बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:49

बात एक रात की--7

गतान्क से आगे.................

“मुझे नही लगता कि इस वक्त तुम्हारा घर जाना ठीक होगा.” मोहित ने कहा

“पर मैं यहा हाथ पर हाथ रख कर तो नही बैठ सकती. इस से तो साबित हो जाएगा कि मैं ही कातिल हूँ.”

'मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगी' पद्‍मिनी ने कहा

'देखो मुझे नही पता था कि बात इतनी बढ़ जाएगी'

'तुम्हारी बेवकूफी की सज़ा मुझे मिल रही है'

'शायद किस्मत हमे साथ रखना चाहती है इसीलिए ये सब खेल हो रहा है. तुम्हारे आने से इस घर में रोनक सी है. मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लग रहा है'

'यहा मेरी जान पर बन आई है और तुम्हे ये बेहूदा फ्लर्ट सूझ रहा है, शरम नही आती तुम्हे ऐसी बाते करते हुए'

तुम मुझे ग़लत समझ रही हो, मेरा कहने का मतलब ये था कि हमे मिल कर इस मुसीबत का सामना करना होगा'

'मैं जब तक तुम्हारे साथ रहूंगी किसी ना किसी मुसीबत में फँसी रहूंगी. मुझे जल्द से जल्द यहा से निकलना होगा' पद्‍मिनी धीरे से बड़बड़ाई.

'कुछ कहा तुमने'

'हां यही की मैं जा रही हूँ'

'तुमने सुना नही चारो तरफ पोलीस ढूँढ रही है तुम्हे. ऐसे में कैसे बाहर निकलोगी'

'कुछ भी हो मुझे जाना ही होगा'

तभी फिर से दरवाजा खड़कने लगा.

'राज ही होगा...चाय लाया होगा मेरे लिए' मोहित ने कहा.

'ठीक है उसे जल्दी रफ़ा दफ़ा करना...मुझे घर के लिए निकलना है' पद्‍मिनी ये कह कर टाय्लेट में आ गयी.

मोहित ने दरवाजा खोला. राज ही था. उसके हाथ में 2 कप चाय थी.

'गुरु आज मस्त चाय बनाई है'

'अच्छा ऐसा क्या कर दिया'

'इलायची डाली है गुरु...नगमा लाई थी कल'

'ठीक है तू जा...मैं चाय पी लूँगा'

'गुरु बात क्या है...बार-बार मुझे यहा से निकाल देते हो'

'कुछ नही राज...तू नही समझेगा'

'तुम्हारा मूड ठीक करने के लिए कुछ दिलचस्प बात करूँ'

'बाद में बताना नगमा की बात, अभी नही'

'पर मैं तो कुछ और ही कह रहा था...हां नगमा की बात से याद आया...गुरु कर ली फ़तह मैने उसकी गान्ड. बहुत मज़ा आया गान्ड मार के, सच में. तुम सच कहते थे मस्त गान्ड है उसकी. एक-एक धक्के में वो मज़ा था कि कह नही सकता...'

टाय्लेट में पद्‍मिनी को सब सुन रहा था. 'इन कामीनो को और कोई काम नही है, हर वक्त यही सब' पद्‍मिनी ने सोचा.

'वैसे तू कुछ और क्या कहने वाला था?' मोहित ने पूछा.

'वो हां...गुरु देखी तुमने न्यूज़ पूरी'

'हां देख ली'

'विस्वास नही होता ना की इतनी हसीन लड़की कातिल भी हो सकती है'

'हां यार यकीन नही होता पर टीवी पर दीखा तो रहे हैं' मोहित को पता था कि पद्‍मिनी सुन रही होगी इसलिए उसने यू ही चुस्की ली.

'मेरा तो दिल आ गया इस कातिल हसीना पर'

चुप कर दीवारो के भी कान होते हैं' मोहित ने कहा.

'सुनो तो सही...मैं जब न्यूज़ देख रहा था पहले तो डर लग रहा था. फिर बार-बार उसे देख कर लंड खड़ा हो गया. काश मिल जाए उसकी एक बार.'

'अबे चुप कर मरवाएगा क्या' मोहित ने कहा.

पद्‍मिनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया.

'सच कह रहा हूँ गुरु अगर एक बार मैने उसकी मार ली ना तो वो सारी रात मुझसे मरवाती रहेगी और ये रातो को खून करना बंद कर देगी.' राज ने कहा.

'बहुत हो गया तू जा अब'

'गुरु रात भर नगमा से करने के बाद भी सुबह टीवी पर इस हसीना को देख कर वो दिल मचला कि रुका नही गया...मूठ मार ली मैने'

'अबे पागल हो गया है क्या चल निकल यहा से'

'क्या हुआ गुरु गुस्सा क्यों होते हो, मैं तो बस...'

'इसे कहीं मत जाने देना अभी बताती हूँ इसे मैं' टाय्लेट के अंदर से पद्‍मिनी चिल्लाई.

'ये कौन चिल्लाया गुरु' राज हैरत में बोला.

'मैने कहा था ना दीवारो के भी कान होते हैं' मोहित ने कहा.

'हां पर दीवारो के पास मूह कब से आ गया, चिल्लाने के लिए' राज ने कहा.

तभी टाय्लेट का दरवाजा खोल कर पद्‍मिनी बाहर निकली.

पद्‍मिनी को देखते ही राज की उपर की साँस उपर और नीचे की साँस नीचे रह गयी. उसके हाथ से चाय का कप गिर गया और उसकी टांगे थर थर काँपने लगी.

'हां तो फिर से कहो क्या कह रहे थे मेरे बारे में'

'ग...गुरु ये...' राज से कुछ भी बोले नही बन रहा था.

'अबे क्या कर रहा है, तेरा तो मूत निकल गया...'

पद्‍मिनी बहुत गुस्से में थी लेकिन फिर भी राज की ऐसी हालत देख कर हँसे बिना ना रह सकी.

'बस निकल गयी सारी हेकड़ी...बहुत बाते करता है...हुह' पद्‍मिनी ने कहा.

...................................

सुबह के 7 बजने को हैं. होटेल ग्रीन पॅलेस में एक खूबसूरत लड़की रूम नो 201 की बेल बजाती है. दरवाजा खुलता है.

'गुड मॉर्निंग सर' लड़की हंस कर कहती है.

'गुड मॉर्निंग...आओ-आओ मैं तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहा था, मेरा नाम संजय है, वॉट'स युवर नेम?'

'जी मुस्कान'

'बहुत सुंदर नाम है...बिल्कुल तुम्हारी तरह...कुछ चाय-कॉफी लोगि' संजय ने पूछा.

'जी शुक्रिया...मैं घर से पी कर आई हूँ'

'क्या पी कर आई हो'

'चाय पी कर आई हूँ'

'मुझे तो यकीन नही था कि इतनी सुबह मिस्टर कुमार किसी को भेज देगा. आक्च्युयली मेरे पास अभी वक्त था और शाम को मुझे निकलना है. बहुत मन हो रहा था. इतनी सुंदर लड़की भेजेगा कुमार मुझे यकीन नही था.'

'शुक्रिया' लड़की ने कहा.

'किस बात के लिए?'

