अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

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Re: अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

Unread post by The Romantic » 13 Dec 2014 04:52

अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता - 03
संगीता की गंद पे अपना तगड़ा लंड और ज़ोर्से रगड़ते अफ़रोज़ बोला,"यह तू ही बता संगीता की तू कैसे तारे प्यार का इज़हार करेगि.ख्य मैने तारे जिस्म से खेलने के फेल तेरी पर्मिशन ली थी?अब जैसे मै तारे जिस्म के साथ खेकले मेरा तुझे कितना प्यार है यह दिखा रहा हून वैसे अब तू बता तू मुझे कितना प्यार करती है." अफ़रोज़ के दिल मै यह बात आए की 'साली आगर तू मेरा लंड मूह मै लेगी तो मै समझुगा की तू अब मुझे पसंद करने लगी है मेरी कमसिन छीनाल.'संगीता अब मोटे लंड के टच और निपल के दबने से बहुत मचलती है****की हालत बहुत ही खराब हो रही है.शन्गित बहुत मचल रही है और उससे बहुत बेचैनी हो रही है.Wओह सिसकारिया भरते बोली,"क्या करू अफ़रोज़ जिससे तुमको भरोशा हो जाए की मेरा भी तुमपे कितना प्यार है?अफ़रोज़ उम्म मात करो ना श कोई आज्एगा ना प्ल्ीएआआसस्स्सीईई."यह बात सुनके अफ़रोज़ संगीता की पनटी थोड़ी नीचे करते अपनी ज़िप खोलके लंड बहार निकलते उससे संगीता की कमसिन गंद पे रखक्के आहिस्ता-आहिस्ता रगड़ते उसके मम्मे ज़्यादा ज़ोर्से दबाते बोला,"सुनो मेरी संगीता रानी,अगर मै काहु की तू मेरा यह एक बार चूस(यह कहते अफ़रोज़ संगीता का हाथ अपने नंगे लंड पे ले जाता है)तो क्या मेरा यह चुस्के भरोसा दिलाएगी की तू मुझसे कितना प्यार करती है?बोल कविता क्या जवाब है तेरा?"पहले पंत के आंदार से रग़ाद रहे लंड का टच संगीता को बहाल बना चुका था और अब अफ़रोज़ के नंगे लंड को चूके जिसे उसके हाथ गर्म लोहा लगा हो वैसे संगीता हाथ हटती है.ळेकिन पहले बार नंगे लंड को टच करना उससे अक्चा भी लगता है****से अब जिस्म को अफ़रोज़ से मसल लाने मै और माज़ा आ रहा था पर क़िस्सी के आने का डर भी थ.आफ्रोz के लंड से हाथ हटते अपना स्कर्ट नीचे करते बहुत डारते बोली, "अफ़रोज़ मै बोल रही हून ना की ई लोवे उ.Mऐ तुमसे बहुत प्यार करती हून.टुम्को किस भी करूँगी,अब मुझे जाने दो.डेखो यह आइसे मुझे नंगी मत करो और वो मारे हाथ मै मत दो.Pलेअसे होश मै आ जाओ अफ़रोज़."अफ़रोज़ संगीता को अब झुकना चाहता था****से अपना लंड एक बार तो संगीता से आज किस करके लेना ही थ.शन्गित का हाथ दुबारा अपना लंड पे रखते अफ़रोज़ बोला,"हन किस कर पर जान तुझे हाथ रखा है उसको किस करके मुझपे तेरा कितना प्यार है इसका सबूत दो,डोगी मारे उसको एक किस संगीता रानी?दिखा देगी ना तारे दिल मै कितना प्यार है मारे लिए वो किस करके?"संगीता कैसे भी होके अपने आप को अफ़रोज़ के हाथ से चुराते स्कर्ट ठीक करती है.आफ्रोz का नंगा लंड उसके सामने थ.आफ्रोz अपना लंड सहलाते उससे देख रहा थँअzअर लंड पे रखते संगीता अपने मम्मे ब्रा मै डालके अफ़रोज़ का हाथ पकड़ते उसका गाल किस करते बोली,"देख अफ़रोज़ मैने अब तुझे किस भी दिया अब मुझे जाने दे प्लेअसे.Mऐ तुझे कल मिलने ज़रूर आयूंगी पर अब मुझे जाने दे."