंगी ही थी और उन्होने कोक की बॉटल

हाथ मे ले रखी थी.

मेने देखा कि अमित रीमा को देखते हुए अपने लंड को मसल रहा था.

अचानक रीमा नीचे झुक कर ग्लाब की पंखुड़ियों को उठाने लगी जो

नीचे गिर गयी थी.

रीमा की फूली गंद देख कर अमित उछल पड़ा और उसे पीछे से

पकड़ लिया, "अभी तो में इसकी गंद मारूँगा."

अचानक ना जाने रीमा को क्या हुआ उसने अमित को धक्का देते हुए अपने

से दूर कर दिया लौर चिल्लाई, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे

छूने की?"

अमित और हम चारों रीमा का ये व्यवहार देख कर हैरान रह गये

थे, की आज इसे क्या हो गया. हमने उसकी तरफ देखा तो वो थोड़ा दूर

खड़ी मुस्कुरा रही थी.

"भाई ये नाटक कर रही है," सुमित ने कहा, "मुझे लगता है कि तुम

इसे मनाओ."

अमित ने अपनी गर्दन हिलाई और रीमा को अपनी बाहों मे भर

लिया, "डार्लिंग क्यों नखरे दीखा रही हो? चलो मज़ा करते है."

"तुम्हे शरम नही आती इस तरह पराई औरतों को छेड़ते हुए?" रीमा

ने अपने आप को अमित से छुड़ाया और अपने कूल्हे मतकती हुई उससे दूर

चली गयी.

"अमित मुझे लगता है कि ये चाहती है की तुम इसके साथ ज़बरदस्ती

करो." सुमित ने हंसते हुए कहा.

"फिर तो आज इसकी इच्छा पूरी होकर रहेगी." अमित रीमा की ओर बढ़ते

हुए बोला.

रीमा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और वो जोरों से चिल्लती हुई

कमरे मे भागने लगी, "अरे कोई इस बदमाश से मुझे बचाओ.. कोई तो

मेरी मदद करो.... ये बदमाश मुझे चोदना चाहता है... प्लीज़ कोई

तो मदद कर दो..."

फिर पकड़ा पकड़ी का खेल शुरू हो गया. आख़िर दस मिनिट तक इधर

से उधर भागने के बाद रीमा अमित के हाथ लग ही गयी.

अमित ने जोरों से उसे बाहों मे भींचा और उसकी चुचियों को रगड़ते

हुए बोला, "देख हरमज़ड़ी अब में तुझे कैसे चोदता हूँ, अगर आज

चोद चोद के तेरी चूत और गंद ना फाड़ दी तो कहना, साली कई

दिन तो ठीक से चल भी नही पाएगी."

रीमा किसी जल मे फाँसी मछली की तरह फड़फदाई और जोरों से

चिल्लाने लगी, 'छोड़ दे मुझे बदमाश , अगर चोदना ही तो जा कर

अपन मा बेहन को चोद जाकर."

थोड़ी देर मे हमे लगा कि जिसे हम मज़ाक समझ रहे थे वो मज़ाक

नही था, रीमा सही मे अपने आपको अमित से छुड़ाने की कोशिश कर

रही थी.

और अमित का तो हाल बुरा था, उत्तेजना और जोश मे उसका चेहरा और

लंड दोनो लाल हो चुके थे. लंड था कि और तनता ही जा रहा था.

काफ़ी छीना झपटी के बाद अमित रीमा को ज़मीन पर लीटाने मे सफल

हो गया. लेकिन वो जितना रीमा के उपर आकर उसकी टाँगो को फैलाने की

कोशिश करता रीमा किसी ना क्सि तरह उसे अपने उपर से हटा देती.

लेकिन विरोध करते करते रीमा थक गयी और उसके हाथ पाँव ढीले

पड़ने लगे. आख़िर अमित उसकी टाँगो को फैलाने मे कामयाब हो गया.

उसने उसकी चुचियों को पकड़ा और एक ही धक्के मे अपना लंड उसकी

चूत मे गुसा दिया.

"ऑश मार गयी..... मुझे जाने दे बादमाअश" रीमा जोरों से दर्द के

मारे कराह उठी.