'मेरी तारीफ़ के लिए'

संजय ने मुस्कान को उपर से नीचे तक देखा और अपने बेग से 50,000 निकाल कर मुस्कान के हाथ में रख दिए और बोला,'ये लो तुम्हारी फीस'

मुस्कान ने पैसे चुपचाप पर्स में रख लिए.

'तुम कॉलेज गर्ल हो ना, मैने मिस्टर कुमार को कॉलेज गर्ल के लिए बोला था'

'जी हां मैं कॉलेज गर्ल हूँ'

'क्या करती हो कॉलेज में'

'क्या मतलब पढ़ती हूँ'

'मेरा मतलब बी.ए कर रही हो या बी.कॉम या कुछ और'

'मैं बी.ए फाइनल में हूँ'

'कब से हो इस लाइन में'

'ये मेरा पहला असाइनमेंट है' मुस्कान ने कहा.

'जो भी मुझे मिलती है यही कहती है' संजय ने हंसते हुए कहा.

'सर, मैं दूसरो का नही जानती लेकिन ये मेरा पहला है'

'तो क्या वर्जिन हो तुम'

'नही मेरा बॉय फ़्रेंड है'

'इस लाइन में मजबूरी से हो या फिर शौक से'

'जिंदगी है...मैं इस बारे में कुछ नही कहना चाहती' कहते कहते मुस्कान की आँखे नम हो गयी थी. पर जल्दी ही उसने खुद को संभाल लिया. ये वाकई में उसका फर्स्ट टाइम था.

संजय खड़ा हो कर मुस्कान के सामने आ गया और बोला,'अच्छा छोड़ो ये सब...चलो मेरे गन्ने को बाहर निकाल कर चूसना शुरू करो...बहुत मच्चल रहा है तुम्हारे मूह में जाने के लिए'

मुस्कान ने संजय की जीन्स का बॉटन खोल कर चैन नीचे सरका दी.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--7

gataank se aage.................

“mujhe nahi lagta ki is vakt tumhaara ghar jana theek hoga.” mohit ne kaha

“par main yaha haath par haath rakh kar to nahi baith sakti. Is se to saabit ho jaayega ki main hi kaatil hun.”

'mere saath jo kuch bhi ho raha hai uske liye main tumhe kabhi maaf nahi karungi' padmini ne kaha

'dekho mujhe nahi pata tha ki baat itni badh jaayegi'

'tumhaari bevkoofi ki saja mujhe mil rahi hai'

'shaayad kismat hame saath rakhna chaahti hai isiliye ye sab khel ho raha hai. Tumhaare aane se is ghar mein ronak si hai. Mujhe tumhaara saath bahut achcha lag raha hai'

'yaha meri jaan par ban aayi hai aur tumhe ye behuda flirt sujh raha hai, sharam nahi aati tumhe aisi baate karte hue'

tum mujhe galat samajh rahi ho, mera kahne ka matlab ye tha ki hame mil kar is musibat ka saamna karna hoga'

'main jab tak tumhaare saath rahungi kisi na kisi musibat mein phansi rahungi. Mujhe jald se jald yaha se nikalna hoga' padmini dheere se badbadaayi.

'kuch kaha tumne'

'haan yahi ki main ja rahi hun'

'tumne shuna nahi charo taraf police dhundh rahi hai tumhe. Aise mein kaise baahar niklogi'

'kuch bhi ho mujhe jaana hi hoga'

tabhi phir se darvaaja khadakne laga.

'Raj hi hoga...chaaye laaya hoga mere liye' mohit ne kaha.

'theek hai use jaldi rafa dafa karna...mujhe ghar ke liye nikalna hai' padmini ye kah kar toilet mein aa gayi.

Mohit ne darvaaja khola. Raj hi tha. Uske haath mein 2 cup chaaye thi.

'guru aaj mast chaaye banaayi hai'

'achcha aisa kya kar diya'

'ilaaychi daali hai guru...nagma laayi thi kal'

'theek hai tu ja...main chaaye pi lunga'

'guru baat kya hai...baar-baar mujhe yaha se nikaal dete ho'

'kuch nahi Raj...tu nahi samjhega'

'tumhaara mud theek karne ke liye kuch dilchasp baat karun'

'baad mein bataana nagma ki baat, abhi nahi'

'par main to kuch aur hi kah raha tha...haan nagma ki baat se yaad aaya...guru kar li fatah maine uski gaanD. Bahut maja aaya gaanD maar ke, sach mein. Tum sach kahte the mast gaanD hai uski. Ek-ek dhakke mein vo maja tha ki kah nahi sakta...'

toilet mein padmini ko sab shun raha tha. 'in kamino ko aur koi kaam nahi hai, har vakt yahi sab' padmini ne socha.

'vaise tu kuch aur kya kahne wala tha?' mohit ne pucha.

'vo haan...guru dekhi tumne news puri'

'haan dekh li'

'viswaas nahi hota na ki itni hasin ladki kaatil bhi ho sakti hai'

'haan yaar yakin nahi hota par tv par deekha to rahe hain' mohit ko pata tha ki padmini shun rahi hogi isliye usne yu hi chuski li.

'mera to dil aa gaya is kaatil hasina par'

chup kar deewaro ke bhi kaan hote hain' mohit ne kaha.

'shuno to sahi...main jab news dekh raha tha pahle to dar lag raha tha. Phir baar-baar use dekh kar lund khada ho gaya. Kaas mil jaaye uski ek baar.'

'abey chup kar marvaayega kya' mohit ne kaha.

Padmini ka chehra gusse se laal ho gaya.

'sach kah raha hun guru agar ek baar maine uski maar li na to vo saari raat mujhse marvaati rahegi aur ye raato ko khun karna band kar degi.' Raj ne kaha.

'bahut ho gaya tu ja ab'

'guru raat bhar nagma se karne ke baad bhi subah tv par is hasina ko dekh kar vo dil machla ki ruka nahi gaya...muth maar li maine'

'abey paagal ho gaya hai kya chal nikal yaha se'

'kya hua guru gussa kyon hote ho, main to bas...'

'ise kahin mat jaane dena abhi bataati hun ise main' toilet ke ander se padmini cheellayi.

'ye kaun chillaayaa guru' Raj hairat mein bola.

'maine kaha tha na deewaro ke bhi kaan hote hain' mohit ne kaha.

'haan par deewaro ke paas muh kab se aa gaya, cheellane ke liye' Raj ne kaha.

Tabhi toilet ka darvaaja khol kar padmini baahar nikli.

Padmini ko dekhte hi Raj ki upar ki saans upar aur niche ki saans neeche rah gayi. Uske haath se chaaye ka cup gir gaya aur uski taange thar thar kaanpne lagi.

'haan to phir se kaho kya kah rahe the mere baare mein'

'g...guru ye...' Raj se kuch bhi bole nahi ban raha tha.

'abey kya kar raha hai, tera to moot nikal gaya...'

padmini bahut gusse mein thi lekin phir bhi Raj ki aisi haalat dekh kar hanse bina na rah saki.

'bas nikal gayi saari hekdi...bahut baate karta hai...huh' padmini ne kaha.

Subah ke 7 bajne ko hain. Hotel green palace mein ek khubsurat ladki room no 201 ki bell bajaati hai. Darvaaja khulta hai.

'good morning sir' ladki hans kar kahti hai.