अफ़रोज़ ने फिर संगीता के मम्मे ब्रा से बाहर निकलते उससे नीचे बिताया और अपना लंड उसके चहेरे पे घूमते ज़रा रौब से बोला,"संगीता अगर तू मुझसे सूचा प्यार करती है तो मेरा लंड चूस रनि.आअज मेरा लंड चुस्के मुझे अहसास दिला की तू मुझे सच मै प्यार करती हैऑहल मूह खोल और मेरा चूसने लग जाओ."चहेरे पे घूम रहे लंड को देखके संगीता अंदर ही अंदर मचलती है. उससे बहुत मज़ा आरहा है इस नये फीलिंग से.Wओह अपना चहेरे पीछे लिए बिना एक बार लंड को किस करके बोली,"अफ़रोज़ यह क्या हुआ है तुझे?आइसे कैसे बिहेव कर रहा है?क्यों नंगा होके यह मारे मूह पे घुमा रहा है?देख अब मैने किस किया ना इससे अब मुझे जाने दे ना,देख कोई आएगा प्लीज़ अब जाने दे मुझे."अफ़रोज़ किस से खुश होके अब थोड़ी जबरदस्त करते लंड संगीता के मूह पे दबाता है.ळुन्द का प्रेकुं संगीता के होतो पे लगता है.शन्गित की गर्दन पकड़के लंड उसके होतो पे रगड़ते उसके नंगी मम्मे मसालते अफ़रोज़ बोला, "आरे रानी सिर्फ़ किस नही,मेरा पोरा लंड मूह मै लेक चुसेगी तो ही तुझे यहा से जाने दुन्ग.शन्गित अब कौन आएगा यहा अब इतने अंधेरे मैऑहलो लेलो मेरा लंड एक बार मूह मै तो जाने दूँगा तुझे मेरी रानी,लेकिन पहले एक बार मेरा लंड चूस."संगीता अब अफ़रोज़ का लंड हाथ मै पकड़के उससे देख रही थि.वोह अब एकद्ूम गर्म हुई थी और उससे यह पता थी की अब अफ़रोज़ छोड़ना भी चाहे तो वो छुड़वा के लेगि.ःओथो पे लगे लंड का प्रेकुं झेब से चटके वो बोली,"आ नही अफ़रोज़ यह तुम क्या कर रहे हो?तुमको भरोसा क्यों नही है?मेने कहा ना मै तुमसे प्यार करती हू फिर मुझे ये करने के लिए बोलके परेशन क्यो करते हो?उउंम नही दूर रहो प्लेअसे.Yएह अब नही कर सकती मै."अफ़रोज़ संगीता की कोई बात माने बिना अब संगीता का मूह खोलके लंड मूह मै डालते सोचा की यह साली छीनाल बहनचोड़ ज़्यादा नखरे करने लगी है साली रंडी. आज तो इससे लंड चुस्वके लूँगा ही. अपना लंड मूह मै दबाते अफ़रोज़ बोला, "हन संगीता,मै जानती हून तू मुझे प्यार करती है लेकिन तू मेरा लंड चूस के मुझे उसका यकीन दिला मेरी रनि.डेख अब लंड मूह मै घुस तो गया है, अब चूस मेरा लॉडा मेरी जान."संगीता लंड मूह से निकलते शर्माके बोली,"उम्म नही,अफ़रोज़ यह मुझे गंदा लग रहा है,मुझे शर्म भी आती है.Yएह काम मुझसे मत कारवओ." लंड मूह पे दबाते संगीता के मम्मे दबके उससे और गर्म करते अफ़रोज़ बोला, "आरे अब शरम कैसे संगीता?तू मेरी बीवी बननेवाली है ना रानी,अपने होने वेल पति का लंड चूसने मै कैसे शर्म?चल मूह खोलके मेरा लॉडा चूस." संगीता अपना मम्मे मसलवाने से और भी मचलती है,पर मूह बंद करके लंड घुसने नही देति.शन्गित की इस हरकत से अफ़रोज़ को गुस्सा आता है और वो संगीता के दोनो निपल्स ज़ोर्से पिंच करते बोला,"ले रानी और अंदर ले मारे मुसलमानी लॉडा,देखो अब अगर तूने मेरा लंड नही चूसा तो मै तुझे पूरी नंगी करके अभी यही छोड़ूँगा." संगीता दर्द से हल्के से चिल्लती हैऑहुदै की बात सुनके वो डार्ती है और अफ़रोज़ को उससे जाने दाने बोलती है.