कुँवारियों का शिकार compleet

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rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:01

कुँवारियों का शिकार--24

गतान्क से आगे..............

मैने बहुत हैरान था और सोच रहा था के यह लड़की क्या चीज़ है जो मेरा फ़ॉर्मूला मुझ पर ही चला रही है और इसको क्या-क्या पता है कहीं ये मुझसे कुच्छ च्छूपा तो नही रही? यह असल में चाहती क्या है? मैने हाथ उठा कर उसको रोका और पूछा के वो और क्या जानती है, और ऐसा विचार उसके मन में कैसे आया? वो मुस्कुराई और बोली के मैं नही जानती. मैं तो पहले दिन से ही बता चुकी हूँ कि यह नौकरी पाने के लिए मैं कुच्छ भी करने को तैयार थी पर तुमने कोई गौर ही नही किया और कोई भी ऐसी वैसी बात नही की बल्कि मुझे यहाँ रहने की जगह भी दे दी वो भी बिना किसी लालच के. फिर भी जाने क्यों मुझे लगता है कि तुम्हारा कोई और पहलू भी है जिसे मैं नही जानती और चाहती हूँ की अगर कुच्छ है तो उसे बता दूं अगर उसको इश्स लायक समझू तो, कहते हुए वो कुच्छ गंभीर हो गयी.

मैने उससे कहा के अगर उसकी बात ख़तम हो गयी हो तो मैं कुच्छ कहूँ. उसने कहा के हां वो अपनी बात कह चुकी और मेरे जवाब के लिए तैयार है. मैने मुस्कुराते हुए कहा के मेरी बात पूरी कहने में टाइम लग जाएगा इसलिए पहले खाना खा लें उसके बाद बात करें तो कैसा रहेगा? वो चौंक गयी और घड़ी देखने लगी और बोली के बिल्कुल ठीक है पहले पेट पूजा पीछे कम दूजा. खाना यहीं बाहर या अंदर? मैने कहा के यहीं ठीक है. और वो गयी और 10 मिनट में ही खाना लगा दिया और हमने खाना शुरू किया. खाना बहुत ही बढ़िया बना था और जैसे एक-एक चीज़ उसने बहुत खास बनाई थी. मैने उसके खाने की तारीफ की और यह भी कहा के मैं तो महीने में एक बार से ज़्यादा उसके हाथका खाना नही खा सकता और अगर खाया तो फिर नौकरों के हाथ का खाना मुश्किल हो जाएगा. वो हंस पड़ी और बोली के जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. मैं तो रोज़ भी खिला सकती हूँ. मेरा क्या है एक की जगह दो का खाना बनाने में कोई भी एक्सट्रा मेहनत नही लगेगी. खाना ख़तम किया तो वो स्वीट डिश ले आई और वो भी उन्नकि फॅमिली रेसिपी थी उसकी नानी की सिखाई हुई स्पेशल नेवाबी फिरनी. मैने कहा के क्या बात है आज इतनी ज़्यादा मेहरबान क्यों हो रही हो मुझ पर शुरू भी और आख़िर भी स्पेशल रेसिपी के साथ. वो बोली के पहली बार खाना खिला रही हूँ तो याद तो रहना चाहिए ना कि कुच्छ स्पेशल था. फिर उसने बर्तन समेटे और आकर मेरे पास बैठ गयी.

मैने बोलना शुरू किया. तनवी जैसे कि तुम्हे मेरी पिच्छली ज़िंदगी के बारे में तो पता चल ही गया है की शादी के पहले मैं कैसा था और शादी के बाद मैं कैसा था. अचानक हुए हादसे ने मुझे तोड़ के रख दिया था और मैने खुद को अपने बच्चो में और अपने काम में बिज़ी कर लिया था और मुझे किसी और बात की कोई होश नही थी. मेरी सेक्स की भूख भी ना जाने कहाँ खो गयी थी. दोबारा शादी ना करने का फ़ैसला मेरा खुदका था और मैं उस पर आज भी अटल हूँ. फिर एक दिन एक घटना ने जैसे मुझे नींद से जगा दिया. सेक्स की मेरी सोई हुई इच्छा जाग गयी और मैं अपने आप को रोक नही पाया. एक बात मैं यहाँ पर स्पष्ट कर दूँ के शादी के पहले भी और अब कुच्छ महीनों से मैं जिन लड़कियों के संपर्क में आया हूँ किसी पर भी मैने कोई भी, किसी तरह का भी दबाव नही डाला है, कोई लालच नही दिया है, किसी भी मजबूरी का फयडा नही उठाया है. जो भी लड़की मेरे संपर्क में आई है पूरी तरह से अपनी मर्ज़ी से आई है और अच्छी तरह से समझ बूझ कर आई है. मैने उनकापूरा साथ दिया है और देता रहूँगा एक अच्छे दोस्त की तरह. वी आर अडल्ट्स और अपनी मर्ज़ी से अगर अपनी किसी भूख को मिटाना चाहते हैं तो मैं किसी भी तरह से इसको ग़लत नही समझता. मैने हमेशा उनको सेक्स से विमुख रहने की तो नही पर लिमिट में करने की सलाह दी है और अब तक तो मैं सफल भी रहा हूँ. अब मेरा सोचने का और देखने का तरीका भी बदल गया है और फ्रॅंक्ली स्पीकिंग हर सुन्दर लड़की मेरी कमज़ोरी है.

कुच्छ देर रुक कर मैने सोचा के कहूँ या ना कहूँ, फिर मैने बोलना शुरू किया. तनवी तुम सोच रही होंगी के मैने तुम्हारी तरफ कोई ध्यान नही दिया. ऐसा नही है. मैं तो तुम्हें देखते ही तुम्हारी ओर आकर्षित हो गया था, क्योंकि तुम हो ही इतनी सुंदर. लेकिन तुम्हारी बातें और तुम्हारी मजबूरी ने मुझे कुच्छ भी कहने और करने लायक नहीं छोड़ा सिवाए तुम्हारी हेल्प करने के. तनवी चौंक कर कुछ बुदबुदाई. मैने कहा के तनवी जो भी कुच्छ तुम्हारे मन में है साफ बोलो ऐसे नही. उसने नज़रें झुका के कहा कि यही तो मैं सोच रही थी के तुम कैसे पत्थर हो कभी एक बार भी कोई इशारा तक नही किया और यह भी के शायद मेरी उमर की लड़कियाँ तुम्हें पसंद ही नही हैं. मैने उसको कहा के कोई पागल ही होगा जो तुम्हें पसंद नही करेगा. लेकिन मैं तो यही सोच कर चुप रह गया के तुम कहीं ग़लत ना समझ लो कहते हुए मैं थोड़ा उसकी ओर सरका और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए उसे अपनी ओर खींचा. वो भी मेरी ओर सर्की और मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और अपना हाथ मेरे गले में लपेट दिया. उसका एक मम्मा मेरी छाती को गुदगुदाने लगा. मैने अपने दूसरे हाथ से उसका चेहरा ऊपेर किया और उसकी मुंदी हुई आँखों को चूम लिया. वो सिहर कर पलटी और मेरी गोद में लेट सी गयी और अपनी दोनो बाहें मेरे गले में डाल कर मुझ से लिपट गयी और बोली के मैं बहुत प्यासी हूँ और मुझे कब्से इस दिन का इंतेज़ार था के कोई मुझे अपनी बाहों में लेकर मसल दे. मैने उसे अपनी बाहों की गिरफ़्त में ले लिया. उसके भरे हुए सख़्त मम्मे मेरी छाती में गढ़ने लगे और मेरे होंठ उसके होंठों से जा टकराए. मेरी जीभ ने उसके होंठों पर दस्तक दी और उसके होंठ अपने आप खुल गये जैसे मेरी जीभ का स्वागत कर रहे हों. मेरी जीभ उसके मुँह में चली गयी और उसकी जीभ से जा टकराई. दोनो जीभें आपस मिली एक दूसरे से लिपटने लगीं. यह चुंबन कोई 15-20 मिनट तक चला. हमारे शरीर निश्चल थे केवल जीभें आपस में उलझी हुई थीं.

तनवी की साँसें भारी होने लगीं और उसने मुझे ज़ोर से अपनी बाहों में कस लिया. मैने उसको कहा के अब बस करो नही तो मैं अपना नियंत्रण खो दूँगा. वो मेरी बाहों में मचल के बोली के 4-5 साल अभी लगेंगे उसको शादी करने में क्योंकि वो पहले अपनी बहनों की शादी करेगी और अपने भाई को इस लायक बनाएगी कि वो घर का बोझ अपने कंधो पर उठा सके. तभी वो शादी के बारे में सोचेगी और तब तक वो इंतेज़ार नही कर सकती. क्या मैं इतना समय उसकी देखभाल कर सकता हूँ. मैने कहा के देखभाल की उसको कोई ज़रूरत नही है और जहाँ तक उसकी ज़रूरतों का सवाल है वो मैं कर ही दूँगा पूरी. और उसको क्या चाहिए? वो बोली के तुम्हारा सहारा मिल जाएगा तो मैं…. ये क्या बोल रही हो मैने उसको टोका? वो बोली के मैं तो यही कह रही हूँ के 4-5 साल मुझे तुम्हारा साथ मिल जाए तो मैं निश्चिंत हो जाऊंगी. मैने कहा के कैसा सहारा? वो बोली के यही के मैं तुम्हारी शारीरिक ज़रूरत पूरी करूँ और तुम मेरी. मैने अब तक इस बारे में कभी सोचा भी नही था पर अब मैं और इंतेज़ार नही कर सकती और चाहती हूँ के तुम मुझे वो एहसास कराओ जो मैं आज तक करने की हिम्मत नही जुटा पाई हूँ.

मैं चौंक गया और पूछने लगा के क्या कह रही हो? क्या तुम अभी तक….. हां उसने मेरी बात काटी और बोली के मैने अभी तक सेक्स काकोई अनुभव नही किया है और चाहती हूँ के तुम वो प्रथम पुरुष बनो जो मुझे यह अनुभव कराए और कम से कम 4-5 साल तो मैं तुम्हारी ही होकर रहूं. मैने कहा के मैं बँध कर नही रह सकता तो वो बोली तुम्हें बाँधने के लिए कौन कह रहा है मैं तो यह कह रही हूँ के मैं बँधी रहूं. इसके साथ ही वो मेरी छाती में मुँह छुपा कर मुझसे लिपट गयी और मेरे बहुत कहने पर भी उसने ना तो अपना मुँह खोला और ना ही आँखें. अभी तक वो मेरी गोद में अढ़लेटी अवस्था में ही थी. मैने अपना एक हाथ उसकी पिंदलियों पर पहुँचाया और उन्हें सहलाने लगा और उसे घुटनों के नीचे के कोमल भाग पर रख दिया. वो सिहर गयी और ज़ोर से अपने मम्मे मेरी छाती पर रगड़ने लगी. मैने अपना हाथ ऊपेर किया और उसके टॉप में घुसा दिया. मेरे हाथ का स्पर्श उसकी नगञा त्वचा पर होते ही वो कांप गयी. मेरा हाथ उसके पेट से होता हुआ उसके कठोर मम्मे पर पहुँचा और उसका माप तोल करने लगा. वो जूडी के मरीज़ की तरह काँपने लगी तो मैने अपना हाथ उसके टॉप में से निकाल कर उसको उठाकर कमरे के अंदर आ गया और उसको बेड पर लिटा दिया.

वो अपनी आँखें बंद करके लेटी रही. मैने फुर्ती से अपने कपड़े उतारे और फिर आगे बढ़कर उसको बिठा दिया और उसके टॉप को उतार दिया. उसके सख़्त और उन्नत मम्मे मेरे आँखों के सामने थे और जैसे गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए सर उठाकर खड़े थे. जवान और सुन्दर लड़कियों में मेरी दिलचस्पी का यह भी एक कारण था के उन्नकि त्वचा बहुत ही चिकनी और सुदृढ़ होती है और उनका जिस्म एक दम कड़क होता है जो छ्छूने पर एक मादक एहसास पैदा करता है. मैने बेड पर ही उसको ऊँचा किया और वो अपने घुटनों पर आ गयी. मैने उसकी बगलों में हाथ डाल कर उसको अपने साथ चिपका लिया और उसकी पीठ सहलाने लगा. चिकिन पीठ पर मेरे हाथों ने जैसे कयामत ढा दी और वो एक लंबी साँस लेकर मेरे साथ ज़ोर से चिपक गयी. फिर मैं उसको नीचे ले आया और उसकी स्प्लिट स्कर्ट को खोलना चाहा. उसने खुद ही उसको खोल दिया और वो उसके पैरों में गिर गयी. फिर उसने अपनी पॅंटी भी नीचे कर दी और बारी-बारी अपने पैर उठाकर दोनो कपड़े उतार दिए. अब दोनो पूरी तरह से नंगे थे और एक दूसरे से चिपके हुए थे और हमार स्पर्श ने जैसे हमारे शरीरों में आग भर दी थी जिसको शांत करने का एक ही उपाए था और वो था तनवी की चुदाई.