'good morning...aao-aao main tumhaara hi intezaar kar raha tha, mera naam sanjay hai, what's your name?'

'ji muskaan'

'bahut shunder naam hai...bilkul tumhaari tarah...kuch chaaye-coffee logi' sanjay ne pucha.

'ji shukriya...main ghar se pi kar aayi hun'

'kya pi kar aayi ho'

'chaaye pi kar aayi hun'

'mujhe to yakin nahi tha ki itni subah mr kumar kisi ko bhej dega. Actually mere paas abhi vakt tha aur shaam ko mujhe nikalna hai. Bahut man ho raha tha. Itni shunder ladki bhejega kumar mujhe yakin nahi tha.'

'shukriya' ladki ne kaha.

'kis baat ke liye?'

'meri taarif ke liye'

sanjay ne muskaan ko upar se neeche tak dekha aur apne beg se 50,000 nikaal kar muskaan ke haath mein rakh diye aur bola,'ye lo tumhaari fees'

muskaan ne paise chupchaap purse mein rakh liye.

'Tum college girl ho na, maine mr kumar ko college girl ke liye bola tha'

'ji haan main college girl hun'

'kya karti ho college mein'

'kya matlab padhti hun'

'mera matlab b.a kar rahi ho ya b.com ya kuch aur'

'main b.a final mein hun'

'kab se ho is line mein'

'ye mera pahla assignment hai' muskaan ne kaha.

'jo bhi mujhe milti hai yahi kahti hai' sanjay ne hanste hue kaha.

'sir, main dusro ka nahi jaanti lekin ye mera pahla hai'

'to kya virgin ho tum'

'nahi mera boy freind hai'

'is line mein majboori se ho ya phir sonk se'

'jindaagi hai...main is baare mein kuch nahi kahna chaahti' kahte kahte muskaan ki aankhe nam ho gayi thi. Par jaldi hi usne khud ko sambhaal liya. Ye vaakyi mein uska first time tha.

Sanjay khada ho kar muskaan ke saamne aa gaya aur bola,'achcha chodo ye sab...chalo mere ganne ko baahar nikaal kar choosna shuru karo...bahut machchal raha hai tumhaare muh mein jaane ke liye'

muskaan ne sanjay ki jeans ka botton khol kar chain neeche sarka di.

Kramashah..............................

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:49

8

गतान्क से आगे.................

'आअहह जल्दी करो वेट नही होता'

मुस्कान ने एक हाथ से संजय के लंड को पकड़ कर बाहर खींच लिया. एक पल के लिए वो लंड को निहारती रही.

'कैसा है मेरा लोड्‍ा मेरी जान, तेरे बॉय फ़्रेंड के लंड से बड़ा है क्या जो ऐसे देख रही हो'

'नही बड़ा तो नही है...हां पर इसका मूह थोड़ा मोटा है'

'देखो भाई 50,000 दिए हैं मैने इसका-उसका मत करो इसे नाम से पुकारो.'

'आपके लंड का मूह थोडा मोटा है'

'ध्यान से देख साली...ये तेरे बॉय फ़्रेंड की मूँगफली से बड़ा है'

मुस्कान समझ गयी कि ये आदमी थोड़ा सनकी है वो तुरंत बोली,'हां-हां ठीक कहा बहुत बड़ा लंड है ये. मैने ठीक से नही देखा था.'

संजय ने मुस्कान के बाल मुति में भींच कर कहा,'आगे से ध्यान रखना समझी'

'आहह जी बिल्कुल' मुस्कान ने कराह कर कहा.

'चल अब चूस इस गन्ने को और बता ये मीठा है कि नही'

'जी अभी चख कर बताती हूँ'

'मुस्कान ने मूह खोला और संजय के लंड को मूह में आधा ले लिया.

'तू सुंदर तो है पर तुझे लंड चूसना नही आता. इतनी बुरी तरह से किसी ने आज तक मूह में नही लिया मेरा लंड.'

'जी ये मेरा पहली बार है'

'क्यों नही चूस्ति क्या अपने बॉय फ़्रेंड का लंड तू.'

'नही.....'

'देखो मैने पूरे पैसे दिए हैं मुझे एक दम मस्त ब्लो जॉब चाहिए. मैं अभी अपने लॅपटॉप में एक पॉर्न मूवी लगाता हूँ...उसमें जैसे लड़की चूस्ति है वैसे ही चूसना मेरा लंड...ओके.'

'जी...ओके'

............................

'सर हमने पूरे सहर की नाकेबंदी कर रखी है...वो जल्दी पकड़ी जाएगी'

'मुझे पल-पल की रिपोर्ट देते रहना विजय...बहुत प्रेशर है उपर से इस केस में'

'आप चिंता ना करें सर...केस तो सॉल्व हो ही चुका है...वो भी पकड़ी ही जाएगी'

'विटनेस के घर पर कितनी प्रोटेक्षन भेजी है'

'सर 2 हवलदार भेजे हैं'

'ह्म्म...उस नकाब पोश का कुछ पता चला कि वो कौन है.'

'नही सर अभी कुछ पता नही चला...पर जल्द पता चल जाएगा'

'ठीक है मेरी जीप लग्वाओ, मैं पूरे सहर का एक राउंड लूँगा'

'ओके सर...अभी लगवाता हूँ'

विजय सब इनस्पेक्टर है और जिसे वो सर-सर कह रहा है वो है रंजीत चौहान, इंस्पेकोर. सीरियल किल्लर का केस उसी के पास है.

अचानक विजय का फोन बजने लगता है. वो फोन उठाता है.....फोन पर बात करने के बाद वो कहता है,' सर 100 नो पर अभी-अभी किसी ने फोन करके बताया है कि होटेल ग्रीन पॅलेस के रूम नंबर 201 में छुपी है पद्‍मिनी अरोरा'

'ह्म्म मैं खुद चलूँगा वाहा...फ़ौरन जीप लग्वाओ'

'ओके सर' कह कर विजय कमरे से बाहर आ जाता है.

15 मिनट बाद होटेल ग्रीन पॅलेस का बाहर पोलीस की जीप रुकती है. इंस्पेक्टर चौहान, सब इनस्पेक्टर, विजय को साथ ले कर होटेल में घुसता है.

'रूम नो 201 किधर है' इनस्पेक्टर चौहान ने रिसेप्षनिस्ट से पूछा.

'क्या बात है सर?' रिसेप्षनिस्ट ने पूछा.

'साले अभी अंदर कर दूँगा...रूम दिखा कहा है' एक तो इनस्पेक्टर दीखने में ही भयानक था उपर से ये रोब...रिसेप्षनिस्ट की तो हालत खराब हो गयी.

'आओ सर मैं खुद आपको रूम तक ले चलता हूँ'

'हां जल्दी ले चल' चौहान ने कहा.

कुछ देर बाद इनस्पेक्टर चौहान विजय के साथ रूम नो 201 के बाहर था.

रूम के अंदर लॅपटॉप पर पॉर्न मूवी चल रही है और माहॉल गरम है.

'देखो कैसे चूस रही है ये ब्लोंड हप्सी का मोटा लंड...देखी है ऐसी मूवी कभी'

'नही सर...'

'साली देखा कर...जब अपनी गान्ड तूने बाजार में उतार दी है तो कुछ स्किल तो सीख...बहुत कमाएगी अगर मेरी बात मानेगी तो.'