आफ्रोz अब लंड फिरसे संगीता के मूह मै डालते,निपल से खेलते बोला,"हन चूर दूँगा संगीता, लेकिन मेरा लंड चूसने के बाद."और कोई रास्ता नही यह देखके आख़िर मै संगीता मूह खोलके अफ़रोज़ का लंड मूह मै लेती है.आफ्रोz का गर्म सकता लंड उसके मूह मै घुसता है****की टेस्ट ज़रा खराब लगती है पर अब चूसने के बिना उसके पास कोई रास्ता नही थ.आफ्रोz संगीता का सिर पकड़के लंड उसके मूह मै डालते बोला,"चूस मेरा लंड मेरी रानी,कितना गर्म मूह है तेरा,एकद्ूम तारे जिस्म जैस.आcचे से मेरा लॉडा चूस के तू अपने प्यार का भरोसा दिला मुझे.खैसे है मेरा लॉडा संगीता?" अफ़रोज़ संगीता के छोटे-छोटे मम्मे ज़ोर्से दबा रहा था. संगीता के मूह मै बहुत दर्द होता है.ळुन्द बहुत मोटा और लंबा था****से लगा की लंड और मूह मै गया तो मूह फाट जाएगा. जब अफ़रोज़ उसके मम्मे दबाते है तब संगीता उचक जाती है और लंड अcचे से चूसने लगती है


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Re: अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

Unread post by The Romantic » 13 Dec 2014 04:53

अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता--04

संगीता का मूह हल्के-हल्के चोद्ते अफ़रोज़ बोला,"अफ साली क्या मस्त चुस्ती है तू संगीता,और अन्दर लेके चूस मेरा लंड मेरी रानी." अपना लंड संगीता के मूह मई घूमाते अफ़रोज़ आगे बोला,"संगीता कैसा है मेरा लंड बताओ?"संगीता बिना बोले लंड चूसने लगती है.लंड चूसने से उसका मूह दुखने लगता है.लंड से ज़रा पानी निकलके उसके मूह मई गिरता है तो वो लंड मुहसे निकाल ने की कोशिश करती.लेकिन अफ़रोज़ उससे लंड निकालने नही देता उल्टा उसके माममे दबाते लंड उसके मूह मई घुसता है.संगीता का सिर पकड़के उसका मूह ज़ोर्से चोदने लगता है.अफ़रोज़ अब ज़ड़नेवाला है इसलिए संगीता के मूह मई ज़ड़ना चाहता है.कासके सिर पकड़ते अफोर्ज़ बोला,"ले और चूस मेरा लंड संगीता,तेरे मूह की गर्मी इससे पागल बना रही है मेरी रानी.और मस्ती से चूस मेरा लॉडा संगीता."संगीता अब जी-जान से अफ़रोज़ के हाथ से छूटने की कोशिश करती है.इतना लंड घुसने से उसका मूह फाट रहा था और उससे बहुत दर्द होता है.पर अफ़रोज़ बेरहम बनके उससे छूटने नही देता उल्टा उससे और कासके पकड़के उसका मूह और जल्दी-जल्दी चोदने लगता है****का लंड जब पानी छोड़ने लगता है वैसे अफ़रोज़ पूरा लंड संगीता के मूह मई घुसके अपनी गंद आगे पीछे करते संगीता के मूह मई ज़दते बोला,"उफफफ्फ़ आआअहह संगित्त्ताआ ले ले मेरा पानी ले साली.साली तारे गर्म मूह ने बड़ी जल्दी मारे लंड को ज़ड़वा दिया संगीता. तेरा मूह इतना गर्म है तो चूत कैसे होगी रानी?" ज़िंदगी मई पहले बार मूह मई लंड के ज़दने के बाद संगीता लंड मुहसे निकलती है.मूह से काफ़ी पानी संगीता के नंगे सिने पे गिरता है.मूह मई जितना पानी था उससे बाजू मई ठूकते बोली, "उम्म्म्म उफफफफ्फ़ ओह,अफ़रोज़ यह क्या किया तुमने?मारे मूह मई यह पानी कैसे आया?क्या तूने पिशब की मारे मूह मई?