मैने उसको बेड पर लिटा दिया और अपने हाथों और होंठों से उसकी उत्तेजना को बढ़ाने लगा. उसके मम्मे जिनपर उभरे हुए उसके निपल बहुत आकर्षक लग रहे थे सबसे पहले मेरे मुँह और हाथों के शिकार बने. मैं बहुत देर तक उसके दोनो मम्मों को बारी बारी से चुभलता और सहलाता रहा. कभी उन्हें दबा देता और कभी उसके निपल्स को अपनी उंगली और अंगूठे के बीच मसल देता. वो हाआआआआाआआइईईईईईईई, हाआाआआइईईई करने लगी. इधर मेरा दिल भी मेरी छाती में ऐसे धड़क रहा था जैसे अंदर से हथोदे चल रहे हों और हम दोनों की साँसें क़िस्सी धौंकनी के समान चल रही थीं. बॉडी टोनिंग एक्षसेरसिसेस ने उसके जिस्म को सुन्दर और गथीला बना दिया था और मेरे हाथ उसकी कोमल और चिकनी त्वचा पर फिसल से रहे थे. उसने अपनी उखरी साँसों पर काबू पाने की कोशिश में गहरी साँसें लेना शुरू कर दिया था. मैने उसको पलट दिया और उसका मुँह अपने पैरों की ओर करके अपने ऊपेर खींच लिया. उसकी चूत अब मेरे मुँह के पास थी और उसका मुँह मेरे लंड के पास. उसकी चूत में से एक मदहोश करने वाली महक आ रही थी. मैने अपना मुँह उसकी चूत पर चिपका दिया और पूरे जोश के साथ उसकी चूत को चाटने और चूसने लगा. वो एक बार तो सन्न रह गयी और फिर उसके शरीर ने मचलना शुरू कर दिया. उत्तेजना तनवी से संभाले नही संभाल रही थी. रह रह कर वो कांप जाती. मेरा लंड उसके मुँह से टकरा रहा था. उसने अपने आप को मेरी पकड़ से छुड़ाने की कोशिश नाकाम होती देख कर मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसको मुँह चाटने लगी. अब काँपने की बारी मेरी थी.

तनवी क़िस्सी एक्सपर्ट की तरह मेरा लंड चूस और चाट रही थी और मेरी उत्तेजना को बहुत तेज़ी से बढ़ा रही थी. मैने अपना लंड उसके मुँह से निकाल कर उसको वापिस पलटा और पीठ के बल लिटा दिया. उसकी चूत पर अपना ढेर सारा थूक लगा दिया और अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख के एक धक्का मारा. मेरा लंड उसकी चूत में घुसता चला गया और उसकी कुमारी झिल्ली से जा टकराया. मैं रुका नही और अपने लंड को थोड़ा बाहर खींच कर एक ज़ोर का धक्का मारा. वो ज़ोर से चिल्लाई माआआआआआआआआआआआअ, मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गइईईईईईईईईईईई माआआआआआआआआआआआऐं. मेरे हाथ उसके मम्मों पर और मुँह उसके मुँह से जा चिपका और उसके होंठों को चूसने लगा. मम्मे मेरे हाथों की गिरफ़्त में थे और मेरे हाथ अपने पूरी मनमानी कर रहे थे. थोरी देर में जब उसका दर्द कम हुआ तो मैने तनवी की चुदाई आरंभ कर दी. पहले धीरे-धीरे प्यार से और फिर आहिस्ता-आहिस्ता तेज़-तेज़ और ज़ोर से. फिर हमारे जिस्मो के टकराने की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी. अब तनवी को भी मज़ा आना शुरू हो गया था. वो पूरी मस्ती में झूम रही थी और बोल रही थी के ज़ूऊऊऊऊऊऊऊओर से चोदो, ज़ूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊर से, मैं तूऊऊऊओ पाााआआआगल त्ीईीईईईईईईईईईई, पहलीईईईईई क्यूऊऊऊऊऊऊओन नहियीईईईईईईईईईईईईई चूदी

ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई. मैने उसको कहा के कोई बात नही अब सारी कसर निकाल देंगे. वो नीचे से गांद उठा-उठा कर चूत मरवा रही थी और मैं धक्के पे धक्का लगा रहा था. मेरा लंड पूरी तेज़ी के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. 5-7 मिनट की तगड़ी चुदाई के बाद वो झाड़ गयी और उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया. उसकी चूत ने मेरे लंड पर अपना कसाव बढ़ा दिया जो उसके पानी छ्चोड़ने की वजा से बहुत गीली थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड किसी मुलायम और स्पंज के शिकंजे में कसा हुआ है. अब मुझे लग रहा था के मैं और ज़्यादा देर नही चोद सकूँगा और झाड़ जाऊँगा. तनवी की कसी हुई चूत काघर्षण जैसे मेरे लंड को बाहर निकलने से रोकने की कोशिश में नाकाम हो रहा था और मेरे मज़े को बढ़ा रहा था.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--24

gataank se aage..............

Maine bahut hairaan tha aur soch raha tha ke yeh ladki kya cheez hai jo mera formula mujh par hi chala rahi hai aur issko kya-kya pata hai kahin ye mujhse kuchh chhupa to nahi rahi? Yeh asal mein chahti kya hai? Maine haath utha kar ussko roka aur poochha ke wo aur kya jaanti hai, aur aisa vichaar usske man mein kaise aaya? Wo muskurayee aur boli ke main nahi jaanti. Main to pehle din se hi bataa chuki hoon ki yeh naukri paane ke liye main kuchh bhi karne ko taiyaar thi par tumne koyi gaur hi nahi kiya aur koyi bhi aisi vaisi baat nahi ki balki mujhe yahaan rehne ki jagah bhi de di wo bhi bina kissi laalach ke. Phir bhi jaane kyon mujhe lagta hai ki tumhara koyi aur pehlu bhi hai jissey main nahi jaanti aur chahti hoon ki agar kuchh hai to usse bata doon agar ussko iss laayak samjhoon to, kehte huey wo kuchh gambhir ho gayee.

Maine usse kaha ke agar usski baat khatam ho gayee ho to main kuchh kahoon. Ussne kaha ke haan wo apni baat keh chuki aur merey jawab ke liye taiyaar hai. Maine muskuraate huey kaha ke meri baat poori kehne mein time lag jaayega issliye pehle khana kha lein usske baad baat karein to kaisa rahega? Wo chaunk gayee aur ghadi dekhne lagi aur boli ke bilkul theek hai pehle pet pooja peechhey kam dooja. Khana yahin bahar ya andar? Maine kaha ke yahin theek hai. Aur wo gayee aur 10 min mein hi khana laga diya aur humne khana shuru kiya. Khana bahut hi badhiya bana tha aur jaise ek-ek cheez ussne bahut khas banayi thi. Maine usske khane ki tareef ki aur yeh bhi kaha ke main to mahine mein ek baar se zyada usske haath ka khana nahi kha sakta aur agar khaya to phir naukaron ke haath ka khana mushkil ho jayega. Wo hans padi aur boli ke jaisi tumhari marzi. Main to roz bhi khila sakti hoon. Mera kya hai ek ki jagah do ka khana banaane mein koyi bhi extra mehnat nahi lagegi. Khana khatam kiya to wo sweet dish le aayee aur wo bhi unnki family recipe thi usski naani ki sikhaayi hui special nawabi firni. Maine kaha ke kya baat hai aaj itni zyada meharbaan kyon ho rahi ho mujh par shuru bhi aur aakhir bhi special recipe ke saath. Wo boli ke pehli baar khana khila rahi hoon to yaad to rehna chahiye na ki kuchh special tha. Phir ussne bartan samete aur aakar mere paas baith gayee.

Maine bolna shuru kiya. Tanvi jaise ki tumhe meri pichhli zindagi ke baare mein to pata chal hi gaya hai ki shadi ke pehle main kaisa tha aur shadi ke baad main kaisa tha. Achanak huey haadse ne mujhe tod ke rakh diya tha aur maine khud ko apne bacchon mein aur apne kaam mein busy kar liya tha aur mujhe kissi aur baat ki koyi hosh nahi thi. Meri sex ki bhookh bhi na jaane kahaan kho gayee thi. Dobara shadi na karne ka faisla mera khud ka tha aur main uss par aaj bhi atal hoon. Phir ek din ek ghatna ne jaise mujhe neend se jaga diya. Sex ki meri soyi hui ichha jaag gayi aur main apne aap ko rok nahi paya. Ek baat main yahaan par spasht kar doon ke shaadi ke pehle bhi aur ab kuchh mahinon se main jin ladkiyon ke sampark mein aaya hoon kissi par bhi maine koyin bhi, kissi tarah ka bhi dabaav nahi dala hai, koyi laalach nahi diya hai, kissi bhi majboori ka fayda nahi uthaya hai. Jo bhi ladki mere sampark mein aayee hai poori tarah se apni marzi se aayee hai aur achhi tarah se samajh boojh kar aayee hai. Maine unnka poora saath diya hai aur deta rahoonga ek achhe dost ki tarah. We are adults aur apni marzi se agar apni kissi bhookh ko mitaana chahte hain to main kissi bhi tarah se issko galat nahi samajhta. Maine hamesha unnko sex se vimukh rehne ki to nahi par limit mein karne ki salah di hai aur ab tak to main safal bhi raha hoon. Ab mera sochne ka aur dekhne ka tareeka bhi badal gaya hai aur frankly speaking har sunder ladki meri kamzori hai.

Kuchh der ruk kar maine socha ke kahoon ya na kahoon, phir maine bolna shuru kiya. Tanvi tum soch rahi hongi ke maine tumhaari taraf koyi dhyaan nahi diya. Aisa nahi hai. Main to tumhein dekhte hi tumhari ore aakarshit ho gaya tha, kyonki tum ho hi itni sunder. Lekin tumhari baatein aur tumhari majboori ne mujhe kuchh bhi kehne aur karne layak nahin chhora sivaye tumhari help karne ke. Tanvi chaunk kar kuch budbudayee. Maine kaha ke Tanvi jo bhi kuchh tumhare man mein hai saaf bolo aise nahi. Ussne nazarein jhuka ke kaha ki yahi to main soch rahi thi ke tum kaise patthar ho kabhi ek baar bhi koyi ishaara tak nahi kiya aur yeh bhi ke shayad meri umar ki ladkiyaan tumhein pasand hi nahi hain. Maine ussko kaha ke koyi pagal hi hoga jo tumhein pasand nahi karega. Lekin main to yahi soch kar chup reh gaya ke tum kahin galat na samajh lo kehte huey main thora usski ore sarka aur usske kandhe par haath rakhte hue usse apni ore kheencha. Wo bhi meri ore sarki aur mere kandhe par apna sar rakh diya aur apna haath mere galey mein lapet diya. Usska ek mamma meri chhati ko gudgudaane laga. Maine apne doosre haath se usska chehra ooper kiya aur usski mundi hui aankhon ko choom liya. Wo sihar kar palti aur meri gode mein leit si gayee aur apni dono bahein merey galey mein daal kar mujh se lipat gayee aur boli ke main bahut pyaasi hoon aur mujhe kabse iss din ka intezaar tha ke koyi mujhe apni bahon mein lekar masal de. Maine usse apni bahon ki giraft mein le liya. Usske bharey huey sakht mammey meri chhati mein gadne lagey aur merey honth usske honthon se ja takraye. Meri Jeebh ne usske honthon par dastak di aur usske honth apne aap khul gaye jaise meri jeebh ka swagat kar rahey hon. Meri jeebh usske munh mein chali gayee aur usski jeebh se ja takraayee. Dono jeebhein aapas merin ek doosre se lipatane lageen. Yeh chumban koyi 15-20 min tak chalaa. Humaare shareer nishchal the keval jeebhein aapas mein uljhi hui theen.