'ओके सर... मैं सीख लूँगी'

'अभी सीखा कुछ...'

'हां-हां बिल्कुल.'

'चल फिर चूस मेरे लंड को...बिल्कुल उसी तरह जैसे मूवी में वो हप्सी का चूस रही है'

लड़की ने बड़ी सावधानी से संजय के लंड को पकड़ा और जैसे मूवी में दिखाया था वैसे मूह में लेने की कोशिस की.

'आअहह..... तू तो सीख गयी...पक्की रंडी बन जाएगी तू आज'

तभी रूम की बेल बज उठी.

'कौन आ गया इस वक्त...मैने मना किया था कि डिस्टर्ब मत करना' संजय बड़बड़ाया.

"कोई गड़बड़ तो नही" लड़की ने पूछा.

"चिंता मत कर, ये होटेल बिल्कुल सेफ है...ज़रूर कोई बेवकूफ़ वेटर होगा...तू मूवी पर ध्यान लगा...मैं अभी आता हूँ"

वो दरवाजा खोलता है लेकिन पोलीस को वाहा पाकर उसके पसीने छूट जाते हैं.

"क्या हुआ जनाब...चेहरे का रंग क्यों उड़ गया हमे देख कर" इनस्पेक्टर चौहान ने कहा.

"क्या बात है सर?"

"तुम्हारे साथ और कौन-कौन है!" चौहान ने पूछा.

"मेरी फियान्से है साथ मेरे"

"क्या नाम है उसका"

"जी मुस्कान"

"ह्म्म मुस्कान, ठीक है मुझे तुम्हारा रूम चेक करना है" चौहान ने रूम में घुसते हुए कहा.

"पर इनस्पेक्टर साहब बताए तो सही कि बात क्या है"

"थोड़ी देर में सब पता चल जाएगा ज़ुबान बंद रख" चौहान ने रोब से कहा.

इनस्पेक्टर कमरे में आ गया. लड़की ने तब तक चेहरे पर दुपपता लपेट लिया था.

"हे लड़की चेहरा दिखा अपना" चौहान ने पूछा.

"क्या बात है सर!"

"सुना नही...दुपपता हटा मूह से और थोबड़ा दिखा अपना"

लड़की ने दुपपता मूह से हटा लिया.

"अरे पूजा जी आप यहा...आप यहा क्या कर रही हैं?"

"जी मैं अपने फियान्से से मिलने आई थी"

इनस्पेक्टर का माथा ठनका. उसने लॅपटॉप में झाँक कर देखा. उसमें अभी भी पॉर्न मूवी चल रही थी. "हे तुम मेरे साथ बाहर आओ एक मिनट" चौहान ने संजय से कहा.

"पर बात क्या है इनस्पेक्टर साहब" संजय ने कहा

कमरे से बाहर आ कर चौहान ने कहा,"सच-सच बता क्या रिस्ता है तेरा इस लड़की से"

"सर...वो मेरी फियान्से है"

"अच्छा क्या करती है तेरी फियान्से"

"वो बी.ए फाइनल में है"

"कौन से कॉलेज में"

"भूल गया सर पता नही"

"अच्छा...चल ये बता कहा रहती है तेरी फियान्से काअड्रेस तो पता होगा तुझे उसका"

"आप ये सब क्यों पूछ रहे हैं"

तभी चौहान ने एक थप्पड़ रसीद कर दिया संजय के मूह पर. थप्पड़ इतनी ज़ोर का था कि संजय का सर घूम गया.

"अब सच बताता है या के एक और दूं कान के नीचे"

"बताता हूँ-बताता हूँ सर...वो एस्कॉर्ट है"

"क्या कहा?" चौहान को इस सच की उम्मीद नही थी. वो तो सोच रहा था कि उनका कोई इल्लिसिट अफेर है.

"सच कह रहा हूँ सर...वो लड़की एस्कॉर्ट है"

"तुम कहाँ से आए हो"

"सर मैं देल्ही से आया हूँ"

"कब आए थे यहा"

"मैं रात 12 बजे आया था यहा"

"विजय..." चौहान ने विजय को आवाज़ लगाई जो कि कमरे में था.

"जी सर" विजय फ़ौरन हाजिर हो गया.

"ये लड़की तो वो नही है जिसकी हमे तलास थी...कमरा अच्छे से चेक किया और कोई तो नही है अंदर" चौहान ने कहा.

"नही सर कमरे में और कोई नही है...हां पर कमरे में बेड के तकिये के नीचे से ये चाकू मिला है" विजय ने कहा.

"इतने बड़े चाकू को तकिये के नीचे रख कर क्या कर रहे थे तुम"

"जी वो मैं...मैं" संजय ने हकलाते हुए कहा.

"क्या मैं-मैं लगा रखा है...क्या मतलब है ऐसा चाकू रखने का"

"सर मेरे ग्रह-नक्षत्र खराब चल रहे है उसी के उपाए के लिए मैं रोज अपने तकिये के नीचे ये चाकू रखता हूँ. ज्योतिसी ने बताया था."

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--8

gataank se aage.................

'aaahhh jaldi karo wait nahi hota'

muskaan ne ek haath se sanjay ke lund ko pakad kar baahar kheench liya. Ek pal ke liye vo lund ko nihaarti rahi.

'kaisa hai mera loda meri jaan, tere boy freind ke lund se bada hai kya jo aise dekh rahi ho'

'nahi bada to nahi hai...haan par iska muh thoda mota hai'

'dekho bhai 50,000 diye hain maine iska-uska mat karo ise naam se pukaaro.'

'aapke lund ka muh thoda mota hai'

'dhyaan se dekh saali...ye tere boy freind ki mungfali se bada hai'

muskaan samajh gayi ki ye aadmi thoda sanki hai vo turant boli,'haan-haan theek kaha bahut bada lund hai ye. Maine theek se nahi dekha tha.'

sanjay ne muskaan ke baal muthi mein bheench kar kaha,'aage se dhyaan rakhna samjhi'

'aahhh ji bilkul' muskaan ne karaah kar kaha.

'chal ab choos is ganne ko aur bata ye meetha hai ki nahi'

'ji abhi chakh kar bataati hun'

'muskaan ne muh khola aur sanjay ke lund ko muh mein aadha le liya.

'tu shunder to hai par tujhe lund choosna nahi aata. Itni buri tarah se kisi ne aaj tak muh mein nahi liya mera lund.'

'ji ye mera pahli baar hai'

'kyon nahi choosti kya apne boy freind ka lund tu.'

'nahi.....'

'dekho maine pure paise diye hain mujhe ek dam mast blow job chaahiye. Main abhi apne laptop mein ek porn movie lagaata hun...usmein jaise ladki choosti hai vaise hi choosna mera lund...ok.'

'ji...ok'

'Sir hamne pure sahar ki naakebandi kar rakhi hai...vo jaldi pakdi jaayegi'

'mujhe pal-pal ki report dete rahna vijay...bahut pressure hai upar se is case mein'

'aap chinta na karein sir...case to solve ho hi chuka hai...vo bhi pakdi hi jaayegi'

'witness ke ghar par kitni protection bheji hai'

'sir 2 hawaldaar bheje hain'

'hmm...us nakaab posh ka kuch pata chala ki vo kaun hai.'