श्िीिइ, कितना गंदा लग रहा है मुझे." संगीता बार-बार ठूकते सब पानी मूह से निकालने लगती है.सीना पे गिरा पानी संगीता के मम्मो पे रगड़ते अफ़रोज़ बोला,"संगीता,यह पिशब नही,मेरा पानी है,आज यह पानी तारे मूह मई डाला है,जब तेरी चूत मई डालूँगा तब तू मारे बcचे पैदा करेगी." अफ़रोज़ का हाथ सिने से हटाने की कोशिश करते संगीता ज़रा गुस्से से बोली,"श अफ़रोज़ मुझे छोड़ो मुझे.तुम बहुत गंदे हो." अफ़रोज़ संगीता को नही छोड़ता उल्टा लंड संगीता के मम्मो पे घूमते बोला,"क्यों गंदा हून मई?आइसा क्या किया मैने रानी?" संगीता अभी भी बहुत गर्म है पेर शर्मा रही है.वो अफ़रोज़ से नज़र भी नही मिला पा रही थी.अपने सिने पे हाथ रखते वो शरमाते बोली,"और नही तो क्या?देखो तुमने मुझे गांडा कर दिया.अफ देखो क्या किया है तूने मारे सिने पे पानी डालके."संगीता के हाथ उसके ही माममे पे दबाते और अपना लंड फिर संगीता के चहेरे पे घूमते अफ़रोज़ अब प्यार से बोला,"क्या गंदा किया मैने संगीता?आरे तारे सिने पे तो मैने तो अपने प्यार की निशानी दी है.देखो इसमे गांडा कुछ नही,सब पति पत्नी आइसे ही करते है समझी मेरी रानी?" दिल मई तो संगीता को खूब गल्लिया डटे अफ़रोज़ सोचा की साली रांड़ कल तुझे देख कैसे छोड़ूँगा, छीनाल मुझे बहुत तडपया है तूने.'संगीता ज़रा नाराज़ी से बोली,"अफ़रोज़ यह सब मुझे अछा नही लगा.मुझसे आजके बाद ऐसा मॅट करना कभी ठीक है?" अफ़रोज़ भी प्यार से बोला,"ओक मेरी रानी नही करूँगा,ठीक है?पर मुझसे मिलने तो आओगी ना कल मारे घर?" संगीता हॅंकी से अपना नंगा सीना अफ़रोज़ के सामने सॉफ करने लगती है.सीना सब जगह चिप छिपा हुआ था उसका पर अफ़रोज़ की हरकत सोचके उससे अक्चा भी लग रहा था. वो ज़रा नाराज़ी से बोली,"अब नही आयूंगी अफ़रोज़ तुमसे अकेली मिलने.तुम बहुत गंदे हो,कुछ भी कही भी कर डालते हो मारे साथ." अफ़रोज़ संगीता की हॅंकी खिचके दूर फेकटे उसके माममे सहलाते बोला, "आगर तू नही आयागी तो तुझे अभी जाने ही नही दूँगा समझी संगीता?रातभर तुझे यही रुकके रखते खूब मस्ती करूँगा तारे जिस्म से,बोल आएगी ना?" संगीता को अफ़रोज़ से मसलके लाने फिर अछा लगता है.अफ़रोज़ अब उसके निपल चोस्टे उसकी चूत सहलाता है. संगीता अफ़रोज़ के हाथ का खिलोना बनते जिस्म अब फिर से उसके हवाले करते बोली,"अफ़रोज़ मुझे जाने दो प्लीज़,ऐसा मॅट करो.उम्म नही अफ़रोज़ तुम मेरे साथ ये गंदा करते हो ना इसलिए मई नही आयूंगी.मुझे नही पता था तुम ऐसा करोगे नही तो मई तुमसे कभी बात नही करती." इस बात पे गुस्सा होते अफ़रोज़ संगीता की पनटी मई हाथ डालके उसकी छूट सहलाते माममे बेरहमसी से मसालते और उससे किस करते बोला,"ठीक है मत आना,लेकिन अब मई तुझे जाने ही नही दूँगा तो क्या करेगी?बोलो आओगी या नही संगीता मुझसे मिलने कल मारे घर?"अपने जिस्म से हो रही मस्ती संगीता को बहुत आक्ची लग रही थी.वो 'ना-ना' करते खेल का माज़ा ले रही थी.10 मिनिट अपना जिस्म ऐसे ही मसालते लाने के बाद संगीता अफ़रोज़ के इस खेल के सामने हारके हल्की आवाज़ मई बोली,"ह हाआँ आज़ौंगी,प्लीज़ मुझे छोड़ो,आह उहीई.