Tanvi ki saansein bhaari hone lageen aur ussne mujhe zor se apni bahon mein kas liya. Maine ussko kaha ke ab bas karo nahi to main apna niyantran kho doonga. Wo meri bahon mein machal ke boli ke 4-5 saal abhi lagenge ussko shadi karne mein kyonki wo pehle apni behnon ki shadi karegi aur apne bhai ko iss layak banayegi ki wo ghar ka bojh apne kandho par utha sake. Tabhi wo shadi ke baare mein sochegi aur tab tak wo intezaar nahi kar sakti. Kya main itna samay usski dekhbhal kar sakta hoon. Maine kaha ke dekhbhaal ki ussko koyi zaroorat nahi hai aur jahan tak usski zarooraton ka sawaal hai wo main kar hi doonga poori. Aur ussko kya chahiye? Wo boli ke tumhara sahara mil jayega to main…. Ye kya bol rahi ho maine ussko toka? Wo boli ke main to yahi keh rahi hoon ke 4-5 saal mujhe tumhaara saath mil jaaye to main nishchint ho jaaoongi. Maine kaha ke kaisa sahara? Wo boli ke yahi ke main tumhaari shareerik zaroorat poori karoon aur tum meri. Maine ab tak iss baare mein kabhi socha bhi nahi tha par ab main aur intezaar nahi kar sakti aur chahti hoon ke tum mujhe wo ehsaas karaao jo main aaj tak karne ki himmat nahi juta payee hoon.

Main chaunk gaya aur poochne laga ke kya keh rahi ho? Kya tum abhi tak….. Haan ussne meri baat kaati aur boli ke maine abhi tak sex ka koyi anubhav nahi kiya hai aur chahti hoon ke tum wo pratham purush bano jo mujhe yeh anubhav karaaye aur kam se kam 4-5 saal to main tumhaari hi hokar rahoon. Maine kaha ke main bandh kar nahi reh sakta to wo boli tumhein bandhne ke liye kaun keh raha hai main to yeh keh rahi hoon ke main bandhi rahoon. Isske saath hi wo meri chhati mein munh chupa kar mujhse lipat gayee aur merey bahut kehne par bhi ussne naa to apna munh khola aur naa hi aankhein. Abhi tak wo meri gode mein adhleti awastha mein hi thi. Maine apna ek haath usski pindliyon par pahunchaya aur unhein sehlaane laga aur usske ghutnon ke neeche ke komal bhag par rakh diya. Wo sihar gaye aur zor se apne mammey meri chhati par ragadne lagi. Maine apna haath ooper kiya aur usske top mein ghusa diya. Mere haath ka sparsh usski nagna tvacha par hotey hi wo kamp gayee. Mera haath usske pet se hota hua usske kathor mammey par pahuncha aur usska maap tol karne laga. Wo joodi ke mareez ki tarah kampne lagi to maine apna haath usske top mein se nikaal kar ussko uthakar kamre ke andar aa gaya aur ussko bed par lita diya.

Wo apni aankhein band karke leti rahi. Maine furti se apne kapde utaare aur phir aage badhkar ussko bitha diya aur usske top ko utaar diya. Usske sakht aur unnat mammey merei aankhon ke saamne thhe aur jaise gurutvakarshan ko chunauti detey huey sar uthakar khade thhe. Jawan aur sunder ladkiyon mein meri dilchaspi ka yeh bhi ek kaaran tha ke unnki tvacha bahut hi chikni aur sudridh hoti hai aur unka jism ek dum kadak hota hai jo chhoone par ek maadak ehsaas paida karta hai. Maine bed par hi ussko ooncha kiya aur wo apne ghutnon par aa gayee. Maine usski baglon mein haath daal kar ussko apne saath chipka liya aur usski peeth sehlaane laga. Chikin peeth par mere haathon ne jaise kayamat dha di aur wo ek lambi saans lekar mere saath zor se chipak gayee. Phir main ussko neeche le aaya aur usski split skirt ko kholna chaha. Ussne khud hi ussko khol diya aur wo usske pairon mein gir gayi. Phir ussne apni panty bhi neeche kar di aur baari-baari apne pair uthakar dono kapde utaar diye. Ab dono poori tarah se nange thhe aur ek doosre se chipke huey thhe aur humaare sparsh ne jaise humaare shareeron mein aag bhar di thi jissko shant karne ka ek hi upaaye tha aur wo tha Tanvi ki chudayee.

Maine ussko bed par lita diya aur apne haathon aur honthon se usski uttejana ko badhaane laga. Usske mammey jinpar ubhre huey usske nipple bahut akarshak lag rahey thhe sabse pehle mere munh aur hathon ke shikaar baney. Main bahut der tak usske dono mammon ko baari baari se chubhlata aur sehlata raha. Kabhi unhein daba deta aur kabhi usske nipples ko apni ungli aur angoothe ke beech masal deta. Wo haaaaaaaaaaaaaaaayeeeeeeeeeeeeeeeee, haaaaaaaaayeeeeeeee karne lagi. Idhar mera dil bhi meri chhati mein aise dhadak raha tha jaise andar se hathode chal rahe hon aur hum donon ki saansein kissi dhaunkni ke samaan chal rahi theen. Body toning excercises ne usske jism ko sunder aur gatheela bana diya tha aur mere haath usski komal aur chikni tvacha par phisal se rahey thhe. Ussne apni ukhri sanson par kaabu paane ki koshish mein gehri saansein lena shuru kar diya tha. Maine ussko palat diya aur usska munh apne pairon ki ore karke apne ooper kheench liya. Usski choot ab mere munh ke paas thi aur usska munh mere lund ke paas. Usski choot mein se ek madhosh karne waali mahak aa rahi thi. Maine apna munh usski choot par chipka diya aur poore josh ke saath usski choot ko chatne aur choosne laga. Wo ek baar to sann reh gayee aur phir usske shareer ne machalna shuru kar diya. Uttejana Tanvi se sambhale nahi sambhal rahi thi. Reh reh kar wo kamp jaati. Mera lund usske munh se takra raha tha. Ussne apne aap ko meri pakad se chhudane ki koshish nakaam hoti dekh kar mera lund apne haath mein le liya aur ussko munh chatne lagi. Ab kampne ki baari meri thi.

Tanvi kissi expert ki tarah mera lund choos aur chaat rahi thi aur meri uttejana ko bahut tezi se badha rahi thi. Maine apna lund usske munh se nikaal kar ussko wapis palta aur peeth ke bal lita diya. Usski choot par apna dher sara thook laga diya aur apne lund ko usski choot ke muhaane par rakh ke ek dhakka maara. Mera lund usski choot mein ghusta chala gaya aur usski kumari jhilli se ja takraya. Main ruka nahi aur apne lund ko thora bahar kheench kar ek zor ka dhakka maara. Wo zor se chillaayi Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa, Marrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr Gayeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaain. Mere haath usske mammon par aur munh usske munh se ja chipka aur usske honthon ko choosne laga. Mammey mere haathon ki giraft mein thhe aur mere haath apne poori manmaani kar rahey thhe. Thori der mein jab usska dard kam hua to maine Tanvi ki chudayee aarambh kar di. Pehle dheere-dheere pyar se aur phir ahista-ahista tez-tez aur zor se. Phir hamaare jimson ke takraane ki awaz makre mein goonjane lagi. Ab Tanvi ko bhi maza aana shuru ho gaya tha. Wo poori masti mein jhoom rahi thi aur bol rahi thi ke zooooooooooooooooor se chodo, zoooooooooooooooooooooor se, main tooooooooo paaaaaaaaaaaagal thiiiiiiiiiiiiii, pehleeeeeeeeeeeeeee kyooooooooooooooon nahiiiiiiiiiiiiiiiii chudiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Maine ussko kaha ke koyi baat nahi ab saari kasar nikaal denge. Wo neechey se gaand utha-utha kar choot marwa rahi thi aur main dhakke pe dhakka laga raha tha. Mera lund poori tezi ke saath usski choot mein andar bahar ho raha tha. 5-7 min ki tagdi chudayee ke baad wo jhad gayee aur usski choot ne paani chhod diya. Usski choot ne mere lund par apna kasaav badha diya jo usske paani chhodne ki vaja se bahut geeli thi aur mujhe aisa lag raha tha jaise mera lund kissi mulayam aur sponge ke shikanje mein kasa hua hai. Ab mujhe lag raha tha ke main aur zyada der nahi chod sakoonga aur jhad jaaoonga. Tanvi ki kasi hui choot ka gharshan jaise mere lund ko bahar nikalne se rokne ki koshish mein nakaam ho raha tha aur merey mazey ko badha raha tha.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:03

कुँवारियों का शिकार--25

गतान्क से आगे..............

तनवी के झड़ने के बाद मैं भी 10-12 धक्के मार के झाड़ गया और मैने अपना लंड उसकी चूत में पूरा घुसा कर अपना गरम लावा उसकी चूत में छ्चोड़ दिया. मेरे गरम वीर्य की 3-4 बौच्चरें तनवी की बcचेदानि से टकराईं और उन्न झटकों को वो सह ना सकी और काँपने लगी. उसके चेहरे पर असीम संतुष्टि के भाव थे. अपनी आँखें आधी खोल कर उसने मेरी ओर देखा और अपना हाथ उठा कर मुझे आमंत्रित किया. मैने उसको अपनी बाहों में भर लिया और वो अमरबेल की तरह मुझसे लिपट गयी. वो रह रह कर सिहर उठती और मुझसे लिपट जाती. मैने उसको पूछा के कैसी लगी उसको अपनी पहली चुदाई. वो शर्मा गयी और बनावटी गुस्से से मेरी छाती पर मुक्के मारने लगी प्यार से. मैने हंसते हुए उसके हाथ पकड़ लिए और अपनी बाहों में उसको भींच लिया और उसके कान में कहा लड़ाई करोगी तो एक बार फिर चोद डालूँगा और तब तक अपने लंड तुम्हारी चूत में अंदर बाहर करता रहूँगा जब तक तुम माफी नही माँगोगी. वो बोली ठीक है चोद लेना पर अभी नही, अभी तो साँस बहुत फूली हुई है और चूत में भी दर्द हो रहा है चाहे मीठा मीठा पर हो रहा है. मैं बहुत ज़ोर से हंस पड़ा और उसको चूम लिया. फिर मैने कहा के अब ठीक है अब तुम चुदाई की भाषा समझ गयी हो और बोलने भी लगी हो. वो बोली के तुम इतने बेशरम हो के मुझे भी बेशरम बना दिया है. मैने कहा के जब हम चुदाई कर सकते हैं तो इसके बारे में बात करने में कैसी शरम. वो मुस्कुराई और बोली के आहिस्ता आहिस्ता आदत पड़ेगी ना मैं कोई तुम्हारी तरह एक्सपीरियेन्स्ड थोड़े ही हूँ. मैने कहा के पूरा तजुर्बा भी करा देंगे. उसने एक बार फिर मेरे कंधे में अपना मुँह च्छूपा लिया और हँसने लगी. हम काफ़ी देर तक ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक दूसरे की साँसें गिनते रहे.

बेध्यानी में मेरे हाथ उसकी पीठ सहलाते रहे और वो काँपति रही. फिर उसने एक गहरी सांस ली और बैठ गयी और बोली के क्या जादू जानते हो जो मुझे पागल कर दिया है तुमने, मेरा दिल करता है कि ऐसे ही लिपट कर पड़ी रहूं और तुमको छोड़ू ही नही. मैने कहा के तुम मुझे बाँधने की कभी कोशिश मत करना. तुम जब तक चाहो यहाँ रह सकती हो, जब तुम्हारा दिल करे हम चुदाई कर सकते हैं पर कभी भी यह मत सोचना के तुम मुझे बाँध कर रख सकती हो. उसने कहा के ऐसा क्यो कह रहे हो? मैने कहा के इसलिए के कभी भी तुम कुच्छ और मत सोच लेना. मैं एक आज़ाद पन्छि हूँ और बंधन में नही रह सकता. एक बार रह लिया शादी करके पर अब भगवान ने मुझे फिर से आज़ाद कर दिया है तो जैसी उसकी मर्ज़ी. यदि ऐसा ना होता तो जैसे चल रहा था चलता रहता. मैं तुम्हारा पूरा ख़याल रखूँगा और तुम पर भी कभी कोई दबाव नही डालूँगा. चुदाई केवल और केवल तुम्हारी मर्ज़ी से ही करूँगा. वो रुआंसी होकर बोली तुम ऐसे क्यों कह रहे हो. मैने कहा के पहले ही स्पष्ट बात कह देना ठीक होता है बाद में कोई परेशानी नही होती. वो बोली के ठीक है मुझे मंज़ूर है पर दोस्ती का हक़ तो रहेगा ना मेरा. मैने कहा के दोस्ती तो पक्की रहेगी और वो मैं तो कभी नही भूलूंगा और सच्चे दोस्त की तरहा हमेशा तुम्हारा साथ दूँगा.