'nahi sir abhi kuch pata nahi chala...par jald pata chal jaayega'

'theek hai meri jeep lagvaao, main pure sahar ka ek round lunga'

'ok sir...abhi lagvaata hun'

vijay sub inspector hai aur jise vo sir-sir kah raha hai vo hai ranjeet chauhan, inspecor. Serial killer ka case usi ke paas hai.

Achchaanak vijay ka phone bajne lagta hai. Vo phone uthata hai.....phone par baat karne ke baad vo kahta hai,' sir 100 no par abhi-abhi kisi ne phone karke bataaya hai ki hotel green palace ke room no 201 mein chupi hai padmini arora'

'hmm main khud chalunga vaha...fauran jeep lagvaao'

'ok sir' kah kar vijay kamre se baahar aa jaata hai.

15 minat baad hotel green palace ka baahar police ki jeep rukti hai. Inspecto chauhan, sub inspector, vijay ko saath le kar hotel mein ghusta hai.

'room no 201 kidhar hai' inspector chauhan ne receptionist se pucha.

'kya baat hai sir?' receptionist ne pucha.

'saale abhi ander kar dunga...room dikha kaha hai' ek to inspector deekhne mein hi bhayaanak tha upar se ye rob...receptionist ki to haalat kharaab ho gayi.

'aao sir main khud aapko room tak le chalta hun'

'haan jaldi le chal' chauhan ne kaha.

Kuch der baad inspector chauhan vijay ke saath room no 201 ke baahar tha.

Room ke ander laptop par porn movie chal rahi hai aur maahol garam hai.

'dekho kaise choos rahi hai ye blond hapsi ka mota lund...dekhi hai aisi movie kabhi'

'nahi sir...'

'saali dekha kar...jab apni gaanD tune bajaar mein utaar di hai to kuch skill to seekh...bahut kamaayegi agar meri baat maanegi to.'

'ok sir... main seekh lungi'

'abhi seekha kuch...'

'haan-haan bilkul.'

'chal phir choos mere lund ko...bilkul usi tarah jaise movie mein vo hapsi ka choos rahi hai'

ladki ne badi saavdhani se sanjay ke lund ko pakda aur jaise movie mein deekhaya tha vaise muh mein lene ki koshis ki.

'aaahhh..... tu to seekh gayi...pakki randi ban jaayegi tu aaj'

tabhi room ki bell baj uthi.

'kaun aa gaya is vakt...maine mana kiya tha ki disturb mat karna' sanjay badbadaaya.

"koi gadbad to nahi" ladki ne pucha.

"chinta mat kar, ye hotel bilkul safe hai...jaroor koi bevkoof waiter hoga...tu movie par dhyaan laga...main abhi aata hun"

vo darvaaja kholta hai lekin police ko vaha paakar uske pasine choot jaate hain.

"kya hua janaab...chehre ka rang kyon ud gaya hame dekh kar" inspector chauhan ne kaha.

"kya baat hai sir?"

"tumhaare saath aur kaun-kaun hai!" chauhan ne pucha.

"meri fiance hai saath mere"

"kya naam hai uska"

"ji muskaan"

"hmm muskaan, theek hai mujhe tumhaara room check karna hai" chauhan ne room mein ghuste hue kaha.

"par inspector saahab bataaye to sahi ki baat kya hai"

"thodi der mein sab pata chal jaayega jubaan band rakh" chauhan ne rob se kaha.

Inspector kamre mein aa gaya. ladki ne tab tak chehre par duppata lapet liya tha.

"hey ladki chehra deekha apna" chauhan ne pucha.

"kya baat hai sir!"

"shuna nahi...duppata hata muh se aur thobda deekha apna"

ladki ne duppata muh se hata liya.

"arey puja ji aap yaha...aap yaha kya kar rahi hain?"

"ji main apne fiance se milne aayii thi"

inspector ka maatha thanka. Usne laptop mein jhaank kar dekha. Usmein abhi bhi porn movie chal rahi thi. "hey tum mere saath baahar aao ek minat" chauhan ne sanjay se kaha.

"par baat kya hai inspector saahab" sanjay ne kaha

kamre se baahar aa kar chauhan ne kaha,"sach-sach bata kya rista hai tera is ladki se"

"sir...vo meri fiance hai"

"achcha kya karti hai teri fiance"

"vo b.a final mein hai"

"kaun se college mein"

"bhul gaya sir pata nahi"

"achcha...chal ye bata kaha rahti hai teri fiance address to pata hoga tujhe uska"

"aap ye sab kyon puch rahe hain"

tabhi chauhaan ne ek thappad rasid kar diya sanjay ke muh par. Thappad itni jor ka tha ki sanjay ka sar ghum gaya.

"ab sach bataata hai ya ke ek aur dun kaan ke niche"

"bataata hun-bataata hun sir...vo escort hai"

"kya kaha?" chauhan ko is sach ki ummeed nahi thi. Vo to soch raha tha ki unka koi illicit affaire hai.

"sach kah raha hun sir...vo ladki escort hai"

"tum kahaan se aaye ho"

"sir main delhi se aaya hun"

"kab aaye the yaha"

"main raat 12 baje aaya tha yaha"

"vijay..." chauhan ne vijay ko awaaj lagaayi jo ki kamre mein tha.

"ji sir" vijay fauran haajir ho gaya.

"ye ladki to vo nahi hai jiski hame talaas thi...kamra achche se check kiya aur koi to nahi hai ander" chauhaan ne kaha.

"nahi sir kamre mein aur koi nahi hai...haan par kamre mein bed ke takiye ke neeche se ye chaaku mila hai" vijay ne kaha.

"itne bade chaaku ko takiye ke neeche rakh kar kya kar rahe the tum"

"ji vo main...main" sanjay ne haklaate hue kaha.

"kya main-main laga rakha hai...kya matlab hai aisa chaku rakhne ka"

"sir mere grah-nakshatra khraab chal rahe hai usi ke upaaye ke liye main roj apne takiye ke neeche ye chaaku rakhta hun. Jyotisi ne bataaya tha."

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:50

बात एक रात की--9

गतान्क से आगे.................

"छोटे-मोटे चाकू से काम नही चलता था तुम्हारा जो इतना बड़ा चाकू रख लिया" चौहान ने कहा.

"सर मुझे यही पसंद आया...मैने रख लिया"

"ह्म्म....विजय एक मिनट इधर आओ" चौहान ने विजय को कहा.

"जी सर" विजय ने कहा.

"तुम इसे थाने ले जाओ और डरा धमका कर छोड़ देना. और हां 1 पेटी से कम मत लेना. ज़्यादा तीन-पाँच करे तो अंदर डाल देना" चौहान ने कहा.

"सर एक बात कहूँ अगर बुरा ना माने तो" विजय ने कहा.

"हां-हां बोलो"

"जिस कॉलेज गर्ल का कतल हुआ था उसकी फ़्रेंड है ना ये लड़की"

"हां ठीक कहा वही है ये...तुम इसे ले कर जाओ मैं यही रूम में रुकुंगा" चौहान ने कहा.

"जी सर समझ गया...सर सुंदर लड़की है... थोड़ा हमारा भी ध्यान...."

"पहले मुझे तो घोड़ी चढ़ने दे..."