अब बस करो अफ़रोज़,मई कल आयूंगी बोला ना?अब मेरा जिस्म और मॅट मस्लो." संगीता के पुर जिस्म से खेलते अफ़रोज़ बोला,"तू क्या बोली,मुझे कुछ समझा नही,ज़रा ठीक से उँची आवाज़ मई बताओ मुझे संगीता रानी." संगीता को अब बहुत मज़ा आता है और दर्द भी होता है अफ़रोज़ के मसालने से पर वो बोली,"अफ़रोज़ तुमसे मई कल मिलूंगे तारे घर आके.उूुउउफ़फ्फ़ अहह मुझे छोड़ो ना अब अफ़रोज़,दर्द हो रहा है अब."आख़िर मई संगीता की बात मनके अफ़रोज़ उससे छोड़ता है.संगीता अपना माममे ब्रा मई भरके,शर्ट के बटन लगती है.अपना हुलिया ठीक करके जैसे वो जाने लगती है अफ़रोज़ उससे पकड़के किस करके और उसके माममे मसलके कल दोपहर को मिलने का वादा लेता है.संगीता को भी यह खेल का और मज़ा लेना था इसलिए उससे कसम खाए की वो कल ज़रूर आयगी और फिर अपने घर गये.संगीता उस रात सो ना सकी.अपना जिस्म से उससे अजीब से फीलिंग आ रही थी.मर्द का स्पर्श इतना अछा हो सकता है यह उससे पता नही था.वो खुद अपना जिस्म मसलके ले रही थी अपने हाथो.अफ़रोज़ का अपने माममे और चूत का मसलना, गांद पे लंड रगड़ना और फिर उसका लंड चूसना अभी भी बड़ा याद आ रहा था.बिस्तर पे लाते के वो यह सब सोच रही थी की कल अफ़रोज़ और क्या-क्या करेगा उसके जिस्म के साथ.वाहा अफ़रोज़ भी कमसिन संगीता के बारे मई सोचके लंड मसल रहा था****ने ठन ली की कल वो संगीता को चोद्के ही रखेगा.जिस हिसाब से आज उसने लंड चूसना था अफ़रोज़ समझ गया की ज़रसा प्रेशर डालने से संगीता कोई भी बात मान लेती है****ने टाई किया की कल वो संगीता को डॉमिनेट करके उसके चूत चोद्के रखेगा.दूसरे दिन अफ़रोज़ सिर्फ़ लूँगी और शर्ट मई बैठा था जब संगीता आए.दरवाज़ा खुला ही था और वो घर मई आए.जैसे संगीता आंदार आए अफ़रोज़ ने डोर बंद करके उससे गौर से देखा****के बताने के मुताबिक संगीता ने शॉर्ट रेड त शर्ट और नीचे मिनी ब्लॅक स्कर्ट पहना था.इस ड्रेस मई संगीता का जिस्म बड़ा सेक्सी लग रहा था.संगीता सोफे पे ज़रा डरते नज़र नीचे करके बैठती है.अफ़रोज़ संगीता को बहो मई लेक गाल चूमते बोला,"कैसे है मेरी जान तू?मुझे रात भर नींद नही आए.मई तो बस पूरी रात तारे बारे मई सूच रहा था.मेरी संगीता जान,इतनी डारी क्यों हो तुम रानी?" संगीता अफ़रोज़ का हाथ थमते बोली, "अफ़रोज़ मेरा भी यही हाल था.मुझे भी रात भर तेरी बड़ी याद आए.मई भी रात भर सो ना सकी."संगीता को पास खिचते उसके हूथ चूमते अफ़रोज़ बोला,"आ मेरी जान,तेरी बात सुनके बड़ा अछा लगा मुझे.संगीता अपने इस पहले मिलन की खुशी मई मैने तारे लिए गिफ्ट लाया है.तारे जिस्म पे बिल्कुल अची लगेगी वो गिफ्ट.बड़े प्यार से चुन के लाया हून तारे लिए." अफ़रोज़ के बालो से हाथ फेरते संगीता बोली,"अफ़रोज़ थॅंक्स मारे लिए गिफ्ट लाने.लेकिन सॉरी मैने तारे कुछ नही लाया. नेक्स्ट टाइम मई ज़रोर कुछ ना कुछ लायुंगी तारे लिए." शर्ट के उप्पर से कविता के माममे दबाता अफ़रोज़ बोला,"आरे उसकी कोई ज़रोरत नही रानी,मारे लिए गिफ्ट के बदले तेरा यह जिस्म है ना?