वो बाथरूम में जाने के लिए उठी पर उसकी टाँगों ने उसका साथ नही दिया और वो गिरने को थी के मैने तेज़ी से उठकर उसको पकड़ लिया और सहारा देकर बाथरूम में ले आया और सीट पर बिठा दिया और टब में गरम पानी भरने लगा. उसने पूछा के ये क्या कर रहे हो तो मैने मुस्कुराते हुए कहा के तुम्हारा इलाज करने जा रहा हूँ ताकि तुम अपने पैरों पर खड़ी हो सको. वो कुच्छ नही बोली और अपनी चूत को धोने लग गयी. फिर वो खड़ी हुई और मैने सहारा देकर उसको टब में बिठा दिया और उसको कहा के तनवी गरम पानी से अपनी चूत के सिकाई कर लो और तब तक करती रहना जब तक यह पानी ठंडा ना हो जाए. तुमको आराम मिलेगा और तुम फिर से बिना सहारे के खड़ी हो सकोगी.

मैं बाहर आ गया और बेड पर बैठ कर सोचने लगा. फिर मैने तनवी को अपना राज़दार बनाने का फ़ैसला कर लिया. मेरे अकेले से सब कुच्छ नही हो सकता था. वो या कोई भी साथ हो तो सब काम जल्दी हो सकता था. मैं बात कर रहा हूँ अपने मिशन की जिस पर चलते मैने पहली लड़की मिनी को पकड़ा था और चोद भी लिया था और उम्मीद थी के अब वो अपनी पढ़ाई में ध्यान देगी और अच्छे नंबर लाएगी. जैसे ही तनवी बाहर आई मैने उसको अपने पास बुलाया. वो पहले से काफ़ी ठीक थी पर अभी उसकी चाल में लड़खड़ाहट थी. मैने उसको अपने पास बिठा लिया और उसको कहा के मैं उसको कुच्छ बताना और समझाना चाहता हूँ. क्या उसने पूछा? मैने कहा के मैं उसको जो बताने जा रहा हूँ वो मेरे सीने में दबा एक ऐसा राज़ है जो मैने आज तक किसी से शेर नही किया और उसको दोस्ती के नाते से सब बताने जा रहा हूँ और चाहता हूँ के वो मेरी बात के मर्म को जाने और समझे और अगर चाहे तो मेरी मदद करे और ना चाहे तो ना करे पर इस राज़ को अपने तक ही रखे.

फिर मैने उस पर प्रिया से लेकर मिनी तक के अपने सारे अनुभव खोल के रख दिए और साथ ही अपनी सोच भी उसको बता दी और फिर उसके जवाब का इंतेज़ार करने लगा. इस बीच मैं तनवी को नीचे अपनी स्टडी में ले आया था ताकि उसको चार्ट्स और दूसरी डीटेल्स दिखा सकूँ. तनवी मेरी सारी बातें खामोशी से सुनती रही और मेरे चुप होने के बाद भी काफ़ी देर तक खामोश रही फिर बोली के मुझे लग तो रहा था के कुच्छ है पर तुम इतने गहरे हो मैं यह सोच भी नही सकती थी. मैने कहा के देखो मैं जो हूँ और क्यों हूँ और इस के पीछे मेरी क्या सोच है वो सब मैने तुमसे बता दी है, कुच्छ भी नही छिपाया एक दोस्त की तरह और अकेला इतने बड़े काम को अंजाम नही दे सकता इसलिए तुमसे मदद की उम्मीद करके तुमसे सब कुच्छ कह दिया है. अब तुम्हारी मर्ज़ी है मदद करने या ना करने की. मैं तुम पर कोई भी दबाव नही डालूँगा और अगर तुम नही चाहोगी तो बस यह उम्मीद ज़रूर करूँगा के तुम यह सब कुच्छ अपने तक ही रखोगी. वो बोली के राज यह बात तो तुम भूल ही जाओ के यह मैं किसी को बता दूँगी. लेकिन मुझे सोचने का टाइम दो ताकि मैं अच्छी तरह सोच कर तुम्हे जवाब दूं के मैं इसमे तुम्हारी क्या और कितनी मदद कर सकती हूँ. मैने उसको अपने आलिंगन में ले लिया और उसको लेकर अपने बेडरूम मे आ गया.

मैने उसको कहा के वो आराम से सोच ले और अगर कुच्छ पूच्छना हो तो पूच्छ ले मैं तैयार हूँ. उसने कहा के पूच्छने को कुच्छ भी नही है, सब कुच्छ तो पूरी डीटेल्स में उसको बता दिया है. फिर वो बोली के यार तुम हो बहुत डेरिंग. मैने कहा के डेरिंग की कोई बात नही है मैने अपनी सेफ साइड करके ही सब कुच्छ किया है. लड़कियाँ सारी अडल्ट हो चुकी हैं और उनकी रज़ामंदी रेकॉर्ड करके ही चुदाई की है ऐसे नही. फिर तो ठीक है कोई प्राब्लम ही नही है वो बोली. अगर सिर्फ़ उन लड़कियों के साथ ही करना है जो अडल्ट हैं और राज़ी हैं फिर तो कोई भी परेशानी नही हो सकती. मैं कहा के ज़बरदस्ती के तो मैं बहुत ही हिलाफ हूँ. सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार से अगर लड़की चाहे तो मैं कुच्छ करता हूँ वरना कभी नही करूँगा. तनवी बहुत खुश हुई और बोली की फिर तो मैं तैयार हूँ तुम्हारी हर तरह की मदद करने के लिए. मैने कहा के तुम लड़की हो और लड़कियाँ तुम्हारे साथ खुल कर बात करने मैं शरमाएगी भी नही और तुम उनको समझा भी जल्दी लोगि. और यही कारण है के मैने तुमसे बात करने की हिम्मत भी की है. मैने उनके बर्ताव भी रेकॉर्ड किए हैं और उनकी वीक्ली असाइनमेंट रिपोर्ट के चार्ट्स भी बना रखे हैं. तुमको तो बस उनसे बात करके उनको तैयार करना है. उसने कहा के ठीक है पहले हम मिनी का रिज़ल्ट देख लेते हैं अगर उसमे इंप्रूव्मेंट नज़र आता है तो फिर तो यह तरीका ठीक है नही तो सोचना पड़ेगा. मैने भी कहा के बिल्कुल ठीक है.

मैने कहा के इस काम के लिए हमको एक फ्रंट भी बनाना होगा ताकि लड़कियाँ आसानी से आ सकें और सारे काम बिना किसी की नज़र मैं आए ही हो सकें. उसने कहा के वो तो करना ही पड़ेगा. मैने तनवी को बताया के हम नीचे जिम क्लब खोल लेते हैं क्योंकि तुम जिम में इन्स्ट्रक्टर का रोल बखूबी कर सकती हो. अगर बाहर की कोई लड़की आती भी है तो तुम उसकी सक्रीनिंग कर सकती हो और कोई काम की लड़की हो तो उसको ही मेंबरशिप देना बाकी को टाल देना के अभी फुल है जब कोई स्पॉट खाली होगा तो उसको बता देंगे. तनवी बोली के यार तुम डेरिंग होने के साथ साथ चालाक भी बहुत हो. मैने कहा के हर बात का ध्यान रखना पड़ता है और फिर यहाँ आने पर लड़कियों को ऊपेर अपने पास ले जाने में भी तो आसानी रहेगी और किसी को पता भी नही चलेगा. तनवी बड़ी खुश हुई और बोली के जिम की फीस कितनी रखेंगे. मैने कहा के नो प्रॉफिट नो लॉस पर चलेंगे. तुम्हारी इन्स्ट्रक्टर की सॅलरी निकाल के 20% एक्सट्रा रखेंगे ताकि एक्विपमेंट की सर्विसिंग और रिपेर आदि के लिए, और कुच्छ नही. वो बोली के मेरी सॅलरी? मैने कहा के हां यह तुम्हारी एक्सट्रा ड्यूटी होगी तो सॅलरी भी तो होनी चाहिए ना. वो बड़ी खुश हुई और बोली के ये ठीक रहेगा ताकि किसी को कोई शक़ भी नही होगा. सब कुच्छ फाइनल कर के हम एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गये.

सुबह मेरी आँख खुली तो तनवी मेरे बाजू पर सर रख के गहरी नींद में थी और उसके होंठों पर एक दिलकश मुस्कान थी. मैने अपना हाथ बढ़ा कर उसके बालों की लट को जो आगे आ गयी थी हटाया और उसके होंठों पर अपने होंठ बड़े प्यार से रख दिए. उसने अपनी आँखें खोल कर मुझे देखा तो चौंक कर पीछे को हुई. मैने उसको वापिस अपनी और खींचा और अपनी बाहों में कस लिया और कहा के क्या बात है डर गयी क्या. तब तक तनवी पूरी तरह जाग चुकी थी और मुस्कुरा के बोली के नही चौंक ज़रूर गयी थी. मैने उसको ज़ोर से भींच लिया तो उसके मम्मे मेरी छाती में चुभने लगे और मेरा लंड उसकी जांघों में. उसने हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और बोली के ये आराम कब करता है तो मैने हंस कर जवाब दिया के आराम ही तो कर रहा था पर तुम्हारी चूत की महक ने इसी बेचैन कर दिया है और यह पुनर्मिलन करना चाहता है. मेरी बात सुनकर वो खिलखिला कर हंस दी और बोली के वा अभी कल ही तो मिले हैं दोनो. मैने कहा के दोस्ती हो चुकी है ना तो आज फिर इतने करीब देख कर रह नही सका सलामी दे रहा है अटेन्षन मुद्रा में.

फिर क्या था 2 मिनट में ही हमारे कपड़े इधर उधर गिरे पड़े थे और हम एक दूसरे में समा जाने की कोशिश में लग गये थे. तनवी की चूत पनिया गयी थी और मेरे लंड ने भी प्री कम की बूँदें निकाल दी थीं. मैने अपना लंड हाथ में लेकर तनवी की चूत पर रगड़ा और जब चिकनाई से वो फिसलने लगा तो मैने चूत के मुहाने पर रख के थोड़ा सा दबाव डाला. लंड थोड़ा सा फास्कार तनवी की चूत को खोलता हुआ अंदर घुस गया. तनवी के चेहरे पर एक तमतमाहट थी और आनंदतिरेक से उसकी आँखें मंडी हुई थीं. फिर मैं अपने लंड को एक ही धक्के में उसकी चूत में जड़ तक डाल दिया. उसने अपनी आँखें खोल कर मेरी ओर मुस्कुराते हुए देखा और बोली के आराम से चोदो ना. मैने कहा के टाइम कम है इसलिए पूरा अंदर डाल दिया है ताकि तुम्हारी चूत जल्दी से अड्जस्ट करले. चोदुन्गा तो प्यार से ही. फिर मैने पलटी ली और साइड में हो गये दोनो. उसकी एक टाँग उठा कर अपने ऊपेर करली और धीरे धीरे धक्के मारने लगा. इसी तरह प्यार के हिचकोले खाते हुए हम दोनो जब झड़ने के करीब पहुँचे तो मैने उसको अपने नीचे करके 10-15 करारे धक्के लगाए तो तनवी की चूत ने पानी छोड़ दिया और साथ ही साथ मेरे लंड ने भी उसकी चूत में अपने गरम वीर्य की बेरिश कर दी. यह एक बहुत ही सुख कारी अनुभव था हम दोनो के लिए. इसस्में सेक्स के साथ साथ एक प्यार का एहसास भी था जो दोनो को और करीब ले आया और फिर हम जल्दी से नहा धो कर और नाश्ता करके स्कूल के लिए चल पड़े. चलने से पहले मैं तनवी को आंटी प्रेग्नेन्सी टॅबलेट देनी नही भूला. वो एक बार फिर मेरी प्रशंसा में बोली के यार तुम वाकई बहुत ख़याल करने वाले आदमी हो.