"ओके सर समझ गया...मैं फ़ौरन इस लफंगे को लेकर थाने पहुँचता हूँ" विजय ने कहा.

"और हां...उस पद्‍मिनी का कुछ भी पता चले तो फ़ौरन मुझे फोन करना" चौहान ने कहा.

सब इनस्पेक्टर विजय को भेज कर इनस्पेक्टर चौहान वापिस कमरे में घुसता है और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लेता है.

“हां तो पूजा जी...क्या आप अब सच बताएँगी कि आप यहा क्या कर रही हैं,” चौहान ने रोब से पूछा.

“सर मैने बताया ना कि मैं अपने फियान्से से मिलने आई हूँ.”

“वो तो आपका नाम मुस्कान बता रहा था.”

“मुस्कान…नही नही आपको कोई ग़लत फ़हमी हुई है…मेरा नाम तो पूजा है आप भी जानते हैं.”

“ह्म्म हो सकता है कि ग़लतफहमी हुई हो.”

“जी बिल्कुल आप से सुन-ने में ग़लती लगी है.”

“वो तो ये भी कह रहा था कि तुम एस्कॉर्ट हो…”

“क्या…?” लड़की के चेहरे का रंग उड़ गया.

“हां-हां और उसने ये भी बताया कि उसने 50,000/- दिए हैं तुम्हे.”

“ये सब झूठ है.”

“पर्स दिखाओ अपना.”

“सर प्लीज़ मेरा यकीन कीजिए…आप तो जानते हैं ना कि मैं ऐसी लड़की नही हूँ.”

“तभी इतनी नर्मी से पेश आ रहा हूँ…वरना अब तक वो हो जाता यहा जो तुम सोच भी नही सकती…दीखाओ पर्स अपना”

“सर प्लीज़…ऐसा कुछ नही है जैसा आप सोच रहे हैं.”

चौहान ने उसके हाथ से पर्स छीन लिया और उसे खोल कर देखा. 50,000 की गद्दी बाहर निकाल कर बोला, “ये क्या है…एक दिन का किराया तुम्हारा.”

“सर मुझे छ्चोड़ दीजिए मैं अपनी ग़लती मानती हूँ.”

“मुझ से झूठ बोल कर कोई बच नही सकता. कब बनी तुम एस्कॉर्ट?”

“ये मेरा पहला असाइनमेंट था…अभी बस एक हफ़्ता पहले ही जाय्न किया था”

“कौन सी एस्कॉर्ट एजेन्सी में जाय्न किया तुमने?”

“मिस्टर कुमार इस एजेन्सी को चलाता है.”

“अच्छा मिस्टर कुमार…कमिने ने नयी चिड़िया भरती कर ली और हमे बताया भी नही.”

“सर…मैं अभी ये सब छ्चोड़ दूँगी प्लीज़ मुझे जाने दीजिए.”

“देखो हमारी रेजिस्ट्रेशन फीस तो तुम्हे देनी ही पड़ेगी.” चौहान ने कहा.

“मैं समझी नही सर.”

“देखो इस सहर में हर क्राइम करने वाले को पोलीस को रेजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है.”

“ठीक है…आप ये 50,000 रख लीजिए”

“हर जगह पैसा नही चलता पूजा जी”

“फिर और क्या दूं आपको.”

“कैसी बात करती हैं आप भी…इतना सुंदर मुखड़ा दिया है और इतना सुंदर शरीर दिया है भगवान ने आपको…ये कब काम आएगा”

“सर मैं ये काम आज ही अभी से छ्चोड़ रही हूँ. वैसे भी मैं अपनी ख़ुसी से नही आई थी इस लाइन में.”

“वो सब मुझे नही पता…तुमने कदम तो रखा है ना इस लाइन में फीस तो लगेगी ही. और अगर फीस नही देना चाहती तो जैल जाकर चक्की पीसो…चाय्स तुम्हारी है…मैं तुम्हे मजबूर नही करूँगा”

“क्या करना होगा मुझे?”

“उस नालयक के साथ जो करने वाली थी वही हमारे साथ करो”

“ ठीक है सर…उसके बाद तो मुझे छ्चोड़ देंगे ना आप?”

“हां-हां अगर तुम इस लाइन में आज के बाद नही रहोगी तो तुम्हे कोई परेशान नही करेगा. वैसे मैं यहा पद्‍मिनी की तलाश में आया था.”

“कौन पद्‍मिनी?”

“वही जिसने तुम्हारी फ्रेंड को मारा था.”

“क्या?...तो क्या सीरियल किल्लर एक लड़की है.”

“हां…वैसे तुमने इंक्वाइरी में कोई ज़्यादा सपोर्ट नही किया था. ”

“सर…मुझे जितना पता था…मैने बता दिया था.”

“दरवाजा पटक दिया था आपने मेरे मूह पर…ये कह कर कि मुझे परेशान मत करो में कुछ और नही जानती”

“सर उस वक्त…बार-बार मुझसे सवाल किए जा रहे थे…मैं परेशान हो चुकी थी.”

“वैसे तुमने तो किसी आदमी का जिकर किया था, लेकिन कातिल तो एक लड़की निकली”

“मैं और रागिनी जब सिनिमा से निकले तो कोई आदमी हमारा लगातार पीछा कर रहा था…मैने उसकी शकल भी देखी थी. अगले दिन रागिनी का खून हो गया. इतना ही मैं जानती थी और ये सब मैने पोलीस को बता दिया था…इस से ज़्यादा और क्या बताती मैं.”

“हो सकता है वही आदमी नकाब पोश हो, क्या तुम्हे अभी भी याद है उसका चेहरा?”

“अब तो वो शकल मेमोरी में धुंधली हो चुकी है. वैसे भी शाम का वक्त था उस वक्त. वो आदमी सामने आए तो शायद पहचान लू. वैसे ये नकाब पोश कौन है?”

तभी अच्छानक चौहान का फोन बज उठा. “न्यूज़ नही देखती क्या…एक मिनट…किसका फोन है?” चौहान ने पॅंट की जेब से फोन निकालते हुए कहा.

चौहान ने फोन उठाया और बोला, “परवीन कहा है तू यार…काईं बार फोन किया…उठाता ही नही है”

परवीन चौहान का कॉलेज के दिनो का दोस्त था.

“यार फोन दराज में पड़ा था…सुनाई नही दिया.” परवीन ने कहा.

“पर तू तो घर पर भी नही था…रात 2 बजे निकला था मैं तेरे घर के आगे से…कहा था तू इतनी रात को.”

“वो यार रात ज़्यादा पी ली थी…बार में ही पड़ा रहा. अभी घर आया हूँ.”

“तुझे डर नही लगता सहर में सीरियल किल्लर घूम रहा है.”

“तेरे रहते मुझे किस बात का डर दोस्त”

“वो तो ठीक है…एक बात सुन बर्तडे बॉय…तेरे लिए बहुत सुंदर तौफा है मेरे पास.”

“क्या बात कर रहा है…कैसा तोहफा है?”

“तू ऐसा कर अपने फार्म हाउस पे पहुँच बहुत दिन हो गये साथ में मस्ती किए आज हो ही जाए.”