इतना सेक्सी और गर्म गिफ्ट है मारे लिए तो मुझे और क्या चाहाए है ना?संगीता तुझे वो गिफ्ट जाके उस अलमारी के उप्पर से उतरना पड़ेगा ठीक है?" अफ़रोज़ के उसके जिस्म के बारे मई की बात सुनके संगीता खुश होती है. अफ़रोज़ के हाथ जैसे उसके माममे पे पड़ते है वो मचलते अफ़रोज़ को लंबा किस करते बोली,"बड़ा शैतान है तू,सीधे-सीधे ऐसे बात करने शर्म नही आती तुझे?अफ़रोज़ गिफ्ट मई जाके उतरके देखती हून."संगीता अलमारी के पास जाती है पर गिफ्ट उसके हाथ नही लगता.वो जैसे पैर उँचे करती है उसका स्कर्ट पीछे से उठ जाता है.अफ़रोज़ इसी वक़्त के इंतज़ार मई था.जैसे ही संगीता का स्कर्ट करीबान उसकी पनटी तक आता है वो झट से उसके पास जाके संगीता की मिनी स्कर्ट के नीचे हाथ डालके उसकी पनटी नीचे खीची.जब तक संगीता को इस बात का अंदाज़ा होता है अफ़रोज़ उसकी पनटी पूरी तरह नीचे खिचता है.संगीता अचानक हुए इस हमले से सावरते नीचे झुकके पनटी उठा ते बोली,"ऑश अफ़रोज़ नहियीई,,यह क्या कर रहे हो?प्लीज़ मुझे छोड़ो नेया,यह मेरी पनटी क्यों उतरी तूने?" जैसे संगीता पनटी उप्पर करने झुकी अफ़रोज़ उसकी नंगी गांद पे हल्के से 2-3 थप्पड़ मारते संगीता की पैरो मई पड़ी पनटी को अपने पैर से दबाता है जिसके वजह से संगीता अब अफ़रोज़ सामने झुककी थी.दूसरे हाथ से झुकी हुई संगीता के माममे दबाते अफ़रोज़ बोला,"उम्म संगीता रानी, गिफ्ट चाहाए तो मुझे पहले तारे इस जिस्म को नंगा करके चोदने का गिफ्ट देना होगा तुझे समझी? आइसे फ्री मई गिफ्ट तो मई किसी को भी नही देता तो तेरी जैसे मस्त माल को कैसे डून रानी?वैसे मई जनता हून की तुझे भी यह सब चाहाए,तेरी यह कमसिन जवानी अब मर्द की बाहू मई सोना चाहती है.बोल गिफ्ट चाहाए तो मुझे तारे मस्त जिस्म को नंगी करके देगी ना संगीता?"..


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Re: अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

Unread post by The Romantic » 13 Dec 2014 04:54

अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --05

गांद पे पड़े थप्पड़ और बेदर्दी से मसलने जानेवाले मम्मो के दर्द से संगीता चिल्लती है.अफ़रोज़ जो बात बोल रहा था वो सही थी और वो इसके लिए ही आये थे यहा पर अफ़रोज़ इतनी जल्दी उससे नंगी करेगा यह नही पता था उससे. थप्पड़ की जगह अपनी गांद मसालते और अफ़रोज़ का हाथ माममे से हटाने की कोशिश करते संगीता बोली,"ह अफ़रोज़्ज़्ज़्ज़्ज़ मुझे लग रहा है.यह क्या हुआ है तुझे आज?उूुउउहीईए माआ आआआआआः उुउउहीईए माआ बहुत दर्द होता है अफ़रोज़.प्लीज़ आइसा मत करो, दर्द हो रहा है ना मुझे." संगीता की आँखो मॅ आसू आए.पर अफ़रोज़ अब संगीता की कोई बात सुनने के मूड मे नही था.बहुत दीनो से संगीता के जिस्म ने उससे तडपया था****ने संगीता को टर्न करके एक हाथ उसके करके शर्ट के नीचे से डालके माममे ब्रा के उप्परसे मसालते बोला,"मेरी रानी,मर्द के हाथ पहली बार जिस्म से खेलने लगता है तो तेरी जैसे लड़की को दर्द होता ही है.पर संगीता इस दर्द के बाद जो खुशी मिलेगी उसके बाद यह दर्द बार-बार चाहाए होगा तुझे.