स्कूल पहुँच कर मैने कुछ फाइल्स अपने पीसी से तनवी के पीसी में डाल दीं और उसको कहा के इनको स्टडी करले और फिर मुझे बताए के वो किसको शॉर्ट लिस्ट करना चाहती है. हम बाकी की तैयारी कर लेते हैं और जैसे ही कन्फर्म होगा की मिनी के साथ मेरा एक्सपेरिमेंट सक्सेस्फुल हुआ है हम आगे का प्रोग्राम चालू कर देंगे. तनवी ने कहा के ठीक है. छुट्टी से कोई दो घंटे पहले तनवी मेरे पास आई और बोली के उसने तीन लड़कियाँ शॉर्टलिस्ट कर ली हैं पर एक लड़की का जल्दी ही कुच्छ करना पड़ेगा. मेरे पूछ्ने पर उसने बताया के लड़की का नाम मरियम है और उसके लिए हमें मिनी के रिज़ल्ट का इंतेज़ार भी नही कर सकते क्योंकि उस लड़की को कुच्छ कुच्छ पता है प्रिया और नेहा के बारे में. यह उनकी क्लास में ही है और उनकी कुच्छ बातें सुन चुकी है पर वो शरम की वजह से उनसे बात नही कर सकी है और अंदर ही अंदर परेशान है और यही वजह है कि वो पढ़ाई में पिछड़ रही है. तनवी ने आगे बताया के मरियम से वो बात भी कर चुकी है और चाहती है के मैं भी आज ही बात कर लूँ. मैने कहा के नेकी और पूछ पूछ. तनवी हंस दी और उसको भेजती हूँ कहकर चली गयी.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--25

gataank se aage..............

Tanvi ke jhadne ke baad main bhi 10-12 dhakke maar ke jhad gaya aur maine apna lund usski choot mein poora ghusa kar apna garam lava usski choot mein chhod diya. Merey garam veerya ki 3-4 bauchharein Tanvi ki bacchedaani se takraayeen aur unn jhatkon ko wo seh na saki aur kampne lagi. Usske chehre par aseem santushti ke bhaav thhe. Apni aankhein aadhi khol kar ussne meri ore dekha aur apna haath utha kar mujhe aamantrit kiya. Maine ussko apni bahon mein bhar liya aur wo amarbel ki tarah mujhse lipat gayee. Wo reh reh kar sihar uthti aur mujhse lipat jaati. Maine ussko poochha ke kaisi lagi ussko apni pehli chudayee. Wo sharma gayee aur banavati gussey se meri chhati par mukke maarne lagi pyar se. Maine hanste huey usske haath pakad liye aur apni bahon mein ussko bheench liya aur usske kaan mein kaha ladayee karogi to ek baar phir chod daloonga aur tab tak apne lund tumhaari choot mein andar bahar karta rahoonga jab tak tum maafi nahi mangogi. Wo boli theek hai chod lena par abhi nahi, abhi to saans bahut phooli hui hai aur choot mein bhi dard ho raha hai chahey meetha meetha par ho raha hai. Main bahut zor se hans pada aur ussko choom liya. Phir maine kaha ke ab theek hai ab tum chudayee ki bhasha samajh gayee ho aur bolne bhi lagi ho. Wo boli ke tum itne besharam ho ke mujhe bhi besharam bana diya hai. Maine kaha ke jab hum chudayee kar sakte hain to isske baare mein baat karne mein kaisi sharam. Wo muskurayee aur boli ke ahista ahista aadat padegi na main koyi tumhari tarah experienced thode hi hoon. Maine kaha ke poora tajurba bhi kara denge. Ussne ek baar phir mere kandhe mein apna munh chhupa liya aur hansne lagi. Hum kaafi der tak aise hi chipak kar lete rahe aur ek doosre ki saansein ginte rahe.

Bedhyani mein merey haath usski peeth sehlate rahey aur wo kampti rahi. Phir ussne ek gehri sans li aur baith gayi aur boli ke kya jaadu jante ho jo mujhe paagal kar diya hai tumne, mera dil karta hai ki aise hi lipat kar padi rahoon aur tumko chhoroon hi nahi. Maine kaha ke tum mujhe baandhne ki kabhi koshish mat karna. Tum jab tak chaho yahaan reh sakti ho, jab tumhara dil karey hum chudayee kar sakte hain par kabhi bhi yeh mat sochna ke tum mujhe baandh kar rakh sakti ho. Ussne kaha ke aisa kyo keh rahe ho? Maine kaha ke issliye ke kabhi bhi tum kuchh aur mat soch lena. Main ek azad panchhi hoon aur bandhan mein nahi reh sakta. Ek baar reh liya shadi karke par ab bhagwaan ne mujhe phir se azad kar diya hai to jaisi usski marzi. Yadi aisa na hota to jaise chal raha tha chalta rehta. Main tumhara poora khayal rakhoonga aur tum par bhi kabhi koyi dabaav nahi daloonga. Chudayee keval aur keval tumhaari marzi se hi karoonga. Wo ruaansi hokar boli tum aise kyon keh rahey ho. Maine kaha ke pehle hi spasht baat keh dena theek hota hai baad mein koyi pareshaani nahi hoti. Wo boli ke theek hai mujhe manzoor hai par dosti ka haq to rahega na mera. Maine kaha ke dosti to pakki rahegi aur wo main to kabhi nahi bhoolunga aur sacchey dost ki tarha hamesha tumhaara saath doonga.

Wo bathroom mein jaane ke liye uthi par usski taangon ne usska saath nahi diya aur wo girne ko thi ke maine tezi se uthkar ussko pakad liya aur sahara dekar bathroom mein le aaya aur seat par bitha diya aur tub mein garam paani bharne laga. Ussne poochha ke ye kya kar rahe ho to maine muskuraate huey kaha ke tumhara ilaaj karne ja raha hoon taki tum apne pairon par khadi ho sako. Wo kuchh nahi boli aur apni choot ko dhone lag gayee. Phir wo khadi hui aur maine sahara dekar ussko tub mein bitha diya aur ussko kaha ke Tanvi garam paani se apni choot ke sikaayi kar lo aur tab tak karti rehna jab tak yeh paani thanda na ho jaaye. Tumko aaraam milega aur tum phir se bina sahare ke khadi ho sakogi.

Main baahar aa gaya aur bed par baith kar sochne laga. Phir maineTanvi ko apna raazdaar banaane ka faisla kar liya. Mere akele se sab kuchh nahi ho sakta tha. Wo ya koyi bhi saath ho to sab kaam jaldi ho sakta tha. Main baat kar raha hoon apne mission ki jiss par chalte maine pehli ladki Mini ko pakda tha aur chod bhi liya tha aur ummeed thi ke ab wo apni padhayi mein dhyaan degi aur achhe number layegi. Jaise hi Tanvi bahar aayee maine ussko apne paas bulaya. Wo pehle se kaafi theek thi par abhi usski chaal mein ladkhadahat thi. Maine ussko apne paas bitha liya aur ussko kaha ke main ussko kuchh bataana aur samjhana chahta hoon. Kya ussne poochha? Maine kaha ke main ussko jo bataane ja raha hoon wo mere seene mein daba ek aisa raaz hai jo maine aaj tak kissi se share nahi kiya aur ussko dosti ke naate se sab bataane jaa rah hoon aur chahta hoon ke wo meri baat ke marm ko jaane aur samjhe aur agar chahe to meri madad kare aur na chahe to na kare par iss raaz ko apne tak hi rakhey.

Phir maine usspar Priya se lekar Mini tak ke apne saare anubhav khol ke rakh diye aur saath hi apni soch bhi ussko bata di aur phir usske jawab ka intezaar karne laga. Iss beech main Tanvi ko neeche apni study mein le aaya tha taki ussko charts aur doosri details dikha sakoon. Tanvi meri saari baatein khamoshi se sunti rahi aur merey chup hone ke baad bhi kaafi der tak khamosh rahi phir boli ke mujhe lag to raha tha ke kuchh hai par tum itne gehre ho main yeh soch bhi nahi sakti thi. Maine kaha ke dekho main jo hoon aur kyon hoon aur iss ke peechhe meri kya soch hai wo sab maine tumse bataa di hai, kuchh bhi nahi chhipaya ek dost ki tarah aur akela itne badey kaam ko anjaam nahi de sakta issiliye tumse madad ki ummeed karke tumse sab kuchh keh diya hai. Ab tumhaari marzi hai madad karne ya na karne ki. Main tum par koyi bhi dabaav nahi daloonga aur agar tum nahi chahogi to bas yeh ummed zaroor karoonga ke tum yeh sab kuchh apne tak hi rakhogi. Wo boli ke Raj yeh baat to tum bhool hi jaao ke yeh main kissi ko bataa doongi. Lekin mujhe sochne ka time do taki main achhi tarah soch kar tumhe jawab doon ke main issmein tumhari kya aur kitni madad kar sakti hoon. Maine ussko apne aalingan mein le liya aur ussko lekar apne bedroom me aa gaya.

Maine ussko kaha ke wo aaraam se soch le aur agar kuchh poochhna ho to poochh le main taiyaar hoon. Ussne kaha ke poochhne ko kuchh bhi nahi hai, sab kuchh to poori details mein ussko bataa diya hai. Phir wo boli ke yaar tum ho bahut daring. Maine kaha ke daring ki koyi baat nahi hai maine apni safe side karke hi sab kuchh kiya hai. Ladkiyaan saari adult ho chuki hain aur unki razamandi record karke hi chudayee ki hai aise nahi. Phir to theek hai koyi problem hi nahi hai wo boli. Agar sirf unn ladkiyon ke saath hi karna hai jo adult hain aur raazi hain phir to koyi bhi pareshaani nahi ho sakti. Main kaha ke zabardasti ke to main bahut hi hilaaf hoon. Sirf aur sirf pyaar se agar ladki chahey to main kuchh karta hoon varna kabhi nahi karoonga. Tanvi bahut khush hui aur boli ki phir to main taiyaar hoon tumhaari har tarah ki madad karne ke liye. Maine kaha ke tum ladki ho aur ladkiyan tumhaare saath khul kar baat karne main sharmayegi bhi nahi aur tum unnko samjha bhi jaldi logi. Aur yahi kaaran hai ke maine tumse baat karne ki himmat bhi ki hai. Maine unnke bartaav bhi record kiye hain aur unnki weekly assignment report ke charts bhi banaa rakhe hain. Tumko to bas unnse baat karke unnko taiyaar karna hai. Ussne kaha ke theek hai pehle hum Mini ka result dekh letey hain agar ussmein improvement nazar aata hai to phir to yeh tareeka theek hai nahi to sochna padega. Maine bhi kaha ke bilkul theek hai.

Maine kaha ke iss kaam ke liye humko ek front bhi banaana hoga taki ladkiyaan aasaani se aa sakein aur saare kaam bina kissi ki nazar main aaye hi ho sakein. Ussne kaha ke wo to karna hi padega. Maine Tanvi ko bataya ke hum neeche Gym Club khol letey hain kyonki tum gym mein instructor ka role bakhoobi kar sakti ho. Agar baahar ki koyi ladki aati bhi hai to tum usski screening kar sakti ho aur koyi kaam ki ladki ho to ussko hi membership dena baaki ko taal dena ke abhi full hai jab koyi spot khali hoga to ussko bata denge. Tanvi boli ke yaar tum daring hone ke saath saath chalaak bhi bahut ho. Maine kaha ke har baat ka dhyan rakhna padta hai aur phir yahan aane par ladkiyon ko ooper apne paas le jaane mein bhi to aasaani rahegi aur kissi ko pata bhi nahi chalega. Tanvi badi khush hui aur boli ke gym ki fees kitni rakhenge. Maine kaha ke no profit no loss par chalengey. Tumhaari Instructor ki salary nikal ke 20% extra rakhenge taki equipment ki servicing aur repair aadi ke liye, aur kuchh nahi. Wo boli ke meri salary? Maine kaha ke haan yeh tumhaari extra duty hogi to salary bhi to honi chahiye na. Wo badi khush hui aur boli key eh theek rahega taki kissi ko koyi shaq bhi nahi hoga. Sab kuchh final kar ke hum ek doosre ko bahon mein lekar so gaye.

Subah meri aankh khuli to Tanvi merey baaju par sar rakh ke gehri neend mein thi aur usske honthon par ek dilkash muskaan thi. Maine apna haath badha kar usski baalon ki lat ko jo aage aa gayee thi hataya aur usske honthon par apne honth bade pyar se rakh diye. Ussne apni aankhein khol kar mujhe dekha to chaunk kar peechey ko hui. Maine ussko wapis apni aur kheencha aur apni bahon mein kass liya aur kaha ke kya baat hai darr gayee kya. Tab tak Tanvi poori tarah jaag chuki thi aur muskura ke boli ke nahi chaunk zaroor gayee thi. Maine ussko zor se bheench liya to usske mammey meri chhti mein chubhne lage aur mera lund usski janghon mein. Ussne haath badhakar merey lund ko pakad liya aur boli ke ye aaraam kab karta hai to maine hans kar jawab diya ke aaraam hi to kar raha tha par tumhari choot ki mahak ne issey bechain kar diya hai aur yeh punarmilan karna chahta hai. Meri baat sunkar wo khilkhila kar hans di aur boli ke wah abhi kal hi to miley hain dono. Maine kaha ke dosti ho chuki hai na to aaj phir itne kareeb dekh kar reh nahi saka salaami de raha hai attention mudra mein.