“अच्छा समझ गया ये तोहफा है…कॉलेज के दिनो की यादे ताज़ा करना चाहता है हूँ”

“ये ही समझ ले…तेरा जनम दिन भी है…ऐसा कर तू फार्म हाउस पहुँच और हरी-हरी घास में खुले आसमान के नीचे अच्छा इंटेज़ाम कर”

“ये सब खुले में करेगा तू.”

“तो क्या हुआ…तेरे नौकर रामू के अलावा वाहा और कौन होगा. खूब मस्ती करेंगे…अब देर मत कर जल्दी पहुँच.”

“ठीक है…मैं अभी के अभी निकलता हूँ.”

“ठीक है मैं भी निकल ही रहा हूँ.”

फोन कॉन्वर्सेशन ख़तम हो जाती है.

“सर मैं चालू फिर…आप तो बर्तडे मनाने जा रहे हैं”

“नही मेरे दोस्त की बर्तडे पार्टी में तुम भी शामिल होगी…चलो”

जब पूजा को इनस्पेक्टर की बात समझ में आई तो उसके रोंगटे खड़े हो गये. “हे भगवान कहा फँस गयी मैं…अब क्या करूँ?” पूजा ने खुद से कहा.

कुछ ही देर में इनस्पेक्टर अपनी जीप में पूजा को बीठा कर परवीन के फार्म हाउस की तरफ बढ़ रहा था.

“सर में बर्तडे पार्टी में क्या करूँगी…प्लीज़ मुझे जाने दीजिए” पूजा गिदगड़ाई.

“पार्टी में हसीन लोग साथ हो तो रोनक बढ़ जाती है…तुम चिंता मत करो खूब एंजाय करोगी तुम.”

“सर प्लीज़ मुझे जाने दीजिए…मैं एस्कॉर्ट एजेन्सी से आज ही नाता तौड लूँगी…”

“पूजा जी घबराओ मत…जन्नत दीखाएगे हम आपको आज…आप बेवजह परेशान हो रही हैं.” चौहान ने कहा और एक विकेड स्माइल उसके चेहरे पर उभर आई.

“मेरी एक ग़लती की इतनी बड़ी सज़ा…कहा तक जायज़ है.”

“अब शैतानी कीजिएगा तो सज़ा तो मिलेगी ना…वैसे हम सच कह रहे है…जन्नत की सैर कराएँगे आपको…आप बस अपने दिल से डर को दूर भगा दीजिए...वैसे एक बात बताओ…क्यों बनी तुम एस्कॉर्ट ?”

“इस सब के लिए मेरा बॉय फ्रेंड ज़िम्मेदार है.”

“वो कैसे?”

“मैं उसे प्यार करती थी…अँधा प्यार और उसने मेरी वीडियोज बना ली. मुझे कभी शक नही हुआ. हर मुलाकात की चुपचाप रेकॉर्डिंग की उसने.”

“तो ये ब्लॅकमेलिंग का मामला है”

“हां उसने मुझे ज़बरदस्ती एस्कॉर्ट बनाया. अब मुझे पता चला कि मिस्टर कुमार का पार्ट्नर है वो.”

“ह्म्म इंट्रेस्टिंग स्टोरी है”

“ये स्टोरी नही हक़ीकत है…मेरे जैसे हज़ारो शायद यू ही बर्बाद हुई होंगी.”

“छोड़ो ये सब जो होना था हो गया…”

“ये सब सुन-ने के बाद भी आप मुझे पार्टी में ले जाएँगे.”

“बिल्कुल…घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खाएगा क्या…हां तेरे बॉय फ्रेंड को सीधा करने की ज़िम्मेदारी मेरी” चौहान ने घिनोनी हँसी के साथ कहा.

“शुक्र है कुछ तो राहत मिली मुझे. उसो तो मैं जैल में देखना चाहती हूँ.”

“सब हो जाएगा पूजा जी…आप बस मुझे खुस कर दो.”

“ये ख़ुसी मुझे रोज तो नही देनी होगी ना?”

“अगर लत पड़ गयी तुम्हारी तो कह नही सकता…वैसे मैं रोज नया शिकार पसंद करता हूँ. अपनी नौकरी भी कुछ ऐसी है…नया-नया माल मिलता रहता है.”

कुछ ही देर में जीप सुनसान सड़क पर आ गयी.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--9

gataank se aage.................

"chote-mote chaaku se kaam nahi chalta tha tumhaara jo itna bada chaaku rakh liya" chauhan ne kaha.

"sir mujhe yahi pasand aaya...maine rakh liya"

"hmm....vijay ek minat idhar aao" chauhaan ne vijay ko kaha.

"ji sir" vijay ne kaha.

"tum ise thaane le jao aur dara dhamka kar chod dena. Aur haan 1 peti se kam mat lena. Jyada teen-paanch kare to ander daal dena" chauhan ne kaha.

"sir ek baat kahun agar bura na maane to" vijay ne kaha.

"haan-haan bolo"

"jis college girl ka katal hua tha uski freind hai na ye ladki"

"haan theek kaha vahi hai ye...tum ise le kar jao main yahi room mein rukunga" chauhan ne kaha.

"ji sir samajh gaya...sir sunder ladki hai... thoda hamaara bhi dhyaan...."

"pahle mujhe to ghodi chadne de..."

"ok sir samajh gaya...main fauran is lafange ko lekar thaane pahunchta hun" vijay ne kaha.

"aur haan...us padmini ka kuch bhi pata chale to fauran mujhe phone karna" chauhan ne kaha.

Sab inspector vijay ko bhaej kar inspector chauhan vaapis kamre mein ghusta hai aur kamre ka darbvaaja ander se band kar leta hai.

“haan to puja ji...kya aap ab sach bataayengi ki aap yaha kya kar rahi hain,” chauhan ne rob se pucha.

“sir maine bataaya na ki main apne fiance se milne aayi hun.”

“vo to aapka naam muskaan bata raha tha.”

“muskaan…nahi nahi aapko koi galat fahmi huyi hai…mera naam to puja hai aap bhi jaante hain.”

“hmm ho sakta hai ki galatfahmi huyi ho.”

“ji bilkul aap se sun-ne mein galti lagi hai.”

“vo to ye bhi kah raha tha ki tum escort ho…”

“kya…?” ladki ke chehre ka rang ud gaya.

“haan-haan aur usne ye bhi bataaya ki usne 50,000/- diye hain tumhe.”

“ye sab jhut hai.”

“purse dikhaao apna.”

“sir please mera yakin kijiye…aap to jaante hain na ki main aisi ladki nahi hun.”

“tabhi itni narmi se pesh aa raha hun…varna ab tak vo ho jaata yaha jo tum soch bhi nahi sakti…deekhaao purse apna”

“sir please…aisa kuch nahi hai jaisa aap soch rahe hain.”

Chauhan ne uske haath se purse cheen liya aur use khol kar dekha. 50,000 ki gaddi baahar nikaal kar bola, “ye kya hai…ek din ka kiraya tumhaara.”

“sir mujhe chhod dijiye main apni galti maanti hun.”

“mujh se jhut bol kar koi bach nahi sakta. Kab bani tum escort?”

“ye mera pahla assignment tha…abhi bas ek hafta pehle hi join kiya tha”

“kaun si escort agency mein join kiya tumne?”

“mr kumar is agency ko chalaata hai.”

“achcha mr kumar…kamine ne nayi chidiya bharti kar li aur hame bataaya bhi nahi.”