आज देख तेरी आइसे हालत करता हून की तू पहले रोएगी पर उसके बाद तेरी यह चूत मारे लॉड के लिए तरसेगी." संगीता की नंगी गांद पे हल्के से और थप्पड़ मरते फिर अफ़रोज़ दोनो हाथ से संगीता का शर्ट खोलने लगा.संगीता को कुछ समझ मई आने के पहले अफ़रोज़ ने उसका शर्ट खोलके उतरा.अब संगीता अफ़रोज़ के आगे सिर्फ़ स्कर्ट और ब्रा मई खड़ी थी. संगीता अफ़रोज़ के कार्मेन से डर और दर्द से घबराते बोली,"अफ़रोज़ नही प्लीज़, मारे कपड़े क्यों उतारे?मुझे नंगी क्यों कर रहे हो?देख यह ठीक नही है, कुछ गड़बड़ हुई तो मेरी कितनी बदनामी होगी.प्लीज़ आइसा मत कर, मुझे जाने दो अफ़रोज़." संगीता के माममे बेरहमी से मसालते और अब उसका गाल चूमते अफ़रोज़ बोला,"हन ज़रूर जाने दूँगा पर तेरी मस्त जवानी को पहले चोदुन्ग. संगीता बहुत तडपा हून मई तेरी यह जवानी देखके.कल रात को कितने नाटक किए थे तूने अब तभी मैने टाई किया की तुझे आज मई ज़रूर चोदुन्गा जिसे फिर कभी तू मारे सामने नाटक नही करेगी." अफ़रोज़ ब्रा के उप्पर से माममे मसल ते पीछे से संगीता की गांद पे लंड रग़ाद रहा था.संगीता को यह सब अक्चा लग रहा था पर उससे डर भी लग रहा था.अपना जिस्म अफ़रोज़ के हाथ ढीला छोडवो फिर अफ़रोज़ को प्लीड करते बोली,"आआआआआआः ऊवू उूउउफफफफफफफ्फ़ इतने ज़ोर्से मत दब्ाओ ना ह." अफ़रोज़ इस प्लीडिंग पे ध्यान दिए बिना अब संगीता की ब्रा खोलके उससे घूमके,सामने से उसके निपल को ज़रा बेरहमी से पिंच करते स्कर्ट खिचके उतरते बोला,"तो मेरी रानी,नाटक क्यों करती है?उस्दीन से तारे नाटक देखके सहन कर रहा हून,कल श्याम को भी कितना तडपया तूने मुझे याद है?बोल नाटक करेगी मुझसे?" अफ़रोज़ संगीता का एक निपल ज़ोर्से खिचता है जिसे वो दर्द से और भी रोते बोली, "आआआआआआआः मुझे म्‍म्म्ममफफफफ्फ़ करो.मुझे इतना दर्द मत दो,मई अब कोई नाटक नही करूँगी, पर प्लीज़ ऐसा मत करो अफ़रोज़ उउऊहीई माआ बहुत दर्द हो रहा है."अपनी लूँगी खोलते टंके खड़ा लॉडा संगीता के सामने मसालते अफ़रोज़ बोला, "साली मुझे इतना तडपया उसका कितना दर्द हुआ होगा मुझे?सुन संगीता, अगर माफी चाहाए तो मेरा लॉडा चूस.मेरा लंड चूसने के बाद शायद तुझे माफ़ करू.चल जलदे नीचे बैठके मेरा लंड चूस नही तो और दर्द दूँगा मई तुझे." संगीता अब डारी है.अफ़रोज़ का यह रूप उसके लिए नया था. अफ़रोज़ आज उससे कितना दर्द दे रहा था और कितनी गंदी गलिया दे रहा था.डरते हुए नीचे बैठ के उसने अफ़रोज़ का लंड हाथ मई लाते मूह मई डाला.वैसे उसके कल अफ़रोज़ का लंड चूसा था इसलिए बिना दिक्कत वो फिर लंड चूसने लगती है.अफ़रोज़ उसका सिर पकड़ते मूह छोड़ने लगा.कल की प्रॅक्टीस से वो अब ठीक से लंड चूस रही थी. वो आज अपना सब कुछ अफ़रोज़ के हवाले करने आए थी पर प्यार से पर अफ़रोज़ के रववये को देखके वो समझी थी की आज अफ़रोज़ उससे बेरहमी से चोद ने वाला था.संगीता का मूह चोद्ते अफ़रोज़ खुशी से बोला, "ह आइसे ही चूस मेरा लॉडा बहनचोड़.तेरी जैसे कमसिन चूत से लॉडा चुस्वके लाने बड़ा अक्चा लगता है.साली कल तो तूने चुस्के मेरा पानी निकाला पर आज तेरी कमसिन चूत चोद के उसमे पानी डालूँगा मई."