Phir kya tha 2 min mein hi hamaare kapde idhar udhar girey padey thhe aur hum ek doosre mein sama jaane ki koshish mein lag gaye thhe. Tanvi ki choot paniya gayee thi aur merey lund ne bhi pre cum ki boondein nikaal di theen. Maine apna lund haath mein lekar Tanvi ki choot par ragda aur jab chiknayee se wo phisalne laga to maine choot ke muhaane par rakh ke thora sa dabaav daala. Lun thora sa phaskar Tanvi ki choot ko kholta hua andar ghus gaya. Tanvi ke chehre par ek tamtamahat thi aur anandatirek se usski aankhein mundi hui theen. Phir main apne lund ko ek hi dhakke mein usski choot mein jad tak daal diya. Ussne apni aankhein khol kar meri ore muskurate huey dekha aur boli ke aaraam se chodo na. Maine kaha ke time kam hai issiliye poora andar daal diya hai taki tumhaari choot jaldi se adjust karle. Chodunga to pyar se hi. Phir maine palti li aur side mein ho gaye dono. Usski ek taang utha kar apne ooper karli aur dheere dheere dhakke marne laga. Issi tarah pyar ke hichkole khate huey hum dono jab jhadne ke kareeb pahunche to maine ussko apne neechey karke 10-15 karaare dhakke lagaaye to Tanvi ki choot ne paani chhor diya aur saath hi saath mere lund ne bhi usski choot mein apne garam veerya ki bearish kar di. Yeh ek bahut hi sukh kaari anubhav tha hum dono ke liye. Issmein sex ke saath saath ek pyar ka ehsaas bhi tha jo dono ko aur kareeb le aaya aur phir hum jaldi se naha dho kar aur nashta karke school ke liye chal padey. Chalne se pehle main Tanvi ko anti pregnancy tablet deni nahi bhoola. Wo ek baar phir meri prashansa mein boli ke yaar tum wakeyi bahut khayal karne waale aadmi ho.

School pahunch kar maine kuch files apne PC se Tanvi ke PC mein daal deen aur ussko kaha ke innko study karle aur phir mujhe bataye ke wo kissko short list kana chahti hai. Hum baaki ki taiyaari kar letey hain aur jaise hi confirm hoga ki Mini ke saath mera experiment successful hua hai hum aage ka programme chalu kar denge. Tanvi ne kaha ke theek hai. Chutti se Koyi do ghante pehle Tanvi merey paas aayi aur boli ke ussne teen ladkiyaan shortlist kar lee hain par ek ladki ka jaldi hi kuchh karna padega. Merey poochhne par ussne bataya ke ladki ka naam Mariyum hai aur usske liye hamein Mini ke result ka intezaar bhi nahi kar sakte kyonki uss ladki ko kuchh kuchh pata hai Priya aur Neha ke baare mein. Yeh unnki class mein hi hai aur unnki kuchh baatein sun chuki hai par wo sharam ki vajah se unnse baat nahi kar saki hai aur andar hi andar pareshaan hai aur yahi vajah hai ki wo padhayee mein pichhad rahi hai. Tanvi ne aage bataya ke Mariyum se wo baat bhi kar chuki hai aur chahti hai ke main bhi aaj hi baat kar loon. Maine kaha ke neki aur poochh poochh. Tanvi hans di aur ussko bhejti hoon kehkar chali gayee.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:04

कुँवारियों का शिकार--26

गतान्क से आगे..............

मैं मरियम की डीटेल्स अपने पीसी पर देख ही रहा था के वो आ गयी और बोली के मे आइ कम इन सर. मैने कहा के हां मरियम आओ और उसको हाथ के इशारे से टेबल की साइड में मेरे पास आने को कहा. मरियम एक 5’, 30-25-32 नाप की गुड़िया जैसी लड़की थी, बहुत ही नाज़ुक सी नीली आँखों वाली गुड़िया. गोरा रंग ऐसा के हाथ लगे मैला हो जाए. मैने नोट किया था के वो बहुत शर्मीली लड़की थी. मैने उसकी ओर देखा और पूछा के मरियम अब तुम छ्होटी बच्ची नही हो तो क्या हम दोस्त की तरह बात कर सकते हैं? और मैने अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दिया. उसने मुझसे हाथ मिलाया और बोली जी हां कर सकते हैं. मैने कहा के मुझे तुम्हारी पढ़ाई की बहुत फिकर हो रही है क्योंकि तुम्हारे नंबर बढ़ने की बजाए कम होते जा रहे हैं जो की ठीक नही है. तुम मुझे बताओ के इसकी वजह क्या है अगर तुम कुच्छ जानती हो तो. जी मैं तनवी मॅम को बता दी हूँ के मेरा दिल और दिमाग़ दोनो पढ़ाई में नही लग रहे, कुच्छ भी याद नही होता है और इसीलिए मेरे मार्क्स कम आ रहे हैं वो बोली.

मैने पूछा के इसकी वजह क्या है यह भी तो बताओ. वो शरम से लाल हो गयी और बोली के जी मैं कुच्छ भी नही बता सकती हूँ मुझे बहुत शरम लगती है. मैने खड़े होकर उसको अपने पास आने को कहा और उसके पास आने पर उसकी पीठ पर हाथ रख कर सहलाया और उसको बहुत प्यार से कहा के शरमाने से तो काम नही चलेगा मुझे दोस्त माना है तो सॉफ सॉफ बताओ और बिल्कुल भी डरो नही और शरमाओ नही. मेरे छूने पर वो काँप गयी और बोली जी मैने प्रिया और नेहा की पूरी बातें नही सुनी हैं पर जितना मैं सुन पाई हूँ उस से मैं जान गयी हूँ के वो दोनो…… चुद चुकी हैं मैने उसकी बात पूरी की. मरियम ने शरम के मारे अपनी आँखें बंद कर ली और मुझसे लिपट कर मेरी छाती में मुँह छुपा कर बोली जी मेरी फॅमिली एक बहुत ही ओर्थोडोक्‍ष कन्सर्वेटिव फॅमिली है और मुझे बहुत शरम लगती है सॉफ लफ़्ज़ों में कहने में. मैने कहा के देखो हम दोस्त हैं और दोस्ती में कोई शरम, थॅंक यू या सॉरी नही चलता है. सॉफ सॉफ नही बोलॉगी तो मैं अपनी दोस्त की मदद कैसे कर सकूँगा. वो कांप गयी और बोली के मैं भी वो सब करना चाहती हूँ. मैने कहा के ठीक है अगर वो चाहती है तो उसको भी चोद कर मज़ा देंगे पर एक प्रॉमिस करना होगा. उसने पूछा के क्या? मैने कहा के उसके बाद उसे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना होगा और अगर उसने इंप्रूव्मेंट नही दिखाई तो आगे से मैं उसकी कोई मदद नही करूँगा. जी प्रिया और नेहा भी तो नॉर्मल हो गयी हैं तो मैं भी नॉर्मल हो जाउन्गि इसके बाद. मैने कहा के देखो तुम साफ़ बोलना शुरू कर दो नही तो मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकूँगा. वो बोली के आदत नही है साफ बोलने की धीरे धीरे सीख लूँगी.

मैने उसको टटोलने के लिए कहा के तुम इतनी नाज़ुक और छ्होटी हो मुझे नही लगता के तुम पहली चुदाई का दर्द बर्दाश्त कर सकोगी. वो बोली के मैं छ्होटी नही हूँ लगती हूँ. कैसे, मैने पूछा तो वो थोड़ा सा रुकी और पीछे होकर अपनी शर्ट के बटन खोलने लगी और फिर उसने दोनो पल्ले हटाकर मुझे अपनी चूचियाँ दिखाईं और बोली देखो मेरी चूचियाँ भी हैं क्या अभी भी मैं तुम्हें छ्होटी लगती हूँ? उसकी चुचियाँ छ्होटी ही थीं एक बड़े से नींबू जितनी और उंनपर जड़े हुए हीरे के जैसे उसके गुलाबी निपल्स अनार के बड़े से दाने की तरह चमक रहे थे. मैने हाथ बढ़कर एक को पकड़ा और दूसरे हाथ से मरियम को घुमा के उसकी पीठ अपनी तरफ कर ली. मेरा हाथ उसकी चूची पर काँप रहा था जैसे दबाने पर वो नाज़ुक सी चीज़ टूट ना जाए. मरियम मेरे हाथ के एहसास से काँप रही थी और उसके होंठ भी लराज़ रहे थे. मैने उसकेकाँपते होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए और चूसने लगा. वो तेज़ी से कांप उठी और तड़प कर मुझसे लिपट गयी और मुझे अपनी बाहों में कस कर बोली के प्लीज़ मुझे तद्पओ मत और कुच्छ करो. मैने उसको अपने साथ चिपका लिया और उसको पूछा के क्या वो आज स्कूल के बाद रुक सकती है? उसने कहा के रुक तो सकती हूँ पर क्या बहाना करूँगी? तो मैने कहा के तुम्हारे घर फोन करवा देता हूँ तनवी से के तुमको वो स्पेशल क्लास दे रही है क्योंकि तुम दो सब्जेक्ट में बहुत कमज़ोर हो. वो बोली के ठीक है. मैने उसको कहा के अपने कपड़े ठीक करके क्लास में जाए और छुट्टी के बाद तनवी मॅम के पास आ जाए वो उसको बता देगी के क्या करना है. मरियम ने शर्ट के बटन लगाए और शर्ट ठीक करके बोली के मैं आ जाउन्गि और बाहर चली गयी. मैने तनवी को बुलाया और कहा के मारीयम के घर फोन कर्दे और केहदे के पढ़ाई के बाद वो खुद उसको घर छ्चोड़ देगी कोई फिकर ना करें. फोन उसकी बड़ी बहन ने उठाया और तनवी की बात सुन कर बोली के ठीक है पर लड़की का ख़याल रखें और हिफ़ाज़त से घर भिजवा दें. तनवी ने तसल्ली दी और कहा के वो खुद उसको शाम तक घर पहुँचा देगी और फोनकाट दिया.

छुट्टी के बाद तनवी अपने साथ मरियम को लेकर चली गयी और मैं भी घर आ गया. जल्दी से खाना खा कर नौकरों को छुट्टी दी और तनवी को फोन करके कहा के 1स्ट्रीट फ्लोर पर आ जाए मरियम को लेकर. 1स्ट्रीट फ्लोर पर घर का सबसे बड़ा बेडरूम था. मैं ऊपेर पहुँचा और तनवी के साथ मरियम नीचे आ गयी. मैने दरवाज़ा खोल कर उनको अंदर किया और लॉक करके बेडरूम में ले आया. मेरे इशारे पर तनवी ने और मैने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और नंगे हो गये. मरियम हैरान होकर कभी मुझे और कभी तनवी को देख रही थी तो मैने उसको कहा मरियम घबराओ नही तनवी के साथ होने से तुम्हें आसानी होगी वरना पहली चुदाई का दर्द तुम से नही पओगि. यह तुम्हें संभाल लेगी. मरियम को थोड़ी तसल्ली हुई और उसने भी अपने कपड़े उतार दिए. फिर तनवी ने सारे कपड़े ठीक से फोल्ड करके रख दिए और मरियम काहाथ पकड़ कर मेरे पास ले आई. मैने मरियम को अपने साथ चिपका लिया और उसकी पीठ सहलाते हुए उसको कहा के सोच लो अभी भी वक़्त है अगर तुम चाहो तो अभी भी तनवी तुम्हें घर छ्चोड़ आएगी. मरियम ने कहा के नही मैने बहुत सोच समझ कर यह फ़ैसला किया है और मैं आज ज़रूर चुदवाना चाहती हूँ. मैं उसको अपने साथ चिपकाए हुए ही बेड पर बैठ गया और उसको अपनी टाँगों के बीच खड़ा कर लिया. मरियम मेरे लंड को देख कर बोली के तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है यह मेरी छ्होटी सी चूत में कैसे जाएगा. मैं मुस्कुरा दिया और उसको बोला के हरेक चूत जादू की डिबिया होती है. लंड कितना भी मोटा हो वो फैल कर अपने अंदर ले लेती है. मेरा लंड तो कोई खास मोटा नही है. हां पहली बार जब यह तुम्हारी चूत में घुसेगा तब तुम्हें दर्द होगा और वो तुमको सहना पड़ेगा अगर चुदवाना चाहती हो तो. वो बोली के दर्द तो मैं सह लूँगी पर मज़ा भी आएगा ना.