“sir…main abhi ye sab chhod dungi please mujhe jaane dijiye.”

“dekho hamaari registration fees to tumhe deni hi padegi.” Chauhan ne kaha.

“main samjhi nahi sir.”

“dekho is sahar mein har crime karne wale ko police ko registration fees deni hoti hai.”

“theek hai…aap ye 50,000 rakh lijiye”

“har jagah paisa nahi chalta puja ji”

“phir aur kya dun aapko.”

“kaisi baat karti hain aap bhi…itna shunder mukhda diya hai aur itna shunder sharir diya hai bhagvaan ne aapko…ye kab kaam aayega”

“sir main ye kaam aaj hi abhi se chhod rahi hun. Vaise bhi main apni khusi se nahi aayi thi is line mein.”

“vo sab mujhe nahi pata…tumne kadam to rakha hai na is line mein fees to lagegi hi. Aur agar fees nahi dena chaahti to jail jaakaer chakki piso…choice tumhaari hai…main tumhe majboor nahi karunga”

“kya karna hoga mujhe?”

“us naalayak ke saath jo karne wali thi vahi hamaare saath karo”

“ theek hai sir…uske baad to mujhe chhod denge na aap?”

“haan-haan agar tum is line mein aaj ke baad nahi rahogi to tumhe koi pareshaan nahi karega. Vaise main yaha padmini ki talaash mein aaya tha.”

“kaun padmini?”

“vahi jisne tumhaari friend ko maara tha.”

“kya?...to kya serial killer ek ladki hai.”

“haan…vaise tumne inquiry mein koi jyada support nahi kiya tha. ”

“sir…mujhe jitna pata tha…maine bata diya tha.”

“darvaaja patak diya tha aapne mere muh par…ye kah kar ki mujhe pareshaan mat karo mein kuch aur nahi jaanti”

“sir us vakt…baar-baar mujhse sawaal kiye ja rahe the…main pareshaan ho chuki thi.”

“vaise tumne to kisi aadmi ka jikar kiya tha, lekin kaatil to ek ladki nikli”

“main aur raagini jab cinema se nikle to koi aadmi hamaara lagaatar peecha kar raha tha…maine uski shakal bhi dekhi thi. Agle din raagini ka khun ho gaya. Itna hi main jaanti thi aur ye sab maine police ko bata diya tha…is se jyada aur kya bataati main.”

“ho sakta hai vahi aadmi nakaab posh ho, kya tumhe abhi bhi yaad hai uska chehra?”

“Ab to vo shakal memory mein dhundhali ho chuki hai. Vaise bhi shaam ka vakt tha us vakt. Vo aadmi saamne aaye to shaayad pahchaan lu. Vaise ye nakaab posh kaun hai?”

Tabhi achchaanak chauhan ka phone baj utha. “news nahi dekhti kya…ek minat…kiska phone hai?” chauhan ne pant ki jeb se phone nikaalte hue kaha.

Chauhan ne phone uthaaya aur bola, “parveen kaha hai tu yaar…Kayin baar phone kiya…uthaata hi nahi hai”

Parveen chauhan ka college ke dino ka dost tha.

“yaar phone daraaj mein pada tha…sunaayi nahi diya.” Parveen ne kaha.

“par tu to ghar par bhi nahi tha…raat 2 baje nikla tha main tere ghar ke aage se…kaha tha tu itni raat ko.”

“vo yaar raat jyada pi li thi…bar mein hi pada raha. Abhi ghar aaya hun.”

“tujhe dar nahi lagta sahar mein serial killer ghum raha hai.”

“tere rahte mujhe kis baat ka dar dost”

“vo to dheek hai…ek baat shun birthday boy…tere liye bahut shunder taufa hai mere paas.”

“kya baat kar raha hai…kaisa tohfa hai?”

“tu aisa kar apne farm house pe pahunch bahut din ho gaye saath mein masti kiye aaj ho hi jaaye.”

“achcha samajh gaya ye tohfa hai…college ke dino ki yaade taaja karna chaahta hai hun”

“ye hi samajh le…tera janam din bhi hai…aisa kar tu farm house pahunch aur hari-hari ghaas mein khule aasmaan ke niche achcha intezaam kar”

“ye sab khule mein karega tu.”

“to kya hua…tere naukar ramu ke alaawa vaha aur kaun hoga. Khub masti karenge…ab der mat kar jaldi pahunch.”

“theek hai…main abhi ke abhi nikalta hun.”

“theek hai main bhi nikal hi raha hun.”

Phone conversation khatam ho jaati hai.

“sir main chalu phir…aap to birthday manaane ja rahe hain”

“nahi mere dost ki birthday party mein tum bhi shaamil hogi…chalo”

Jab puja ko inspector ki baat samajh mein aayi to uske rongte khade ho gaye. “hey bhagwaan kaha phans gayi main…ab kya karun?” puja ne khud se kaha.

Kuch hi der mein inspector apni jeep mein puja ko bitha kar parveen ke farm house ki taraf badh raha tha.

“sir mein birthday party mein kya karungi…please mujhe jaane dijiye” puja gidgadaayi.

“party mein hasin log saath ho to ronak badh jaati hai…tum chinta mat karo khub enjoy karogi tum.”

“sir please mujhe jaane dijiye…main escort agency se aaj hi naata taud lungi…”

“puja ji ghabraao mat…jannat deekhaayege hum aapko aaj…aap bevajah pareshaan ho rahi hain.” Chauhan ne kaha aur ek wicked smile uske chehre par ubhar aayi.

“meri ek ghalti ki itni badi saja…kaha tak jaayaj hai.”

“ab shaitaani kijiyega to saja to milegi na…vaise hum sach kah rahe hai…jannat ki sair karaayenge aapko…aap bas apne dil se dar ko dur bhaga dijiye...vaise ek baat bataao…kyon bani tum escort ?”

“is sab ke liye mera boy friend jimmedar hai.”

“vo kaise?”

“main use pyar karti thi…andha pyar aur usne meri videos bana li. Mujhe kabhi shak nahi hua. Har mulaakat ki chupchaap recording ki uhne.”

“to ye blackmailing ka maamla hai”

“haan usne mujhe jabardasti escort banaaya. Ab mujhe pata chala ki mr kumar ka partner hai vo.”

“hmm interesting story hai”

“ye story nahi hakeekat hai…mere jaise hajaaro shaayad yu hi barbaad huyi hongi.”

“chodo ye sab jo hona tha ho gaya…”

“ye sab sun-ne ke baad bhi aap mujhe party mein le jaayenge.”

“bilkul…ghoda ghaas se dosti karega to khaayega kya…haan tere boy friend ko seedha karne ki jimmedaari meri” Chauhan ne ghinoni hansi ke saath kaha.

“sukar hai kuch to raahat mili mujhe. Uso to main jail mein dekhna chaahti hun.”

“sab ho jaayega puja ji…aap bas mujhe khus kar do.”

“ye khusi mujhe roj to nahi deni hogi na?”

“agar lat pad gayi tumhaari to kah nahi sakta…vaise main roj naya shikaar pasand karta hun. Apni naukri bhi kuch aisi hai…naya-naya maal milta rahta hai.”

Kuch hi der mein jeep shunsaan sadak par aa gayi.

Kramashah..............................