लेकिन अमित ने उसकी करहों पर कोई ध्यान नही दिया और ज़ोर ज़ोर से

उसकी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करता रहा. रीमा गिड़गिदने लगी

की वो उसे छोड़ दे.

अमित था की वो उसकी टाँगो को और फैला ज़ोर ज़ोर के धक्के मार रहा

था, "ले रांड़ ले मेरे लंड को, क्या कहा था तूने की में अपनी मा

बेहन को चोदु देख अब में तेरी चूत की क्या हालत करता हूँ ले

रंडी मेरे लंड को."

थोड़ी ही देर मे रीमा की हाथ पाँव ढीले पड़ गये और उसकी कमर

अमित का साथ देने लगी. में समाझगाई की उसकी चूत पानी छोड़ने

वाली है. दो तीन धक्कों मे ही वो ज़ोर की सिसकारी भरते ही झाड़

गयी. अमित भी ज़ोर के धक्के मार झाड़ गया.

अमित के झाड़ते ही रीमा ने उसके चेहरे को हाथो मे ले लिया, थॅंक

यू सर, मज़ा आ गया," कहकर वो उसे बेतहाशा चूमने लगी.

"रीमा ये सब क्या था," अनु ने उससे पूहा.

"वो दीदी क्या है ना में हमेशा सोचा करती थी कि कोई मेरे साथ

ज़बरदस्ती करे और बलात्कार के वक़्त कैसा महसूस होता है में ये

जानना चाहती थी, और आज मुझे पता चल गया कि कभी कभी

ज़बरदस्ती मे भी मज़ा आता है." रीमा ने जवाब दिया.

"ऐसा था तो तूने हमे पहले क्यों नही बताया?" मेने पूछा.

"दीदी अगर बता देती तो शायद हक़ीकत वाला मज़ा ना आता." रीमा ने

कहा.

"ये शायद सही कह रही है." मोना ने कहा, "लेकिन रीमा जब अमित

सर ने अपना लंड तेरी चूत मे घुसाया तो तू चीख क्यों पड़ी."

"वो क्या है ना, जब भी कुँवारी चूत मे लॉडा घुसता है तो लड़की

चीख ही पड़ती है ना." रीमा ह्नस्ते हुए बोली.

रीमा ने इस भोले पन से मुँह बनाते हुए कहा था कि हम सभी

हँसने लगे.

"मोना क्या तुम भी चाहोगी रीमा की तरह अपना बलात्कार करवाना? सुमित

ने पूछा.

"नही सर, ये रीमा को ही मुबारक हो." मोना ने जवाब दिया, "हां

अगर आप मुझे चोदना चाहते है तो चोद सकते है."

"वो तो हमेशा में तुम्हे चोदना चाहता हूँ," सुमित उसे बाहों मे

भरते हुए बोला.

"सुमित एक मिनिट रूको," अनु ने कहा, "मोना तुम्हारा कोई सपना या फिर

ऐसा कोई ख्याल जो तुम पूरा करना चाहती हो?"

"हाँ एक सपना है, में बचपन से ही एक सपना देखती आई हू मोना ने

कहा, " कि मुझे दुल्हन की तरह सजाया जाए, मेरी शादी हो रही

है और में अपनी कुँवारी चूत अपने पति से चुदवा रही हूँ, लेकिन

शायद ये सब अब एक सपना ही रह जाएगा."

"नही ये सपना नही रहेगा," मेने कहा, "अमित और सुमित तुम्हारा

कुँवारा पन तो नही लौटा सकते लेकिन हां आज तुम्हारा बाकी का

सपना ज़रूर पूरा होगा."

शाम को हम मोना को एक ब्यूटी पार्लर मे ले गये जो कि दुल्हन के

मेक उप के लिए फाओमौस था. रीमा को हमने ठीक किसी दुल्हन की तरह

सज़ा कर तय्यार कर दिया. नया दुल्हन का जोड़ा, गहने सभी कुछ

हमने उसे पहना दिया. हम बाकी भी ऐसे तय्यार हो गयी जैसे की किसी

शादी मे जा रही हों.