आचे से लंड चुसवाने के बाद संगीता को खड़ी करते उसकी ब्रा उतार डालते, उसके नंगे माममे मसालते अफोज़ ने उससे अपनी स्कर्ट उतरने कहा.अब अफ़रोज़ ने सामने पोरी नंगी होने संगीता शर्मा रही थी पर अफ़रोज़ का गुस्सा याद करके उसने स्कर्ट उतरी.संगीता का नंगी कमसिन जिस्म देखके अफ़रोज़ खुश हुआ. संगीता के गोरे जिस्म पे वो कड़क मम्मो पे गुलाबी निपल थे****की कमसिन चूत को रेशम जैसे झाटों से ढाका था.संगीता को बीच मई खड़ी करके,गोल घूमते उसका पूरा नंगा जिस्म सहलाते अफ़रोज़ बोला,"अफ साली,क्या कड़क कमसिन जिस्म है तेरा संगीता.बहनचोड़ साली,तेरा यह जिस्म देखके तो मेरा लॉडा देख कैसे उछाल रहा है.बड़ा माज़ा आएगा तुझे चोदने मेरानी." अब अफ़रोज़ भी नंगा होके संगीता को सोफे पे लिथके उसके माममे चूसने लगता है.संगीता के बदन मई वासना पूरी तरह फैल गये.इतनी गंदी गल्लिया और दर्द लेक भी वो अफ़रोज़ के बालो से हाथ फेरते सिसकारिया भरते अपने माममे उससे चुस्वके लाने लगती है.बरी-बरी माममे चाटते अफ़रोज़ अब निपल से खेलते उनको उंगली मई घूमने लगा जिसे संगीता और बहाल हो गये.संगीता डरते-डरते इस खेल का मज़ा ले रही थी****से यह खेल अक्चा लग रहा था पर अफ़रोज़ के रावय्यए से वो बहाल थी.अपना जिस्म अब पूरी तरह अफ़रोज़ के आघोष मार करते वो बोली,"प्लीज़ अफ़रोज़ मुझे अब और दर्द मत दे,मैने तेरा क्या बिगाड़ा है जो मुझे इतना दर्द दे रहा है तू?इतने दिनसे तू जो चाहे वो कर रहा था और मई करने दे रही थी तो आज क्या हुआ तुमको?जो तुम चाहती हो वोही करने मई भी आए हून पर तुम जैसे जानवर ही बान गये हो.अब जैसा तू कहोगे मई करूँगी पर अब प्यार से करो जो करना है वो."अफ़रोज़ संगीता के बॉल खिचते उसका मूह अपने पास लेक बोला,"संगीता,कामिनी अब तो मई सिर्फ़ मेरे लंड की आग शांत करने के बाद ही तुझसे शराफ़त से पेश आयुंगा,आज मई तुझे जीभरके छोड़के ही यहा से जाने दूँगा.संगीता तूने मुझे इतने दीनो से बेकरार किया था,कितने नाटक किए थे इसलिए तेरे साथ ऐसे पेश आ रहा हून मई समझी?"संगीता डर के अफ़रोज़ के सामने हाथ जोड़के बहुत गिड़गिदई पर अफ़रोज़ के उसका कोई असर नही हुआ. कुछ सोचके संगीता अफ़रोज़ को धक्का देके भागी पर मेन डोर तक जाने के बाद उससे अहसास हुआ की वो एकद्ूम नंगी थी इसलिए वोही रुके फिर रोते अफ़रोज़ से बोली,"नही प्लीज़ अफ़रोज़,ऐसा प्लीज़ मत करो,दर्द होता है मुझे.प्लीज़ मुझसे ऐसा मत बिहेव करो,मई तेरा सब कहना मानूँगी पर प्लीज़ मुझे और दर्द मत देना."अफ़रोज़ लंड सहलाते संगीता के पास गया और उसकी कमर मई हाथ डालके बिस्तर पे लेक बिताते उसके मूह पे लंड रखते बोला,"साली अब गिड़गिडती है,इतने दिन जब मई बोल रहा था तब नाटक करती थी और तब मुझपे रहम नही आया तुझे.देख हरामी,मुझे तेरी यह चूत चोदानी है,तेरी यह कमसिन जवानी का भोसड़ा बनाना है,तूने जितना मुझे बकरार किया उतना ही बेकरार करके तुझे चॉड्ना है.चल अब बिना कोई ज़्यादा नाटक करते मेरा लंड चूस फिर तेरी चूत चोदुन्गा मैं इससे." cont........