मैने हंसकर कहा के मज़ा तो बहुत आएगा और इतना आएगा के तुम सोच भी नही सकती. वो बोली के फिर देर ना करो जल्दी से मुझे चोद डालो मैं और इंतेज़ार नही कर सकती. मैने कहा के थोड़ा सबर करो ऐसे ही नही चोदा जाता पहले चूत को तैयार करना पड़ता है और जब चूत लंड लेने के लिए तैयार हो जाती है तभी चोदा जा सकता है. और यह पहली ही नही हर बार की चुदाई के लिए ज़रूरी है. फिर मैने उसको कहा के अब तुम बोलो नही और मैं और तनवी जो करते हैं करने दो. और तुम भी अपने हाथों और मुँह का इस्तेमाल करती रहना.

मैने बहुत प्यार से उसस्के पूरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया. वो थी ही इस काबिल. बिल्कुल नाज़ुक सी गुड़िया जैसी के कहीं ज़ोर से झटका भी लग गया तो टूट ना जाए. मैं सोच रहा था के इस गुड़िया का क्या होगा जब लंड इसकी चूत में घुसेगा इसकी चूत को फाड़ कर. फिर मैने यही तय किया के लंड इसको अत्यधिक उत्तेजित अवस्था में पहुँचाकर ही इसकी चूत में डालूँगा ताकि दर्द इसको कम से कम महसूस हो. दर्द का पहला झटका ही होता है जो असहनीया होता है उसके बाद तो दर्द कम होता जाता है. मैने उसकी छ्होटी सी चूची को अपने मुँह में भर लिया और उसको चाटने लगा. उधर तनवी भी पीछे रहने वाली नही थी उसने भी एक चूची पर अपना मुँह रख दिया और चूसने लगी. हमारे हाथ उसके शरीर का जायज़ा ले रहे थे कभी उसकी जांघों के निचले हिस्से पर तो कभी उसकी चिकनी गोल गांद पर फिसल के उसके पेट पर आ जाते और कभी उसकी चूत की परीकार्मा करते पर उसकी चूत को नही छ्छू रहे थे. फिर मैने तनवी से कहा के वो मरियम के ऊपेर के हिस्से को प्यार करे और मैं उसके निचले हिस्से की खबर लेता हूँ. तनवी मुस्कुरा कर बोली के हां यह ठीक रहेगा.

मैं उठकर मरियम के नीचे की ओर आया और उसकी टाँगें सहलाते हुए घुटनों से मोदकर अपने कंधों पर रख ली और दोनो हाथों को उसकी जांघों पर प्यार से फेरने लगा. अपना मुँह मैने उसकी बिना बालों की चूत पर रख दिया और उसकी चूत की दरार पर अपनी जीभ चलाने लगा. मरियम की उत्तेजना क्षण प्रतिक्षण बढ़ती जा रही थी और अब वो बबाड़ाने लगी आआआआआााआअ, हााआआ, ऊऊऊऊओहूऊऊओ, हााआआइईईई, सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईई, उूुुुउउन्ह, हूऊऊऊऊऊऊं, ईईईई क्य्ाआआआअ हूऊऊऊऊ रहाआआआआ हाआआआआई मुऊऊुुुुउुझीईईई, आआआआाआग लगिइिईईईईईईईईईईईईईईई हाआआआआई मेरिइईईईईईईईई चूऊऊऊऊऊथ मीईईईईईईईन. मज़ाआआआआअ भीईीईईईईईईईईईईई बहुउऊुुुुुुुुउउट आआआआअ रहाआआआआ हाआआआ बीई चााआआऐयणिईीईईईईईईईईईईईई भीईीईईईईईईईईईईईई हूऊऊऊऊ रहियीईईईईईईईईईईईईई हाआआआआआआआ. जल्दीीईईईईईईईईईईईईईई कुउुुुुुुउऊच्च करूऊऊऊऊ. मैने उसकी चूत की दोनो फाँकें अपनी उंगलियों की मदद से फैला दीं. उसकी गुलाब की पट्टियों जैसी दोनो पुट्तियाँ फड़फदा रही थीं और उसका चने के आकार का दाना उभर कर स्पष्ट नज़र आ रहा था. मैने उसपर अपनी जीब रखी तो मारयम उच्छलने को हुई पर मेरी और तनवी की मिलीजुली पकड़ के कारण वो ज़्यादा नही उच्छल सकी. फिर मैं अपनी जीभ से उसकी दोनो पुट्तियों को चाटने लगा. वो सीत्कार कर उठी. मरियम की उत्तेजना को देखते हुए मैने तेज़ी से एक टवल उठाकर उसकी छ्होटी सी गांद के नीचे रखा और लूब्रिकेटिंग जेल्ली की शीशी उठाकर अपनी उंगली से उसकी चूत के छल्ले पर लगाई और अपनी उंगली से उसके छल्ले को फैलाने लगा. मुझे दिख रहा था के उसकी चूत का छल्ला ना फैलाया गया तो मेरे लंड को छ्चील देगा. छल्ले पर मेरी उंगली को भी वो नही सह पा रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी.

मैने मरियम की छोटी सी चूत में ढेर सारी जेल्ली लगा दी और अपने लंड पर भी अच्छी तरह से जेल्ली रगद्कर उसको चिकना कर दिया. फिर मैने तनवी से कहा के मरियम को संभाले क्योंकि मैं उसकी चूत में लंड घुसाने जा रहा हूँ. तनवी ने कहा के तुम डालो मैं देख रही हूँ. मैने अपना लंड मरियम की चूत के छल्ले से भिड़ा दिया और दबाव डालने लगा. थोड़ा सा दबाव बढ़ने पर मेरे लंड का टोपा मरियम की चूत में घुस गया और वो तड़प गयी. मैने उसको पूछा के दर्द हुआ क्या? थोड़ा सा, उसने कहा. मैने कहा के कोई बात नही अब थोड़ा ज़्यादा होगा जब तुम्हारी कुमारी झिल्ली फाड़ के मेरा लंड तुम्हारी चूत में घुसेगा तो. उसकी उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी के वो बोली जो भी होना है होने दो बस जल्दी करो अब मैं और बर्दाश्त नही कर सकती. मैने थोड़ी जेल्ली और हमारे संगम स्थल पर लगाई और फिर मरियम की दोनो जांघों को दबा कर एक ज़ोरदार झटका मारा. तनवी ने अपने मुँह में मरियम की चीख दबा दी वरना जाने कहाँ तक वो सुनाई देती. मरियम की आँखें पलट गयी और वो ज़ोर से छटपटाने की नाकाम कोशिश करने लगी. तनवी ने उसे जकड़ा हुआ था और मरियम कुच्छ नही कर पाई. उसकी कुमारी झिल्ली मेरे लंड की चोट से फॅट चुकी थी और उसमे से बहता खून नीचे पड़े टवल को लाल कर रहा था. उसकी टाँगें ज़ोर से कांप रही थीं. मैने 2 मिनट रुक कर अपने लंड को धीरे धीरे उसकी चूत में थोड़ा सा अंदर बाहर करने लगा. उधर तनवी उसकी चूचियों को चाट और चूस रही थी और साथ ही अपने दोनो हाथों से भी सहला रही थी.

थोड़ी देर में ही मरियम का दर्द कम हो गया और वो चुदाई का मज़ा लेने लगी. जब उसने अपनी गांद हिलानी शुरू की तो मैने अपने लंड को पूरा अंदर करने की कोशिश शुरू कर दी और 10-15 धक्कों में ही मेरा लंड पूरा उसकी चूत में समाने लगा और उसकी बcचेदानि से टकराने लगा और उसकी उत्तेजना में वृद्धि होने लगी, जिसके फलस्वरूप मरियम की आहें फिर से शुरू हो गयी. वो अब नीचे से पूरा ज़ोर लगा कर अपनी गांद उठाती थी और मेरे लंड को उसकी चूत पूरा लील जाती थी. वो फिर बोलने लगी के हाए रे मैं तो पहले के मज़े में ही पागल हो रही थी पर यह चूत में लंड के आने जाने ने तो मुझे मार ही देना है. मुझे समझ ही नही आ रही के मेरे साथ क्या हो रहा है. मैं हवा में तार रही हूँ या फिर आसमान में डूब रही हूँ मुझे पता नही चल रहा. यह कैसा झूला है जो मुझे पता नही कैसे हिलोरे दे रहा है. दोस्त मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदो, मेरी चूत की चटनी बना दो अपने मूसल से. फाड़ दो इसको साली बहुत खुजली होती है इसमे. सारी खुजली मिटा दो इसकी. ज़ोर से करो. पीस दो मुझे और मेरी चूत को. हाआआाआआइईईईई माआआआऐं गइईईईईई, तनवी डीईईईईईईईईई मुऊऊउुझीईईईई पकड़ लूऊऊऊऊऊऊऊऊ. हआाआआइईई अम्मिईी

ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई. और इसके साथ ही मरियम का जिस्म अकड़ गया और उसने अपनी गांद पूरी तरह से जितनी उठा सकती थी उठा दी और झाड़ गयी. मैने भी उसकी गांद को अपने हाथों में जाकड़ कर कस्के 8-10 करारे धक्के लगाए और मैं भी झाड़ गया.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--26

gataank se aage..............

Main Mariyum ki details apne PC par dekh hi raha tha ke wo aa gaye aur boli ke may I come in sir. Maine kaha ke haan Marium aao aur ussko haath ke ishaarey se table ki side mein merey paas aane ko kaha. Mariyum ek 5’, 30-25-32 naap ki gudiya jaisi ladki thi, bahut hi nazuk si neeli ankhon wali gudiya. Gora rang aisa ke haath lagey maila ho jaaye. Maine note kiya tha ke wo bahu sharmilee ladki thi. Maine usski ore dekha aur poochha ke Mariyum ab tum chhoti bacchi nahi ho to kya hum dost ki tarah baat kar sakte hain? Aur maine apna haath usski ore badha diya. Ussne mujhse haath milaya aur boli ji haan kar sakte hain. Maine kaha ke mujhe tumhaari padhayee ki bahut fikar ho rahi hai kyonki tumhaare number badhne ki bajaaye kam hote jaa rahe hain jo ki theek nahi hai. Tum mujhe batao ke isski vajah kya hai agar tum kuchh jaanti ho to. Ji main Tanvi mam ko bata di hoon ke mera dil aur dimaag dono padhayee mein nahi lag rahey, kuchh bhi yaad nahi hota hai aur issiliye merey marks kam aa rahey hain wo boli.

Maine poochha ke isski vajah kya hai yeh bhi to bataao. Wo sharam se laal ho gayee aur boli ke ji main kuchh bhi nahi bata sakti hoon mujhe bahut sharam lagti hai. Maine kharey hokar ussko apne paas aane ko kaha aur usske paas aane par usski peeth par haath rakh kar sehlaya aur ussko bahut pyaar se kaha ke sharmane se to kaam nahi chalega mujhe dost maana hai to saaf saaf batao aur bilkul bhi daro nahi aur sharmao nahi. Mere chhoone par wo kaamp gayi aur boli ji maine Priya aur Neha ki poori baatein nahi suni hain par jitna main sun paayi hoon uss se main jaan gayee hoon ke wo dono…… Chud chuki hain maine usski baat poori ki. Mariyum ne sharam ke maarey apni aankhein band kar li aur mujhse lipat kar meri chhati mein munh chupa kar boli ji meri family ek bahut hi orthodox conservative family hai aur mujhe bahut sharam lagti hai saaf lafzon mein kehne mein. Maine kaha ke dekho hum dost hain aur dosti mein koyi sharam, thank you ya sorry nahi chalta hai. Saaf saaf nahi bologi to main apni dost ki madad kaise kar sakoonga. Wo kamp gayi aur boli ke main bhi wo sab karna chahti hoon. Maine kaha ke theek hai agar wo chahti hai to ussko bhi chod kar maza denge par ek promise karna hoga. Ussne poochha ke kya? Maine kaha ke usske baad ussey apni padhayee par poora dhyaan dena hoga aur agar ussne improvement nahi dikhayee to aage se main usski koyi madad nahi karoonga. Ji Priya aur Neha bhi to normal ho gayee hain to main bhi normal ho jaaungi isske baad. Maine kaha ke dekho tum saaf bolna shuru kar do nahi to main tumhari madad kaise kar sakoonga. Wo boli ke aadat nahi hai saaf bolne ki dheere dheere seekh loongi.

Maine ussko tatolne ke liye kaha ke tum itni nazuk aur chhoti ho mujhe nahi lagta ke tum pehli chudayi ka dard bardasht kar sakogi. Wo boli ke main chhoti nahi hoon lagti hoon. Kaise, maine poochha to wo thora sa ruki aur peechhe hokar apni shirt ke button kholne lagi aur phir ussne dono palley hatakar mujhe apni choochiyaan dikhayeen aur boli dekho meri choochiyaan bhi hain kya abhi bhi main tumhein chhoti lagti hoon? Usski chhochiyaan chhoti hi theen ek badey se nimboo jitni aur unnpar jadey huey heere ke jaise usske gulaabi nipples anaar ke badey se daane ki tarah chamak rahe thhe. Maine haath badhakar ek ko pakda aur doosre haath se Mariyum ko ghuma ke usski peeth apni taraf kar li. Mera haath usski choochi par kaamp raha tha jaise dabaane par wo nazuk si cheez toot na jaye. Mariyum mere haath ke ehsaas se kaamp rahi thi aur usske honth bhi laraz rahe thhe. Maine usske kampte honthon par apne honth chipka diye aur choosne laga. Wo tezi se kamp utthi aur tadap kar mujhse lipat gayi aur mujhe apni bahon mein kas kar boli ke please mujhe tadpao mat aur kuchh karo. Maine ussko apne saath chipka liya aur ussko poochha ke kya wo aaj school ke baad ruk sakti hai? Ussne kaha ke ruk to sakti hoon par kya bahana karoongi? To maine kaha ke tumhaare ghar phone karva deta hoon Tanvi se ke tumko wo special class de rahi hai kyonki tum do subject mein abhut kamzor ho. Wo boli ke theek hai. Maine ussko kaha ke apne kapde theek karke class mein jaaye aur chhutti ke baad Tanvi mam ke paas aa jaaye wo ussko bata degi ke kya karna hai. Mariyum ne shirt ke button lagaye aur shirt theek karke boli ke main aa jaaungi aur bahar chali gayee. Maine Tanvi ko bulaya aur kaha ke Mariym ke ghar phone karde aur kehde ke padhayee ke baad wo khud ussko ghar chhod degi koyi fikar na karein. Phone usski badi bahan ne uthaya aur Tanvi ki baat sun kar boli ke theek hai par ladki ka khayal rakhein aur hifazat se ghar bhijva dein. Tanvi ne tasalli di aur kaha ke wo khud ussko shaam tak ghar pahuncha degi aur phone kaat diya.

Chutti ke baad Tanvi apne saath Mariyum ko lekar chali gayi aur main bhi ghar aa gaya. Jaldi se khana kha kar naukaron ko chutti di aur Tanvi ko phone karke kaha ke 1st floor par aa jaye mariyum ko lekar. 1st floor par ghar ka sabse bada bedroom tha. Main ooper pahuncha aur Tanvi ke saath Mariyum neeche aa gayi. Maine darwaza khol kar unnko andar kiya aur lock karke bedroom mein le aaya. Mere ishare par Tanvi ne aur maine apne kapde utaarne shuru kar diye aur nange ho gaye. Mariyum hairaan hokar kabhi mujhe aur kabhi Tanvi ko dekh rahi thi to maine ussko kaha Mariyum ghabrao nahi Tanvi ke saath hone se tumhein aasaani hogi varna pehli chudayi ka dard tum seh nahi paogi. Yeh tumhein sambhal legi. Mariyum ko thori tasalli hui aur ussne bhi apne kapde utaar diye. Phir Tanvi ne saare kapde theek se fold karke rakh diye aur Mariyum ka haath pakad kar merey paas le aayee. Maine Mariyum ko apne saath chipka liya aur usski peeth sehlaate huey ussko kaha ke soch lo abhi bhi waqt hai agar tum chaho to abhi bhi Tanvi tumhein ghar chhod aayegi. Mariyum ne kaha ke nahi maine bahut soch samajh kar yeh faisla kiya hai aur main aaj zaroor chudna chahti hoon. Main ussko apne saath chipkaye huey hi bed par baith gaya aur ussko apni tangon ke beech khada kar liya. Mariyum merey lund ko dekh kar boli ke tumhara lund to bahut bada hai yeh meri chhoti si choot mein kaise jaayega. Main muskura diya aur ussko bola ke harek choot jaadu ki dibiya hoti hai. Lund kitna bhi mota ho wo phail kar apne andar le leti hai. Mera lund to koyi khas mota nahi hai. Haan pehli baar jab yeh tumhari choot mein ghusega tab tumhein dard hoga aur wo tumko sehna padega agar chudna chahti ho to. Wo boli ke dard to main seh loongi par maza bhi aayega na.

Maine hanskar kaha ke maza to bahut aayega aur itna aayega ke tum soch bhi nahi sakti. Wo boli ke phir der na karo jaldi se mujhe chod dalo main aur intezaar nahi kar sakti. Maine kaha ke thora sabar karo aise hi nahi choda jaata pehle choot ko taiyaar karna padta hai aur jab choot lund lene ke liye taiyaar ho jaati hai tabhi choda ja sakta hai. Aur yeh pehli hi nahi har baar ki chudayi ke liye zaroori hai. Phir maine ussko kaha ke ab tum bolo nahi aur main aur Tanvi jo karte hain karne do. Aur tum bhi apne haathon aur munh ka istemaal karti rehna.

Maine bahut pyar se usske poore shareer ko sehlana shuru kar diya. Wo thi hi iss kabil. Bilkul nazuk si gudiya jaisi ke kahin zor se jhatka bhi lag gaya to toot na jaaye. Main soch raha tha ke iss gudiya ka kya hoga jab lund isski choot mein ghusega isski choot ko phadkar. Phir maine yahi tay kiya ke lund issko atyadhik uttejit awasha mein pahunchakar hi isski choot mein daloonga taki dard issko kam se kam mehsoor ho. Dard ka pehla jhatka hi hota hai jo asahneeya hota hai usske baad to dard kam hota jaata hai. Maine usske chhoti si choochi ko apne munh mein bhar liya aur ussko chaatne laga. Udhar Tanvi bhi peechhe rehne waali nahi thi ussne bhi ek choochi par apna munh rakh diya aur choosne lagi. Humaare haath usske shareer ka jayza le rahey thhe kabhi usski janghon ke nichle hiss par to kabhi usski chikni gol gaand par phisal ke usske pet par aa jaate aur kabhi usski choot ki parikarma karte par usski choot ko nahi chhoo rahey thhe. Phir maine Tanvi se kaha ke wo Mariyum ke ooper ke hissey ko pyar karey aur main usske nichle hissey ki khabar leta hoon. Tanvi muskura kar boli ke haan yeh theek rahega.

Main uthkar Mariyum ke neeche ki ore aaya aur usski taangein sehlate huey ghutnon se modkar apne kandhon par rakh li aur dono haathon ko usski janghon par pyar se pherne laga. Apna munh maine usski bina baalon ki choot par rakh diya aur usski choot ki daraar par apni jeebh chalaane laga. Mariyum ki uttejana kshan pratikshan badhti ja rahi thi aur ab wo babadaane lagi aaaaaaaaahaaaaaaa, haaaaaaaa, ooooooooohooooooo, haaaaaaaayeeeeeeee, sssssssssssssiiiiiiiiiiiiiiiiiiii, uuuuuuunh, hoooooooooooooon, yeeeeeeeeh kyaaaaaaaaa hoooooooooo rahaaaaaaaaaa haaaaaaaaaai muuuuuuuuujheeeeeeee, aaaaaaaaaaaag lagiiiiiiiiiiiiiiiiiii haaaaaaaaaai meriiiiiiiiiiii choooooooooooot meeeeeeeeeeeeeeein. Mazaaaaaaaaaaa bhiiiiiiiiiiiiiii bahuuuuuuuuuuuuut aaaaaaaaa rahaaaaaaaaaa haaaaaaai beeee chaaaaaaaaainiiiiiiiiiiiiiiii bhiiiiiiiiiiiiiiii hoooooooooo rahiiiiiiiiiiiiiiiii haaaaaaaaaaaaaaai. Jaldiiiiiiiiiiiiiiiii kuuuuuuuuuuchh karoooooooooo. Maine usski choot ki dono phaankein apni ungliyon ki madad se phaila deen. Usski gulab ki pattiyon jaisi dono puttiyaan phadphada rahi theen aur usska chaney ke aakaar ka dana ubhar kar spasht nazar aa raha tha. Maine uspar apni jeeb rakhi to Maruyum uchhalne ko hui par Meri aur Tanvi ki milijuli pakad ke kaaran wo zyada nahi uchhal saki. Phir main apni jeebh se usski dono puttiyon ko chaatne laga. Wo sitkar kar utthi. Mariyum ki uttejana ko dekhte huey maine tezi se ek towel uthakar usski chhoti si gaand ke neeche rakha aur lubricating jelly ki shishi uthakar apni ungli se usski choot ke challe par lagayi aur apni ungli se usske challe ko phailane laga. Mujhe dikh raha tha ke usski choot ka challa na phailaya gaya to mere lund ko chheel dega. Challe par meri ungli ko bhi wo nahi she paa rahi thi aur usski uttejana badhti jaa rahi thi.

Maine Mariyum ki choti si choot mein dher saari jelly laga di aur apne lund par bhi achhi tarah se jelly ragadkar ussko chikna kar diya. Phir maine Tanvi se kaha ke Mariyum ko sambhale kyonki main usski choot mein lund ghusaane jaa raha hoon. Tanvi ne kaha ke tum daalo main dekh rahi hoon. Maine apna lund Mariyum ki choot ke challe se bhida diya aur dabaav daalne laga. Thora sa dabaava badhane par mere lund ka topa Mariyum ki choot mein ghus gaya aur wo tadap gayi. Maine ussko poochha ke dard hua kya? Thora sa, ussne kaha. Maine kaha ke koyi baat nahi ab thora zyada hoga jab tumhari kumara jhilli phad ke mera lund tumhari choot mein ghusega to. Usski uttejana itni zyada thi ke wo boli jo bhi hona hai hone do bas jaldi karo ab main aur bardasht nahi kar sakti. Maine thori jelly aur humare sangam sthal par lagayi aur phir Mariyum ki dono janghon ko daba kar ek zordar jhatka maara. Tanvi ne apne munh mein Mariyum ki cheekh daba di varna jaane kahan tak wo sunayee deti. Mariyum ki aankhein palat gayee aur wo zor se chatpataane ki nakaam koshish karne lagi. Tanvi ne usse jakda hua tha aur Mariyum kuchh nahi kar paayee. Usski kumari jhilli mere lund ki chot se phat chuki thi aur ussmein se behta khoon neeche pade towel ko laal kar raha tha. Usski tangein zor se kamp rahi theen. Maine 2 min ruk kar apne lund ko dheere dheere usski choot mein thora sa andar bahar karne laga. Udhar Tanvi usski choochiyon ko chaat aur choos rahi thi aur saath hi apne dono hathon se bhi sehla rahi thi.

Thori der mein hi Mariyum ki dard kam ho gayee aur wo chudayee ka maza lene lagi. Jab ussne apni gaand hilani shuru ki to maine apne lund ko poora andar karne ki koshish shuru kar di aur 10-15 dhakkon mein hi mera lund poora usski choot mein samaane laga aur usski bacchedaani se takraane laga aur usski uttejana mein vriddhi hone lagi, jisske phalswaroop Mariyum ki aahein phir se shuru ho gayee. Wo ab neeche se poora zor laga kar apni gaand uthati thi aur mere lund ko usski choot poora leel jaati thi. Wo phir bolne lagi ke haye re main to pehle ke mazey mein hi pagal ho rahi thi par yeh choot mein lund ke aane jaane ne to mujhe maar hi dena hai. Mujhe samajh hi nahi aa rahi ke merey saath kya ho raha hai. Main hawa mein tair rahi hoon ya phir aasmaan mein doob rahi hoon mujhe pata nahi chal raha. Yeh kaisa jhoola hai jo mujhe pata nahi kaise hilorey de raha hai. Dost mujhe zor-zor se chodo, meri choot ki chatni bana do apne moosal se. Phaad do issko saali bahut khujli hoti hai issmein. Saari khujli mita do isski. Zor se karo. Pees do mujhe aur meri choot ko. Haaaaaaaaaaayeeeeeeeeee maaaaaaaaain gayeeeeeeeeeeee, Tanvi Diiiiiiiiiii muuuuujheeeeeeeeee pakad loooooooooooooooooo. Haaaaaaayeeeeeee Ammiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. Aur isske saath hi Mariyum ka jism akad gaya aur ussne apni gaand poori tarah se jitni utha sakti thi utha di aur jhad gayee. Maine bhi usski gaand ko apne hathon mein jakad kar kasske 8-10 karaare dhakke lagaaye aur main bhi jhad gaya.

kramashah......